अर्जुन मोढवाडिया बोले-गिर और आसपास के क्षेत्रों में शेरों की सुरक्षा पूरी तरह नियंत्रण में है, वन विभाग कर रहा कार्रवाई
गांधीनगर, 29 मई (हि.स.)। गुजरात के गिर अभयारण्य के बाहर राजस्व क्षेत्रों, विशेष रूप से गिरगढडा तालुका और अमरेली जिले के बाबरिया क्षेत्र में शेर और शावकों (शेरों के बच्चे) की संदिग्ध मौतों के बाद गुजरात वन विभाग ने त्वरित और प्रभावी कार्रवाई शुरू कर दी है। हालांकि इन मौतों के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने गांधीनगर में शुक्रवार को मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि वन विभाग और अनुभवी पशु चिकित्सकों की टीमों द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक अभियान चलाया जा रहा है तथा वर्तमान स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। उन्होंने बताया कि पिछले दो दिनों में शेरों और शावकों की मौत की कोई नई घटना सामने नहीं आई है। प्रारंभिक आशंका है कि शावकों की मौत 'बेबेसियोसिस' नामक बीमारी के कारण हुई हो सकती है, जो टिक (इतरड़ी) नामक परजीवी के माध्यम से फैलती है। हालांकि इन मौतों के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
उन्होंने कहा कि मृत शावकों के नमूने तत्काल जांच के लिए गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर (जीबीआरसी) भेजे गए हैं। जांच रिपोर्ट अगले तीन से चार दिनों में आने की संभावना है। इसके अलावा जूनागढ़ वेटेरिनरी कॉलेज के विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम भी जांच और उपचार कार्य में सहयोग कर रही है।
वन मंत्री ने बताया कि प्रभावित क्षेत्र के 10 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले शेरों को निगरानी में रखते हुए आवश्यकतानुसार आइसोलेट किया गया है। बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए गिर और आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर ‘डी-टिकिंग’ (टिक नाशक) अभियान युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। वन विभाग की टीमें लगातार क्षेत्र में निगरानी और उपचार कार्य कर रही हैं। उनके अनुसार पिछले एक सप्ताह के दौरान आठ शावकों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई है। हालांकि, मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मौतों का वास्तविक कारण क्या था। उन्होंने कहा कि सरकार इस पूरे मामले को अत्यंत गंभीरता से ले रही है और किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जा रही है।
उन्होंने बताया कि पूरे घटनाक्रम की निगरानी स्वयं गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उनका कार्यालय कर रहा है। इसके साथ ही प्राइम मिनिस्टर्स ऑफिस भी मामले पर लगातार नजर बनाए हुई है और राज्य सरकार को आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने कहा कि जहां आवश्यकता महसूस हो रही है, वहां निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत प्रिवेंटिव वैक्सीनेशन सहित सभी एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। वन विभाग का प्राथमिक उद्देश्य बीमारी को फैलने से रोकना और एशियाई शेरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
वन मंत्री ने राज्य के नागरिकों, वन्यजीव प्रेमियों और प्रकृति संरक्षण से जुड़े लोगों को आश्वस्त करते हुए कहा कि एशियाई शेर गुजरात की अमूल्य धरोहर हैं और उनके संरक्षण के लिए राज्य सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है तथा वन विभाग हालात पर पूरी तरह नजर बनाए हुए है। उन्होंने विश्वास जताया कि वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट आने के बाद बीमारी के कारणों का स्पष्ट पता चल जाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए और अधिक प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे

