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जंगल की जमीन पर कब्जे को लेकर आदिवासियों में आक्रोश, 2 हजार लोगों ने निकाली विरोध रैली

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जंगल की जमीन पर कब्जे को लेकर आदिवासियों में आक्रोश, 2 हजार लोगों ने निकाली विरोध रैली


जंगल की जमीन पर कब्जे को लेकर आदिवासियों में आक्रोश, 2 हजार लोगों ने निकाली विरोध रैली


सूरत, 14 अगस्त (हि.स.)। गुजरात के सूरत जिले की उमरपाड़ा तहसील में जंगल की जमीन पर खेती और कथित अतिक्रमण के मुद्दे को लेकर स्थानीय आदिवासी समाज में भारी रोष है। सांगबारा तहसील के लोगों पर कथित रूप से जंगल की जमीन पर अवैध कब्जा करने का आरोप लगाते हुए गुरुवार को करीब 2 हजार आदिवासी एकत्रित हुए और ‘जंगल बचाओ, आदिवासी बचाओ’ के नारों के साथ विशाल विरोध रैली निकाली।

रैली उमरपाड़ा मामलतदार कार्यालय पहुंची, जहां प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपकर जंगल की जमीन पर कथित अवैध खेती और अतिक्रमण रोकने की मांग की।

उमरपाड़ा की आदिवासी महिला नेता एवं खोटारामपुरा की सरपंच चंदनबेन वसावा ने आरोप लगाया कि सांगबारा क्षेत्र के कुछ लोग अपने क्षेत्र में जमीन होने के बावजूद उमरपाड़ा में जंगल की जमीन पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं और स्थानीय लोगों को धमकाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उमरपाड़ा के स्थानीय विस्थापितों के अधिकार अभी भी लंबित हैं। ऐसे में स्थानीय आदिवासी अपनी जमीन का एक इंच भी किसी को नहीं देंगे।

तहसील आदिवासी नेता एवं वडगाम के सरपंच जीवणभाई वसावा ने आरोप लगाया कि सांगबारा क्षेत्र के लोग कथित तौर पर गलत दस्तावेज तैयार कर सरकार को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सांगबारा के करीब 12 गांवों के लोग उमरपाड़ा की जमीन पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जंगल उमरपाड़ा के आदिवासियों की विरासत है और इसकी रक्षा के लिए पूरा आदिवासी समाज एकजुट है।

कार्रवाई नहीं हुई तो उग्र आंदोलन की चेतावनी

स्थानीय आदिवासियों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आने वाले दिनों में जंगल की जमीन पर कथित अवैध खेती और अन्य गतिविधियों पर रोक नहीं लगाई गई, तो आदिवासी समाज बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरकर उग्र धरना-प्रदर्शन करेगा। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जंगल की जमीन पर किसी भी तरह के अवैध कब्जे को तत्काल रोकने की मांग की है।

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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे