सूरत में श्रमिकों का कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन, रविवार की छुट्टी और पूरे वेतन की मांग
सूरत, 12 सितंबर (हि.स.)। सूरत में श्रमिकों ने शनिवार को अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। श्रमिक रविवार की साप्ताहिक छुट्टी, आठ घंटे की शिफ्ट और छुट्टी के दिन पूरे वेतन के भुगतान की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान श्रमिकों और पुलिस-प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति भी बनी।
प्रदर्शन के दौरान एक श्रमिक ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उसके साथ मारपीट की और धमकी दी, जिसके चलते स्थिति तनावपूर्ण हो गई। इस दौरान डीसीपी राजदीपसिंह नरसिंह नकुम हाथ में डंडा लेकर मौके पर पहुंचे और चेतावनी दी कि यदि उनकी बात नहीं मानी गई तो टकराव होने पर एफआईआर दर्ज की जाएगी। हालांकि, श्रमिक नेताओं और अधिकारियों की समझाइश के बाद प्रदर्शनकारी धीरे-धीरे वापस लौटने लगे।
सूरत के विभिन्न जीआईडीसी क्षेत्रों में एम्ब्रॉयडरी कारखानों में काम करने वाले 10 लाख से अधिक श्रमिक पिछले कुछ समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। श्रमिकों की मांग है कि उन्हें सप्ताह में एक दिन रविवार की छुट्टी और उसका पूरा वेतन दिया जाए।
यह विरोध आंदोलन 16 अगस्त को अमरेली के वेधांता इंडस्ट्रियल क्षेत्र से शुरू हुआ था, जो धीरे-धीरे सूरत के अंजनी इंडस्ट्रीज, कतारगाम, सचिन जीआईडीसी, पिपोदरा और कडोदरा सहित विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों तक फैल गया। कई स्थानों पर श्रमिकों ने काम पूरी तरह बंद कर उग्र प्रदर्शन किये।
स्थिति को देखते हुए पुलिस को कई स्थानों पर बंदोबस्त करना पड़ा। सूरत पुलिस हाई अलर्ट पर है और विशेष रूप से रविवार की छुट्टी के दिनों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार तैनाती की जा रही है।
श्रमिक यूनियन के नेताओं ने पहले कलेक्टर कार्यालय में आवेदन दिया था। हालांकि, शनिवार होने के कारण अधिकारियों से मुलाकात नहीं हो सकी। अब श्रमिक नेता सोमवार को दोबारा ज्ञापन सौंपेंगे।
इस बीच प्रशासन और पुलिस की ओर से विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों के व्यापारियों तथा जिला श्रम अधिकारी के साथ लगातार बैठकें की जा रही हैं। प्रशासन का उद्देश्य मालिकों और श्रमिकों के बीच चल रहे विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाना और वेतन कटौती के बिना साप्ताहिक छुट्टी का समाधान निकालना है।
श्रमिक अरविंद राज विश्वकर्मा ने कहा कि उनकी मुख्य मांग रविवार की छुट्टी की है। उन्होंने कहा कि श्रमिक रोजाना 12-12 घंटे काम करते हैं, इसलिए उन्हें रविवार की छुट्टी के साथ पूरा वेतन भी मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में काम के दबाव के कारण कई श्रमिकों को समय पर भोजन करने का समय नहीं मिल रहा और पर्याप्त नींद भी नहीं मिल पा रही है।
श्रमिक नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि 30 सितंबर तक उनकी मांगों पर संतोषजनक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे भूख हड़ताल और धरना शुरू करेंगे।
मजदूर यूनियन के प्रतिनिधि अजय डी. दुबे ने कहा कि यदि 30 सितंबर तक उनकी मांगों और न्यायोचित अधिकारों का समाधान नहीं किया गया तो श्रमिक अपने वैधानिक अधिकारों का उपयोग करते हुए भूख हड़ताल और धरना देने के लिए मजबूर होंगे। साथ ही संबंधित सरकारी विभागों से श्रमिकों को न्याय दिलाने की मांग की जाएगी।
हालांकि, अधिकारियों और श्रमिक नेताओं की समझाइश के बाद फिलहाल प्रदर्शनकारी वापस लौट गए हैं। प्रशासन का कहना है कि पूरे औद्योगिक क्षेत्र में फिलहाल शांति है। रविवार को भी स्थानीय पुलिस का बंदोबस्त जारी रहेगा।
श्रमिकों की मांगों पर प्रशासन की अगली कार्रवाई और सोमवार को सौंपे जाने वाले ज्ञापन पर अब सभी की नजरें टिकी हैं।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे

