मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 8,169 नवनियुक्त विद्यासहायकों को सौंपे नियुक्ति अनुशंसा पत्र
गांधीनगर, 02 नवंबर (हि.स.)। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने राज्य के प्राथमिक शिक्षा विभाग में नवनियुक्त विद्यासहायकों को अमृतकाल के ऐसे प्रहरी बताया, जिनके कंधों पर विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राज्य सेवा से जुड़ रहे शिक्षक विद्यार्थियों का मजबूत शैक्षणिक और नैतिक निर्माण करें, ताकि वे विकसित भारत के निर्माण में अपना पूरा योगदान दे सकें।
अडालज स्थित त्रिमंदिर में प्राथमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत चयनित नवनियुक्त विद्यासहायकों के अभिनंदन और अनुशंसा पत्र वितरण समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 8,169 नवनियुक्त विद्यासहायकों को अनुशंसा पत्र प्रदान किए। कार्यक्रम में कैबिनेट शिक्षा मंत्री डॉ. प्रद्युम्न वाजा और शिक्षा राज्य मंत्री रिवाबा जाडेजा भी उपस्थित रहीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 8,000 से अधिक विद्यासहायकों की भर्ती में 6,000 से अधिक महिला उम्मीदवारों का चयन होना शिक्षा क्षेत्र में नारी शक्ति की बढ़ती भागीदारी का प्रमाण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गुजरात में शुरू किए गए कन्या केलवणी महोत्सव और शाला प्रवेशोत्सव का अभियान आज वटवृक्ष बन चुका है और उसके सकारात्मक परिणाम दिखाई दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ पूरी की गई है। उम्मीदवारों को अपनी मेहनत और योग्यता के आधार पर नौकरी मिली है। इस उपलब्धि पर अभिभावकों और परिवारजनों में खुशी और गर्व का माहौल है। मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि शिक्षा विभाग आगामी समय में लगभग 10,000 और शिक्षकों की भर्ती की योजना बना रहा है।
शिक्षक का पद समाज में सबसे सम्मानित
शिक्षक के महत्व पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में शिक्षक का स्थान अत्यंत सम्माननीय है। कोई व्यक्ति कितना भी बड़ा डॉक्टर, इंजीनियर या वैज्ञानिक क्यों न बन जाए, वह अपने शिक्षक के सामने हमेशा नतमस्तक होता है। उन्होंने संत ज्ञानेश्वर का उदाहरण देते हुए नवनियुक्त शिक्षकों को डिजिटल माध्यमों और सोशल मीडिया का विवेकपूर्ण उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि शिक्षक का व्यवहार और आचरण बच्चों के मन पर गहरा प्रभाव डालता है।
बच्चों को रटने के बजाय समझ आधारित शिक्षा दें
कैबिनेट शिक्षा मंत्री डॉ. प्रद्युम्न वाजा ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार ने प्राथमिक शिक्षा की नींव मजबूत करने के उद्देश्य से लगभग 12,000 विद्यासहायकों की ऐतिहासिक भर्ती पूरी की है। इसमें कक्षा 1 से 5 तक गुजराती माध्यम की लगभग 11,000 और अन्य माध्यमों की लगभग 987 रिक्तियां शामिल हैं। उन्होंने कहा कि पूरी चयन प्रक्रिया योग्यता और तकनीक आधारित पारदर्शी व्यवस्था के तहत संपन्न हुई है।
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि बच्चों में बुनियादी साक्षरता, संख्यात्मक ज्ञान, कौशल विकास और अनुभव आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना जरूरी है। बच्चों को रटने के बजाय समझ के आधार पर पढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों से कहानियों, गतिविधियों, प्रयोगों और तकनीक के माध्यम से कक्षाओं को अधिक रोचक और जीवंत बनाने का आह्वान किया।
शिक्षा राज्य मंत्री रिवाबा जाडेजा ने कहा कि शिक्षक केवल पढ़ाने वाले नहीं, बल्कि भविष्य के निर्माता होते हैं। राष्ट्र का भविष्य कक्षाओं में ही तैयार होता है। शिक्षा का उद्देश्य केवल अक्षर ज्ञान देना नहीं, बल्कि बच्चों में अच्छे संस्कार, मूल्य, कौशल और चरित्र का निर्माण करना भी है। उन्होंने नवनियुक्त शिक्षकों से बच्चों के भीतर ज्ञान और संस्कारों का विकास कर राज्य तथा देश का नाम रोशन करने की अपील की।
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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे

