‘प्रेरित शिक्षक, सशक्त राष्ट्र’ कार्यशाला में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और राष्ट्रनिर्माण पर हुआ मंथन
सूरत, 23 अगस्त (हि.स.)। विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान, गुजरात प्रांत और श्री महावीर विद्यामंदिर ट्रस्ट, सूरत के संयुक्त तत्वावधान में ‘प्रेरित शिक्षक, सशक्त राष्ट्र’ विषय पर कार्यशाला में शिक्षकों में राष्ट्रीय दृष्टिकोण विकसित करना था। इसके साथ शिक्षा व्यवस्था को भारतीय ज्ञान परंपरा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और आधुनिक शैक्षणिक प्रणाली से जोड़ना था।
रविवार को इस दो दिवसीय कार्यशाला का समापन हुआ। इसमें गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र से शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अध्यापकों एवं शिक्षाविदों ने सहभागिता की। कार्यशाला का उद्देश्य में शिक्षकों में राष्ट्रीय दृष्टिकोण विकसित करने के साथ शिक्षा व्यवस्था को भारतीय ज्ञान परंपरा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और आधुनिक शैक्षणिक प्रणाली से जोड़ना था। इन दो दिनों में शिक्षा के बदलते स्वरूप, शिक्षक की भूमिका, अनुसंधान, नवाचार, मूल्याधारित शिक्षा और राष्ट्रनिर्माण जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार रखे।
डॉ. राजेश व्यास ने विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए युवाओं में राष्ट्रप्रेम, भारतीय संस्कृति, संस्कार, चरित्र और नैतिक मूल्यों के विकास की आवश्यकता बताई। डॉ. पराग सांघाणी ने शिक्षक को राष्ट्रनिर्माण का महत्वपूर्ण आधारस्तंभ बताते हुए नई पीढ़ी तक भारतीय संस्कृति और परंपराओं को पहुंचाने में उनकी भूमिका को रेखांकित किया।
कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. किशोरसिंह चावड़ा ने शिक्षक की बदलती भूमिका, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, सतत व्यावसायिक विकास, अनुसंधान, नवीन शिक्षण पद्धतियों और डिजिटल साधनों के प्रभावी उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ऐसे तकनीक-सक्षम और संवेदनशील शिक्षकों की आवश्यकता है, जो विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ रचनात्मकता, कौशल, मूल्यबोध और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित कर सकें।
कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में चिल्ड्रन यूनिवर्सिटी के कुलपति टी. एस. जोशी सहित रमेशभाई गढ़वी, डॉ. जय ओझा, डॉ. राजेश व्यास, डॉ. जिग्नेश पटेल, डॉ. कल्पेशभाई पाठक, डॉ. अमृत भरवाड़, डॉ. जयेशभाई देशकर, डॉ. आशीष दवे, डॉ. भरतभाई ठाकोर, डॉ. भावेशभाई रावल, डॉ. देवांगभाई मेहता और डॉ. संजय शर्मा सहित विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन दिया।
इसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, महाविद्यालय प्रशासन एवं संस्थागत विकास योजना, समकालीन अनुसंधान प्रवाह, शिक्षा में बाल साहित्य का उपयोग, भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से शिक्षा की पुनर्कल्पना, शिक्षक-शिक्षा, पर्यावरणीय ज्ञान, आईटीईपी में बहुविषयक दृष्टिकोण, लज्जाराम तोमरजी का शैक्षिक चिंतन तथा सशक्त राष्ट्र निर्माण में शिक्षक की भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
उद्घाटन सत्र में वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. किशोरसिंह चावड़ा, पी. पी. सवाणी विश्वविद्यालय के प्रोवोस्ट डॉ. पराग सांघाणी, सार्वजनिक विश्वविद्यालय के प्रोवोस्ट प्रो. डॉ. किरण पंड्या तथा विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के संगठन मंत्री के. एन. रघुनंदनजी उपस्थित रहे। श्री महावीर विद्यामंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सुधाकरजी मास्टर ने अतिथियों का स्वागत किया।
समापन सत्र में विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के संगठन मंत्री के. एन. रघुनंदनजी, गुजरात प्रांत के अध्यक्ष डॉ. राजेश व्यास, मंत्री डॉ. भावेशभाई रावल, श्री महावीर विद्यामंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सुधाकरजी मास्टर, मंत्री नीरजभाई पटेल, ट्रस्टी जितेंद्रभाई देसाई तथा कार्यशाला संयोजक डॉ. रिद्धि देसाई उपस्थित रहे। डॉ. राजेश व्यास ने कार्यशाला का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर प्रतिभागी अध्यापकों ने अपने अनुभव साझा किए और कार्यशाला से प्राप्त ज्ञान को शिक्षण कार्य में लागू करने का संकल्प लिया। प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र भी वितरित किए गए। राष्ट्रगान के साथ कार्यशाला का औपचारिक समापन हुआ।
कार्यशाला का आयोजन डॉ. राजेश व्यास, डॉ. भावेशभाई रावल, सुधाकर मास्टर और नीरज पटेल के मार्गदर्शन में हुआ। संयोजक डॉ. रिद्धि देसाई ने आयोजन का समन्वय किया। आयोजकों के अनुसार, कार्यशाला ने शिक्षकों के बीच संवाद, चिंतन और नवाचार के साथ गुणवत्तापूर्ण एवं मूल्याधारित शिक्षा तथा राष्ट्रनिर्माण की भावना को मजबूत करने का मंच प्रदान किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे

