सरकारी अस्पताल में मरीजों से पैसे लेने का वीडियो वायरल, आरोपित ऑपरेटर को तत्काल सेवा से हटाया गया
सूरत, 02 जून(हि.स.)। सूरत के नए सिविल अस्पताल में मरीजों से कथित रूप से अवैध वसूली का मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है। अस्पताल की केसबारी (पंजीकरण काउंटर) पर कार्यरत आउटसोर्सिंग एजेंसी के एक कंप्यूटर ऑपरेटर का मरीजों से 20 रुपये लेने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में आया और आरोपी कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से सेवा से मुक्त कर दिया गया।
मामले को गंभीरता से लेते हुए नई सिविल अस्पताल की मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. पारुल वडगामा की अध्यक्षता में तत्काल समीक्षा बैठक बुलाई गई। बैठक में आरोपी डेटा ऑपरेटर के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्णय लिया गया और उसे तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर दिया गया।
मेडिकल सुपरिटेंडेंट के कक्ष में आयोजित इस आपात बैठक में आरएमओ डॉ. केतन नायक, इंचार्ज नर्सिंग सुपरिटेंडेंट इकबाल कड़ीवाला, विभिन्न आउटसोर्सिंग एजेंसियों के ठेकेदार, सुपरवाइजर, डेटा ऑपरेटर और सुरक्षा अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में अस्पताल प्रशासन ने भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति दोहराते हुए स्पष्ट किया कि अस्पताल में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी, अवैध वसूली या मरीजों के साथ दुर्व्यवहार को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
डॉ. पारुल वडगामा ने सभी डेटा ऑपरेटरों और कर्मचारियों को निर्देश दिया कि अस्पताल में आने वाले गरीब और जरूरतमंद मरीजों के साथ सम्मानजनक, संवेदनशील और सौहार्दपूर्ण व्यवहार किया जाए। मरीजों का पंजीकरण करते समय उनकी सभी जानकारी पूरी सावधानी और शुद्धता के साथ दर्ज की जाए तथा कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि सभी कर्मचारियों को पारदर्शिता, ईमानदारी और तत्परता के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना होगा, ताकि मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल सके और उन्हें अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।अस्पताल प्रशासन ने सभी आउटसोर्सिंग एजेंसियों के सुपरवाइजरों को प्रतिदिन केसबारी काउंटरों का औचक निरीक्षण करने और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि सभी कर्मचारी समय पर और नियमों के अनुरूप अपनी ड्यूटी का पालन करें।
सिविल अस्पताल प्रशासन ने चेतावनी दी है कि भविष्य में यदि किसी भी कर्मचारी के खिलाफ आर्थिक अनियमितता, रिश्वतखोरी, अवैध वसूली या मरीजों के साथ अभद्र व्यवहार की शिकायत सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
अस्पताल प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई को मरीजों के हितों की रक्षा और अस्पताल व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे

