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हिसार के वैज्ञानिकों की ताकत पर फ्रांस की नजर, अनुसंधान व तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर बनी सहमति

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हिसार के वैज्ञानिकों की ताकत पर फ्रांस की नजर, अनुसंधान व तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर बनी सहमति


फ्रांस के प्रतिनिधिमंडल ने किया लुवास का दौरा, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण गतिविधियों की सराहना

हिसार, 10 जुलाई (हि.स.)। हिसार स्थित लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु

विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) की वैज्ञानिक एवं अनुसंधान क्षमताओं ने फ्रांस के प्रतिनिधिमंडल

को प्रभावित किया है। फ्रांस के दो सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय का दौरा

कर यहां संचालित अनुसंधान, प्रशिक्षण और विस्तार शिक्षा गतिविधियों का विस्तृत अवलोकन

किया तथा भविष्य में दोनों देशों के बीच पशुपालन एवं पशु विज्ञान के क्षेत्र में शैक्षणिक,

वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग को और मजबूत बनाने पर सकारात्मक चर्चा की।

प्रतिनिधिमंडल में फ्रांस की मैडम नेड्ज लीबो तथा नई दिल्ली स्थित फ्रांसीसी

दूतावास में कृषि मामलों की काउंसलर मैडम मोनिक ट्रान शामिल थीं। कुलपति प्रो. (डॉ.)

विनोद कुमार वर्मा की अध्यक्षता में शुक्रवार को आयोजित बैठक में विश्वविद्यालय की

उपलब्धियों, अनुसंधान परियोजनाओं और भविष्य की योजनाओं का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया

गया।

कुलपति प्रो. वर्मा ने बताया कि लुवास शिक्षण, अनुसंधान और विस्तार शिक्षा

के माध्यम से न केवल गुणवत्तापूर्ण पशु चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध करा रहा है, बल्कि आधुनिक

तकनीक और वैज्ञानिक जानकारी को हरियाणा के पशुपालकों तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण

भूमिका निभा रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों

के साथ किए गए समझौता ज्ञापनों (एमओयू), नवाचारों तथा विभिन्न शोध परियोजनाओं की भी

जानकारी दी।

बैठक के दौरान फ्रांसीसी प्रतिनिधिमंडल ने लुवास की अनुसंधान गतिविधियों और

वैज्ञानिक उपलब्धियों की सराहना करते हुए संयुक्त अनुसंधान, विशेषज्ञों के आदान-प्रदान,

प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा तकनीकी सहयोग की संभावनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।

मैडम नेड्ज लीबो ने विशेष रूप से मुंह-खुर रोग नियंत्रण के लिए संचालित टीकाकरण अभियान

और कौशल विकास के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की पहल को सराहनीय बताया।

बैठक के बाद प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय के पशु फार्म का दौरा कर वहां

की आधुनिक प्रबंधन व्यवस्था की प्रशंसा की। इसके अलावा उन्होंने पशु जैव प्रौद्योगिकी

विभाग की जीनोमिक डीएनए, इम्यूनोलॉजी और खाद्य सुरक्षा प्रयोगशालाओं, रोग मुक्त लघु

पशु गृह, पशु चिकित्सा क्लिनिकल कॉम्प्लेक्स तथा निर्माणाधीन नए परिसर में स्थापित

ईटीटी-आईवीएफ लैब का निरीक्षण किया। प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय की अत्याधुनिक

अनुसंधान एवं प्रशिक्षण सुविधाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बताते हुए इसे वैश्विक सहयोग

के लिए एक महत्वपूर्ण संस्थान बताया।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर