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दिल्ली विधानसभा में राष्ट्रीय पर्यावरण बाल संसद का आयोजन

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दिल्ली विधानसभा में राष्ट्रीय पर्यावरण बाल संसद का आयोजन


नई दिल्ली, 07 अक्टूबर (हि.स.)। दिल्ली विधानसभा में बुधवार को राष्ट्रीय पर्यावरण बाल संसद का आयोजन किया गया। इसमें “आज बोएंगे, कल बढ़ेगा” विषय पर आयोजित इस बाल संसद में 7 से 17 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों ने विधानसभा के सदन में बैठकर पर्यावरण संरक्षण, टिकाऊ विकास और जिम्मेदार नागरिकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की।

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि हमारे बच्चे जिस भविष्य में जीवन बिताएंगे, वह इस बात से तय होगा कि हम आज क्या बचाते हैं। आने वाली पीढ़ियां या तो हमारे द्वारा संरक्षित प्राकृतिक संसाधनों के लिए हमें धन्यवाद देंगी या फिर इस बात पर सवाल करेंगी कि हमने क्या-क्या नष्ट होने दिया।

बाल संसद की कार्यवाही की सराहना करते हुए विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि बच्चों ने उस भावना का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है, जिसके साथ किसी विधानमंडल को कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि नागरिक अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों को इस अपेक्षा के साथ सदन में भेजते हैं कि जनहित के विषयों पर गंभीरता, तथ्यों और तर्क के साथ चर्चा होगी। बाल संसद में बच्चों द्वारा की गई चर्चा न केवल युवाओं के लिए, बल्कि देश के सभी विधानमंडलों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण है।

विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि सदन संवाद, तर्क और विचारपूर्ण चर्चा का मंच होता है। आज हमने यहां देखा कि सार्थक विचार-विमर्श लोकतंत्र को कितना मजबूत बना सकता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल अपनी बात रखने का नाम नहीं है, बल्कि दूसरों को सुनना, प्रश्न करना, असहमति व्यक्त करना और तर्कपूर्ण संवाद के माध्यम से समाधान तक पहुंचना भी लोकतंत्र का अभिन्न हिस्सा है।

कार्यक्रम के केंद्रीय विषय पर्यावरण संरक्षण का उल्लेख करते हुए विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण कोई सीमित या केवल नीतिगत विषय नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन के अस्तित्व से सीधे जुड़ा प्रश्न है। उन्होंने कहा कि पेड़ों की रक्षा का सीधा संबंध उस हवा से है, जिसमें हम सांस लेते हैं। इसी प्रकार पानी के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। प्रदूषित हवा, लगातार घटता हरित क्षेत्र और बढ़ती जल समस्या को न समझना मानवता के सामने खड़ी बड़ी चुनौती को न पहचानना है।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि वर्तमान पीढ़ी के कार्य यह तय करेंगे कि आने वाली पीढ़ियों को कैसा वातावरण मिलेगा। गुप्ता ने इस धारणा को खारिज किया कि पर्यावरण संरक्षण और विकास एक-दूसरे के विरोधी हैं। उन्होंने दिल्ली विधानसभा द्वारा कागजरहित कार्यप्रणाली, डिजिटल व्यवस्था और सौर ऊर्जा के उपयोग की दिशा में किए गए प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि हम सौर ऊर्जा का अधिक उपयोग करते हैं तो यह भी विकास है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली विधानसभा की अपनी विकास यात्रा भी “विरासत और विकास” को साथ लेकर आगे बढ़ने की दिशा में है। उन्होंने कहा कि संस्थानों को नई तकनीक और पर्यावरण के अनुकूल व्यवस्थाओं को अपनाना चाहिए, लेकिन इसके साथ उन्हें अपनी ऐतिहासिक विरासत के प्रति भी सजग रहना चाहिए।

विधानसभा के सदन में बैठे बच्चों का ध्यान आकर्षित करते हुए उन्होंने कहा कि यह सदन सौ वर्ष से अधिक लंबे विधायी इतिहास का साक्षी रहा है। उन्होंने विठ्ठलभाई पटेल के योगदान, औपनिवेशिक काल की महत्वपूर्ण बहसों और रॉलेट एक्ट के विरोध से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह भवन केवल एक पुरानी इमारत नहीं है, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक यात्रा का जीवंत साक्षी है। यह हमें याद दिलाता है कि भविष्य का निर्माण करते समय हमें अपने अतीत से मिले अनुभवों और सीख को कभी नहीं भूलना चाहिए।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि बाल संसद की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि बच्चों को केवल विधानसभा देखने का अवसर नहीं मिला, बल्कि उन्हें निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की सीटों पर बैठकर सदन की कार्यवाही का अनुभव करने, अपनी बात रखने, अलग-अलग विचार सुनने और लोकतांत्रिक संवाद की प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिला।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि राष्ट्रीय पर्यावरण बाल संसद जैसे कार्यक्रम बच्चों में ऐसी पीढ़ी तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, जो पर्यावरण संरक्षण को किसी एक दिन या अभियान तक सीमित न मानकर निरंतर नागरिक जिम्मेदारी के रूप में देखे।

इस अवसर पर दिल्ली विधानसभा के उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट, पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के संयोजक गोपाल आर्य और सह-संयोजक राकेश जैन भी उपस्थित रहे। मोहन सिंह बिष्ट ने कहा कि जब बच्चे पर्यावरण और सार्वजनिक दायित्व से जुड़े विषयों पर गंभीरता से विचार और संवाद करते हैं, तो वे भविष्य के प्रति हमारे विश्वास को और मजबूत करते हैं। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय पर्यावरण बाल संसद-2026 के प्रतिभागियों को स्मृति-चिह्न तथा विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए।

विजेताओं को सूची : (हरित नवांकुर) मायरा खन्ना, विनायक राजेश मापारी, गौरांगी संदीप जापे, मिष्टी पावस्कर, आरव वर्मा, (विशेष उल्लेख पुरस्कार) : आयांश बाल्यान, सादवी, (बाल संसद चेंज मेकर) आयुषी मिश्रा, अर्जुन सिंह (सर्वश्रेष्ठ वक्ता), प्रिशा शर्मा, सिद्धार्थ पांडेय (सर्वश्रेष्ठ सांसद), आदित्य नंदा, श्री (सर्वश्रेष्ठ प्रतिनिधि अध्यक्ष) ताशवी बिष्ट, (सर्वश्रेष्ठ प्रतिनिधि प्रधानमंत्री) प्रणया शर्मा ( बाल शोधकर्ता) दीक्षा सिंह, अरहान आशीष ताले (सर्वश्रेष्ठ पत्रकार) मंजरी धोंडियाल, मनन द्विवेदी ( बाल संसद आइकन) दीपाली श्रीपत राठौड़।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव