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कृषि राज्य मंत्री की शिक्षकों की कार्यशैली पर की गई टिप्पणी वायरल, शैक्षिक महासंघ ने जताया विरोध

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कृषि राज्य मंत्री की शिक्षकों की कार्यशैली पर की गई टिप्पणी वायरल, शैक्षिक महासंघ ने जताया विरोध


गोधरा, 14 जून (हि.स.)। गुजरात सरकार के कृषि राज्य मंत्री रमेशभाई कटारा के गोधरा में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों की कार्यशैली और उनकी विरोध प्रदर्शन की प्रवृत्ति को लेकर की गई तीखी टिप्पणी वायरल हो गयी है। इसको लेकर अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। महासंघ ने मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र में मंत्री के बयान को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, असंवेदनशील और तथ्यहीन बताया है।

गोधरा स्थित स्वामीनारायण मंदिर में शनिवार को आयोजित ‘विकसित भारत संकल्प सम्मेलन’ में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कृषि राज्यमंत्री कटारा ने सरकारी शिक्षकों पर कई गंभीर आरोप लगाए थे, जिससे पूरे राज्य के शैक्षणिक जगत में चर्चा और विवाद छिड़ गया है। उन्होंने कहा कि सरकारी शिक्षकों को 8वें और 10वें वेतन आयोग सहित विभिन्न आर्थिक लाभ और भत्ते मिल चुके हैं, इसके बावजूद उनकी “आर्थिक भूख” समाप्त नहीं होती। उन्होंने आरोप लगाया कि उच्च वेतन और सरकारी सुविधाएं मिलने के बाद भी शिक्षक बार-बार सरकार के खिलाफ आंदोलन और विरोध प्रदर्शन करते रहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इतना बड़ा वेतन लेने के बावजूद कई शिक्षक पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी से कार्य करने के लिए तैयार नहीं हैं।

कृषि राज्य मंत्री ने शिक्षा की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि आज कई शिक्षक कक्षा में बच्चों को पढ़ाने के बजाय अपना अधिकांश समय मोबाइल फोन के उपयोग में बिताते हैं। उनके अनुसार शिक्षकों का ध्यान शिक्षण कार्य से अधिक मोबाइल पर केंद्रित रहता है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

सरकार के एक जिम्मेदार मंत्री द्वारा सार्वजनिक मंच से शिक्षकों की पेशेवर नैतिकता और कार्यप्रणाली पर इस प्रकार की टिप्पणी किए जाने के बाद यह मामला सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है, बल्कि अखिल भारतीय राष्ट्रीय शिक्षक महासंघ ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

मंत्री के ये बयान वायरल होने के बाद अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने इसका कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए मुख्यमंत्री को संबोधित एक पत्र लिखा है। इसमें शिक्षक महासंघ ने मंत्री के बयान को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, असंवेदनशील और तथ्यहीन बताया है।

पत्र में कहा गया है कि मंत्री को इस विषय की पूरी जानकारी नहीं है। वर्तमान में देश में 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट भी प्रस्तुत नहीं हुई है, जबकि मंत्री 10वें वेतन आयोग की बात कर रहे हैं, जिसके वर्ष 2046 के आसपास लागू होने की संभावना है।

इस बारे में महासंघ ने स्पष्ट किया कि शिक्षक सरकार से कोई विशेष कृपा नहीं मांग रहे हैं, बल्कि लगातार बढ़ती महंगाई के बीच अपने वैधानिक और न्यायोचित अधिकारों की मांग कर रहे हैं।

महासंघ का कहना है कि राष्ट्र निर्माण की नींव माने जाने वाले शिक्षकों के लिए इस प्रकार की भाषा का प्रयोग सार्वजनिक जीवन की मर्यादा के विपरीत है।

महासंघ ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि मंत्री रमेश कटारा सार्वजनिक रूप से शिक्षक समाज और कर्मचारी वर्ग से माफी मांगें। साथ ही उनके बयान की समीक्षा कर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए तथा भविष्य में भाषा की मर्यादा बनाए रखने के लिए उन्हें कड़ी चेतावनी दी जाए।

महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार इस मामले में तत्काल कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाती है, तो शिक्षक और कर्मचारी वर्ग उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी मंत्री और सरकार की होगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे