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रक्षाबंधन पर जेल में भावुक पल: राखी बांधते ही रो पड़ीं बहनें

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रक्षाबंधन पर जेल में भावुक पल: राखी बांधते ही रो पड़ीं बहनें


अहमदाबाद, 28 अगस्त (हि.स.)। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर गुजरात की केंद्रीय जेलों में भाई-बहन के प्रेम और भावनाओं का मार्मिक दृश्य देखने को मिला। वडोदरा सेंट्रल जेल में करीब 1,700 कैदियों के लिए बहनों को राखी बांधने की विशेष व्यवस्था की गई। बहनों ने जेल पहुंचकर अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी, वहीं भाइयों ने भी बहनों को उपहार भेंट किए।

इस दौरान कई बहनें अपने भाइयों को देखकर भावुक हो गईं और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। विधायक चैतर वसावा की बहन पुष्पाबेन वसावा ने कहा कि उन्हें इस बात का बहुत अफसोस है कि उनका भाई जेल में है। उन्होंने भगवान से प्रार्थना की कि उनका भाई जल्द जेल से बाहर आए। काशीबेन वसावा ने बताया कि पिछले वर्ष भी रक्षाबंधन के अवसर पर उनके भाई जेल में ही थे, जिसकी उन्हें काफी पीड़ा है।

भाइयों ने बहनों को तुलसी के पौधे उपहार में दिए

वडोदरा सेंट्रल जेल के सीनियर जेलर एम एन राठवा बताया की बहनों को राखी बांधने के बाद दिए जाने वाले भेंट के लिए जेल प्रयासन की तरह से तुलसी का पौधा उपलब्ध करवाया गया । इस बार रक्षाबंधन को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए एक अनूठी पहल की। जेल में राखी बांधने पहुंची बहनों को भाइयों की ओर से तुलसी के पौधे उपहार में दिए गए। बहनों से अपील की गई कि वे इन पौधों को घर ले जाकर उचित स्थान पर लगाएं और उनकी देखभाल करें। इस पहल के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश समाज तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।

साबरमती जेल में 3 हजार से अधिक कैदियों को बांधी राखी

अहमदाबाद की साबरमती सेंट्रल जेल में भी रक्षाबंधन के अवसर पर विशेष व्यवस्था की गई। सुबह से ही बड़ी संख्या में बहनें अपने भाइयों को राखी बांधने के लिए जेल पहुंचीं। हत्या, चोरी, लूट और अन्य गंभीर अपराधों में सजा भुगत रहे कैदियों से मिलने पहुंची बहनों की आंखों में भी भावनाओं के आंसू दिखाई दिए। इसी तरह का भावुक दृश्य सूरत के लाजपोर जेल व साबरमती जेल में भी दिखाई दिया।

जेल प्रशासन की ओर से सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक रक्षाबंधन कार्यक्रम आयोजित किया गया। पहले से पंजीकरण कराने वाली बहनों को जेल में प्रवेश देकर अलग-अलग टेबलों पर राखी बांधने की व्यवस्था की गई। साबरमती सेंट्रल जेल की दोनों जेलों में मिलाकर 3 हजार से अधिक कैदियों को बहनों ने रक्षासूत्र बांधा।

रक्षाबंधन के इन आयोजनों ने यह संदेश दिया कि जेल की ऊंची दीवारें और सलाखें भी भाई-बहन के प्रेम और रिश्ते की भावनाओं को नहीं रोक सकतीं।

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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे