गांधीनगर में वनरक्षकों का धरना प्रदर्शन, मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ जताया रोष
गांधीनगर, 28 अक्टूबर (हि.स.)। गुजरात राज्य वनरक्षक कर्मचारी मंडल के नेतृत्व में वन विभाग के कर्मचारियों ने अपनी छह सूत्रीय मांगों को लेकर गांधीनगर सत्याग्रह छावणी में धरना प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में वनरक्षक और कर्मचारी एकत्रित हुए तथा सरकार के प्रति नाराजगी जताई। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से मांगें उठाने के बावजूद उनका संतोषजनक समाधान नहीं हुआ है।
वनरक्षक कर्मचारी मंडल के जिला प्रमुख प्रशांतसिंह वाघेला ने कहा कि वन विभाग के कर्मचारी जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए अत्यंत जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में ड्यूटी करते हैं लेकिन उनकी जिम्मेदारियों के अनुरूप सुविधाएं और लाभ नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
वनकर्मियों की प्रमुख मांगों में जोखिमपूर्ण ड्यूटी के लिए रिस्क अलाउंस या जोखिम भत्ता देना तथा सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े कार्यों के दौरान होने वाले जोखिम को ध्यान में रखते हुए उचित सुविधाएं उपलब्ध कराना शामिल है। इसके अलावा कर्मचारियों ने रजा (अवकाश) के वेतन की गणना में विसंगतियां दूर करने, डीए और सीएलए के आधार पर भुगतान करने तथा 48 दिनों की सीमा हटाकर पूरे दिनों का वेतन देने की मांग उठाई।
कर्मचारियों ने सरकारी किफायत नीति के तहत बंद किए गए फॉरेस्टर और रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर के पदों को दोबारा शुरू करने तथा विभाग में पदों की संख्या बढ़ाने की मांग की। उन्होंने पदोन्नति के अनुपात में सुधार की भी मांग रखी है।
वनकर्मियों की एक अन्य मांग फॉरेस्टर और आरएफओ की सीधी भर्ती प्रक्रिया में बदलाव से संबंधित है। कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों का अनुभव रखने वाले आंतरिक कर्मचारियों को पदोन्नति में प्राथमिकता दी जानी चाहिए। साथ ही फॉरेस्ट गार्ड और फॉरेस्टर के ग्रेड-पे में विसंगतियां दूर कर लंबे समय से लंबित पदोन्नति संबंधी समस्याओं का स्थायी समाधान किया जाना चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे

