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हिसार : साहित्यकार जयभगवान सैनी की जनिका आधारित तीन पुस्तकों का विमोचन

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हिसार : साहित्यकार जयभगवान सैनी की जनिका आधारित तीन पुस्तकों का विमोचन


जयभगवान सैनी की तीन पुस्तकों जनिकाओं के मोती, म्हारी टूम जनिकाएं व सबद बोलैं

सैं का विमोचन

हिसार, 05 अक्टूबर (हि.स.)। निरंतर साहित्य साधना में जुटे हिसार के वरिष्ठ

साहित्यकार जयभगवान सैनी की जनिका आधारित तीन नव प्रकाशित पुस्तकों का विमोचन पूरे

उत्साह के साथ किया गया। साहित्य एवं संस्कृति अकादमी हरियाणा एवं आदर्श जनसेवा एजुकेशन

सोसायटी डिंग के संयुक्त तत्वावधान में द्वितीय राष्ट्रीय जनिका सम्मेलन और जनिकाकार

सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।

इस समारोह में जयभगवान सैनी की पुस्तकें जनिकाओं के मोती, म्हारी टूम जनिकाएं

(हरियाणवी) व सबद बोलैं सैं (हरियाणवी) का विमोचन हुआ। डिंग में आयोजित इस सम्मेलन

में हरियाणा एवं संस्कृति अकादमी के निदेशक डॉ. धर्मदेव विद्यार्थी, प्राचार्या डॉ.

शैलजा छाबड़ा, वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. रूप देवगुण, डॉ. राजकुमार निजात, डॉ. ज्ञानप्रकाश

पीयूष, अविनाश कौशल व जनकराज शर्मा सहित काफी संख्या में रचनाकार मौजूद रहे।

इस अवसर पर साहित्यकार जयभगवान सैनी की पुस्तकों का विमोचन करने के साथ ही

उन्हें सम्मानित भी किया गया। मंच से बताया गया कि जयभगवान सैनी विभिन्न विधाओं पर

कई पुस्तकें लिख चुके हैं। उनके द्वारा लिखित श्री अमरनाथ धाम एवं गंगा मैया, डगर-डगर

नगर-नगर, रास्तों में रास्ते, वे सुनहरे पल व चलें धामों की ओर यात्रा संस्मरण काफी

पसंद किए गए हैं। इसी भांति कविता संग्रह उम्मीदें, फलों का फल, सब्जीनामा, धरोहर की

पाती व धरती मां (हरियाणवी अनुवादित) कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं।

लघु कविता संग्रह लुप्त-विलुप्त (हरियाणवी), मन की गंगोत्री, स्मृति शेष :

जयलालदास, प्रो. रूप देवगुण : अतीत की झलकियां, अतीत के झरोखे, एक बै अमराई मैं (हरियाणवी

अनुवादित), दिवस में दिवस, मैंने पूछा, अन्न पै अधिकार सभी का (हरियाणवी अनुवादित)

व विभूतियों की महिमा भी पाठकों ने सराहे हैं। आत्मकथा उमड़ती हरियाणवी यादें, बाल

साहित्य कलरव करते पक्षी, पक्षियों का संसार व चुन्नू-मुन्नू की रचना भी वे कर चुके

हैं। घटना-दुर्घटना कहानी संग्रह भी वे लिख चुके हैं। सैनिक जीवन : एक संघर्ष गाथा

पुस्तक को काफी पसंद किया गया है।

विमोचन समारोह के उपरांत जयभगवान सैनी ने बताया कि वे निरंतर साहित्य सृजन

में जुटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ साहित्य का सृजन करके समाज को नई दिशा दिखाई

जा सकती है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर