राष्ट्रनिर्माताओं को उचित स्थान दिलाना सबकी सामूहिक जिम्मेदारी : विजेंद्र गुप्ता
नई दिल्ली, 06 जुलाई (हि.स.)। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि इतिहास की धूल अक्सर उन व्यक्तित्वों पर भी जम जाती है, जिन्होंने राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई होती है। ऐसे राष्ट्रनिर्माताओं को जनमानस में उनका उचित स्थान पुनः दिलाना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। यह विचार विजेंद्र गुप्ता ने सोमवार को दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी द्वारा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर आयोजित स्मृति समारोह में व्यक्त किए।
यह कार्यक्रम दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी मुख्यालय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी मार्ग चांदनी चौक में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में दक्षिण दिल्ली से सांसद बांसुरी स्वराज, राज्य सभा सदस्य विनोद तावड़े, दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी के अध्यक्ष डॉ. सुमीत भसीन, दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी बोर्ड के सदस्य उपस्थित रहे।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए विजेंद्र गुप्ता ने उन्हें ऐसे दूरदर्शी राजनेता के रूप में स्मरण किया, जिन्होंने सदैव राजनीतिक पद से ऊपर राष्ट्रहित को रखा। उन्होंने कहा कि यद्यपि डॉ. मुखर्जी स्वतंत्र भारत की प्रथम केंद्रीय मंत्रिपरिषद में उद्योग मंत्री रहे, किंतु वे कभी कांग्रेस पार्टी के सदस्य नहीं थे। उन्होंने बताया कि महात्मा गांधी के सुझाव पर डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर के साथ डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को भी स्वतंत्र भारत की प्रथम मंत्रिपरिषद में सम्मिलित किया गया था, जिससे देश की पहली सरकार में व्यापक राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।
विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि जम्मू-कश्मीर नीति को लेकर सिद्धांतगत मतभेदों के कारण डॉ. मुखर्जी ने अंततः केंद्रीय मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया। उन्होंने कहा कि “एक देश में दो संविधान, दो निशान और दो प्रधान नहीं चलेंगे” के सिद्धांत के प्रति उनका दृढ़ विरोध भारत की एकता, संवैधानिक अखंडता और राष्ट्रीय संप्रभुता के प्रति उनकी अटूट निष्ठा का प्रतीक था। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का जीवन इस बात का स्थायी संदेश देता है कि सार्वजनिक जीवन सदैव सिद्धांतों, साहस और व्यापक राष्ट्रीय हित से संचालित होना चाहिए।
विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि इतिहास में अनेक महान व्यक्तित्व सम्मानपूर्वक स्मरण किए जाते हैं, किंतु समय के साथ उनके योगदान जनमानस की स्मृति से धूमिल होने लगते हैं। उन्होंने बताया कि दिल्ली विधानसभा ने ऐसे लगभग 45 विशिष्ट किंतु अपेक्षाकृत अल्प-परिचित राष्ट्रनिर्माताओं के जीवन एवं योगदान का दस्तावेजीकरण और प्रकाशन करने का एक सतत अभियान प्रारम्भ किया है। उन्होंने कहा कि यह पहल भारत की बौद्धिक, सांस्कृतिक एवं संवैधानिक विरासत के संरक्षण के प्रति विधानसभा की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव

