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‘प्रेरित शिक्षक, सशक्त राष्ट्र’ विषयक हुई क्षेत्रीय अध्यापक कार्यशाला

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‘प्रेरित शिक्षक, सशक्त राष्ट्र’ विषयक हुई क्षेत्रीय अध्यापक कार्यशाला


सूरत, 22 अगस्त (हि.स.)। विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान, गुजरात प्रांत और श्रीमहावीर विद्या मंदिर ट्रस्ट, सूरत के संयुक्त तत्वावधान में ‘प्रेरित शिक्षक, सशक्त राष्ट्र’ विषयक द्वि-दिवसीय क्षेत्रीय अध्यापक कार्यशाला का आयोजन शनिवार से हुआ। कार्यशाला में गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र से शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अध्यापकों एवं शिक्षाविदों ने सहभागिता की।

कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों में राष्ट्रीय दृष्टिकोण विकसित करने के साथ शिक्षा व्यवस्था को भारतीय ज्ञान परंपरा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से जोड़ना रहा।

उद्घाटन सत्र में वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय के कुलपति एवं कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. किशोरसिंह चावड़ा, पी. पी. सवाणी विश्वविद्यालय के प्रोवोस्ट डॉ. पराग सांघाणी, सार्वजनिक विश्वविद्यालय के प्रोवोस्ट प्रो. डॉ. किरण पंड्या तथा विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के संगठन मंत्री श्री के. एन. रघुनंदनजी उपस्थित रहे।

डॉ. राजेश व्यास ने कहा कि विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के मार्गदर्शन में विद्यालयी शिक्षा को व्यापक और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से वीबीयएसएसू की शुरुआत की गई है। इसका लक्ष्य युवा पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम, भारतीय संस्कृति, संस्कार और नैतिक मूल्यों का विकास करना है।

मुख्य अतिथि डॉ. पराग सांघाणी ने कहा कि शिक्षा केवल धन अर्जित करने का माध्यम नहीं है, बल्कि शिक्षक बनना एक महत्वपूर्ण दायित्व है। राष्ट्र निर्माण में संस्कारवान एवं प्रेरणादायी शिक्षकों की भूमिका अहम है। उन्होंने भारतीय संस्कृति और परंपराओं के मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. किशोरसिंह चावड़ा ने कहा कि शिक्षक की भूमिका अब केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए शिक्षकों का निरंतर प्रशिक्षण, अनुसंधान, नवाचार और डिजिटल तकनीक का उपयोग आवश्यक है।

कार्यशाला में राष्ट्रीय शिक्षा नीति, संस्थागत विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित अनुसंधान, बाल साहित्य, पर्यावरणीय ज्ञान और राष्ट्र निर्माण में शिक्षक की भूमिका सहित विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन दिया। चिल्ड्रन यूनिवर्सिटी के कुलपति टी.एस. जोशी सहित अनेक शिक्षाविदों ने विचार रखे।

कार्यशाला के आयोजन में डॉ. राजेश व्यास, डॉ. भावेश रावल, सुधाकरजी मास्टर और नीरज पटेल का महत्वपूर्ण योगदान रहा। संयोजक डॉ. रिद्धि देसाई ने आयोजन का समन्वय किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे