राेहतक: हर घंटे 11 बच्चे हो रहे लापता, तस्करी के जाल में फंसने का खतरा: सुरिंदर सिंह मान
एमडीडी ऑफ इंडिया चलाएगा बाल तस्करी के खिलाफ अभियान
संवेदनशील परिवारों के बच्चों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने पर जोर
रोहतक, 02 अगस्त (हि.स.)। देश में हर घंटे 11 बच्चों के लापता होने के आंकड़ों के बीच बाल तस्करी की रोकथाम को लेकर एमडीडी ऑफ इंडिया ने जिले में व्यापक अभियान चलाने का निर्णय लिया है। अब संगठन सरकार और प्रशासन के सहयोग से जिले में जागरूकता अभियान चलाने के साथ ऐसे परिवारों की पहचान करेगा, जिनके बच्चे आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों के कारण तस्करी गिरोहों के निशाने पर आ सकते हैं। बच्चों को सरकारी योजनाओं से जोड़कर उनकी शिक्षा जारी रखने और उन्हें बाल मजदूरी से दूर रखने का प्रयास किया जाएगा।
रविवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए एमडीडी ऑफ इंडिया के कार्यकारी अधिकारी सुरिंदर सिंह मान ने कहा कि देश में रोजाना छह बच्चों की ट्रैफिकिंग और पांच बच्चों को जबरन मजदूरी के लिए मजबूर किए जाने की स्थिति गंभीर चिंता का विषय है। हर घंटे 11 बच्चों के गुम होने के आंकड़े के बीच बड़ी संख्या में बच्चों के तस्करी का शिकार होने का खतरा बना रहता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों को तस्करी गिरोह विशेष रूप से निशाना बनाते हैं और बाल मजदूरी ट्रैफिकिंग का सबसे गंभीर रूप है।
2030 तक चलेगा राष्ट्रव्यापी अभियान
मान ने बताया कि बाल तस्करी के खिलाफ राष्ट्रव्यापी अभियान का निर्णय नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित चार दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श में लिया गया। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) के इस आयोजन में देश के 782 जिलों से जुड़े संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। नेटवर्क से जुड़े 250 से अधिक नागरिक समाज संगठन बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए काम कर रहे हैं। यह अभियान वर्ष 2030 तक जारी रहेगा। संगठन के अनुसार, अप्रैल 2023 से दिसंबर 2025 के बीच जेआरसी और उसके सहयोगी संगठनों के प्रयासों से देशभर में 1,22,516 बच्चों को ट्रैफिकिंग से बचाया गया। एमडीडी ऑफ इंडिया भी जेआरसी का सहयोगी संगठन है।
सुरिंदर सिंह मान ने कहा कि तस्करी से मुक्त कराए गए बच्चों को केवल बचाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके सुरक्षित पुनर्वास और भविष्य की सुरक्षा पर भी ध्यान देना जरूरी है। अभियान के दौरान यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बच्चे दोबारा तस्करी के जाल में न फंसें और शिक्षा व रोजगार के बेहतर अवसरों के जरिए समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें।
हिन्दुस्थान समाचार / अनिल

