नासीरनगर ‘भूतिया डिमोलिशन’ विवाद : सवालों से बचते दिखे नगर आयुक्त, मीडिया से धक्कामुक्की का आरोप
सूरत, 11 जून (हि.स.)। सूरत के नासीरनगर में हुए कथित ‘भूतिया डिमोलिशन’ को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। डिमोलिशन की कार्रवाई किसके आदेश पर और किस एजेंसी ने की, यह जानने के लिए मीडिया प्रतिनिधि सूरत महानगरपालिका के महानगर पालिका आयुक्त एम. नागराजन से जवाब मांगने पहुंचे थे। आरोप है कि मीडिया के सवालों का जवाब देने के बजाय नगर आयुक्त और इंजीनियर आशीष नायक एसएमसी के कॉन्फ्रेंस रूम में चले गए और दरवाजा बंद कर लिया।
मीडिया कर्मियों द्वारा महानगर पालिका आयुक्त से मिलने का प्रयास किए जाने पर मार्शलों को बुलाया गया। आरोप है कि मार्शलों ने पत्रकारों के साथ धक्कामुक्की की, एक पत्रकार का कॉलर पकड़कर अभद्र व्यवहार किया। स्थिति बिगड़ने पर लालगेट पुलिस को बुलाया गया। इस दौरान पुलिस द्वारा दो मीडिया कर्मियों पर लाठी चलाने का भी आरोप लगाया गया है।
घटना के बाद महानगर पालिका परिसर में तनावपूर्ण माहौल बन गया। मीडिया कर्मियों का आरोप है कि बेकाबू बिल्डरों को बचाने के लिए प्रशासन और पुलिस ने पत्रकारों पर दबाव बनाने का प्रयास किया। साथ ही ‘भूतिया डिमोलिशन’ के विवाद को दबाने और उसके दाग को मिटाने की कोशिश की जा रही है।
8 मिनट में 18 बार बोले – ‘यह जांच का विषय है’
भूतिया डिमोलिशन मामले के 13वें दिन एसएमसी मुख्यालय में हुए हंगामे के बाद नगर आयुक्त एम. नागराजन मीडिया के सामने आए। बातचीत के दौरान उन्होंने लगभग हर सवाल के जवाब में यही कहा कि मामला जांच के दायरे में है। बताया जा रहा है कि मात्र 8 मिनट की बातचीत में उन्होंने 18 बार “यह जांच का विषय है” शब्द दोहराया।
जांच समिति की रिपोर्ट के बाद होगी कार्रवाई
महानगर पालिका आयुक्त एम. नागराजन ने कहा कि नासीरनगर मामले में सूरत महानगर पालिका के अधिकारी मौके पर गए थे और इस संबंध में बयान भी जारी किया गया है। उन्होंने बताया कि पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए समिति गठित की गई है और समिति की रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
‘हम सरकारी कर्मचारी हैं, नियमों से बंधे हैं’
महानगर पालिका आयुक्त ने कहा कि वीडियो में कई मकानों में तोड़फोड़ दिखाई दे रही है, लेकिन यह किन परिस्थितियों में हुआ, इसकी जांच की जा रही है। उन्होंने मीडिया से अपील की कि जांच समिति की रिपोर्ट आने तक धैर्य रखा जाए। उन्होंने कहा, “हम सरकारी कर्मचारी हैं और नियमों से बंधे हुए हैं। हमें निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही आगे बढ़ना होता है।”
‘डिमोलिशन किसने किया, मुझे नहीं पता’
जब मीडिया ने पूछा कि घटना के 13 दिन बाद भी कार्रवाई करने वालों की पहचान क्यों नहीं बताई जा रही, तो महानगर पालिका आयुक्त ने कहा कि जानकारी मिलने पर खुलासा किया जाएगा। वहीं, जब उनसे सीधे पूछा गया कि डिमोलिशन किसने किया, तो उनका जवाब था, “मुझे नहीं पता, यह जांच का विषय है। इसी के लिए समिति बनाई गई है।”
पत्रकारों के लगभग हर सवाल पर नगर आयुक्त का एक ही जवाब था—“यह जांच का विषय है” और “समिति इसकी जांच कर रही है”।
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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे

