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चंडीगढ़: एमबीबीएस सीटें बढ़ाने की तैयारी में हरियाणाा सरकार 

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-अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने अधिकारियों को दी डेडलाइन की चेतावनी

चंडीगढ़, 27 मार्च (हि.स.)। हरियाणा में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में सरकार ने सख्त कदम उठाया है। चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने राज्य के विभिन्न सरकारी मेडिकल कॉलेजों की प्रगति की समीक्षा करते हुए निर्माण एजेंसियों और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में हर हाल में पूरे किए जाएं।

अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि राज्य सरकार मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार कर रही है, जिससे एमबीबीएस सीटों में वृद्धि के साथ-साथ आम जनता को बेहतर और सुलभ टर्शियरी स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। समीक्षा बैठक में यह भी सामने आया कि कई परियोजनाएं अभी अधूरी हैं, जिनमें तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। डॉ. मिश्रा ने चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और तय समयसीमा में काम पूरा करना अनिवार्य होगा।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सिविल कार्यों को समय-सीमा के भीतर पूरा करना, उपकरणों की खरीद करना और फैकल्टी की भर्ती करना सुनिश्चित करें। कैथल और यमुनानगर में स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज लगभग 80 प्रतिशत पूरे हो चुके हैं। उनको 30 जून, 2026 की डेडलाइन दी गई है।

बायोमेडिकल उपकरणों और फर्नीचर की खरीद करने के निर्देश

डॉ. मिश्रा ने अधिकारियों से कहा कि वे बायोमेडिकल उपकरणों और फर्नीचर की खरीद शुरू करें, और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग से सभी ज़रूरी मंज़ूरी प्राप्त करें, ताकि वर्ष 2027–28 के शैक्षणिक सत्र से एमबीबीएस में दाखिले शुरू किए जा सकें।

बैठक के दौरान यह जानकारी दी गई कि जींद स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज में जहां संशोधित वित्तीय अनुमानों की मंजूरी अटकी होने के कारण निर्माण कार्य धीमा हो गया है। इसके लिए अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे वित्त विभाग के साथ इस मामले का फॉलो-अप करें। डॉ. सुमिता मिश्रा ने निर्देश दिया कि इन मुद्दों को जल्द से जल्द हल किया जाए। बैठक में यह भी बताया गया कि कुटेल, करनाल स्थित पं. दीन दयाल उपाध्याय स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय का मुख्य परिसर पूरा हो चुका है, जबकि निजी वार्ड प्रोजेक्ट—जिसकी अनुमानित लागत 30.45 करोड़ रुपये है,पर काम अभी लगभग 30 प्रतिशत ही हुआ है। काम करने वाली एजेंसी को निर्देश दिया गया है कि वे 30 सितंबर, 2026 की डेडलाइन को पूरा करने के लिए निर्माण कार्य में तेजी लाएं। डॉ. मिश्रा ने स्पष्ट किया कि सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरे किए जाने चाहिए, ताकि नए मेडिकल कॉलेज बिना किसी देरी के पूरी तरह से चालू हो सकें।

निर्माताओं के साथ बातचीत करने के लिए गठित की जाए समिति

तीन संस्थानों के लिए, स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, कुटेल, पं. नेकी राम शर्मा सरकारी मेडिकल कॉलेज भिवानी और महर्षि च्यवन सरकारी मेडिकल कॉलेज, कोरियावास में, जहां 2025-26 सत्र के लिए 100 एमबीबीएस छात्र पहले ही दाखिला ले चुके है, यह निर्णय लिया गया कि मूल उपकरण निर्माताओं के साथ बातचीत करने के लिए एक समिति का गठन किया जाए, ताकि रखरखाव के कार्यों का ठेका दिया जा सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा