फ्री होल्ड पॉलिसी के नियमों के विरोध में आए अनिल विज
बोले सात बार का विधायक, फिर भी पॉलिसी बनाने में नहीं ली राय
लोगों ने संघर्ष किया तो दूंगा जनता का साथ
मंत्रिमंडल की बैठक में विज के विरोध पर होल्ड हुआ था एजेंडा
चंडीगढ़, 07 अगस्त (हि.स.)। अंबाला में फ्री होल्ड पॉलिसी लागू किए जाने के मामले में परिवहन मंत्री अनिल विज ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस मुद्दे पर मंत्रिमंडल की बैठक में भी हंगामा होने की सूचना है। अब परिवहन मंत्री अनिल विज ने अपने हलके की जनता के बीच जाकर समर्थन करते हुए उनके संघर्ष में साथ खड़े होने का ऐलान कर दिया है।
राज्य सरकार अंबाला छावनी में फ्री होल्ड पॉलिसी को लीजधारकों को स्थायी स्वामित्व देने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, लेकिन अंबाला छावनी में इस नीति को लेकर असंतोष दिखाई दे रहा है। दशकों से लीज पर रह रहे हजारों परिवार स्थायी मालिकाना हक तो चाहते हैं, लेकिन प्रस्तावित शुल्क, कठोर भुगतान व्यवस्था और 150 वर्ष पुराने दस्तावेजों की शर्त ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि यदि जनता के हितों की अनदेखी हुई और लोगों को आंदोलन करना पड़ा तो वह सरकार के बजाय जनता के साथ खड़े होंगे।
फ्री होल्ड व्यवस्था का अर्थ है कि लीज पर दी गई संपत्ति का स्वामित्व निर्धारित नियमों और शुल्क के आधार पर स्थायी रूप से संबंधित व्यक्ति के नाम कर दिया जाए। इसके बाद संपत्ति का मालिक उसे बेच सकता है, खरीद सकता है, बैंक से ऋण ले सकता है, उत्तराधिकारियों के नाम हस्तांतरित कर सकता है और विकास संबंधी सभी कानूनी प्रक्रियाएं आसानी से पूरी कर सकता है।
अभी तक लीज होल्ड संपत्तियों के कारण हजारों परिवारों को बैंक ऋण, रजिस्ट्री, नक्शा स्वीकृति और अन्य प्रशासनिक कार्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसलिए सैद्धांतिक रूप से लोग फ्री होल्ड व्यवस्था का स्वागत कर रहे हैं, लेकिन उनका कहना है कि यह नीति राहत देने वाली होनी चाहिए।
इसके बाद रजिस्ट्रियों में केवल भवन का उल्लेख होने लगा जबकि जमीन का स्वामित्व सरकार के नाम दर्ज किया जाने लगा। यहीं से लोगों की व्यावहारिक समस्याएं बढ़ती चली गईं। फ्री होल्ड पॉलिसी के प्रारूप में शामिल कुछ प्रस्तावित प्रावधान लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता का कारण बन गए हैं। यह मामला हाल ही में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में भी आया लेकिन इसे होल्ड कर दिया गया।
परिवहन मंत्री अनिल विज की सबसे बड़ी आपत्ति यह है कि पूरी जमीन का मूल्य कलेक्टर रेट के आधार पर जमा करना होगा।
दूसरी शर्त के अनुसार आवेदन के समय ही कुल राशि का 25 प्रतिशत जमा कराना होगा। शेष 75 प्रतिशत राशि एक वर्ष के भीतर जमा करनी होगी। यदि निर्धारित समय में भुगतान नहीं हुआ तो संपत्ति सील किए जाने और सरकार द्वारा कब्जा लेने जैसी कार्रवाई का भी प्रावधान प्रस्तावित है। इतना ही नहीं, बाद में सरकार उस संपत्ति को किसी अन्य व्यक्ति को आवंटित भी कर सकती है। सबसे अधिक विवाद उस शर्त पर है जिसमें करीब 150 वर्ष पुराने मूल दस्तावेज प्रस्तुत करने की बात कही गई है।
अनिल विज के अनुसार वह सात बार के विधायक हैं। इस क्षेत्र की जमीन संबंधी समस्याओं को सबसे बेहतर तरीके से समझते हैं। उनके अनुसार जब कैबिनेट बैठक में इस नीति का एजेंडा आया तो उन्होंने कहा कि इतनी महत्वपूर्ण नीति पर उनसे कोई राय नहीं ली गई। उन्होंने सुझाव दिया कि पहले सभी हितधारकों, जनप्रतिनिधियों और विशेषज्ञों की राय ली जाए, उसके बाद ही अंतिम निर्णय किया जाए। उनके विरोध के बाद एजेंडा फिलहाल स्थगित कर दिया गया।
विज का कहना है कि उनका पहला प्रयास सरकार के भीतर रहकर नीति में आवश्यक बदलाव करवाने का होगा, लेकिन यदि जनता की बात नहीं सुनी गई और आंदोलन की नौबत आई तो वह जनता के साथ खड़े होंगे। विज ने कहा कि वह सात बार से अंबाला छावनी से विधायक हैं। इतनी बड़ी नीति और मुझसे राय तक नहीं ली गई। यदि जनता को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ा तो मैं सरकार के साथ नहीं, बल्कि जनता के साथ खड़ा रहूंगा। जरूरत पड़ी तो धरने, प्रदर्शन और रैलियों में भी शामिल होऊंगा।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा

