गांधी जयंती पर सूरत में अहिंसा मार्च, गौहत्या पर रोक और जीवदया की मांग उठी
सूरत, 02 अक्टूबर (हि.स.)। महात्मा गांधी जयंती के दिन सूरत में गौहत्या पर रोक और जीवदया की मांग को लेकर ‘अहिंसा मार्च’ निकाला गया। सरगम शॉपिंग सेंटर से शुरू हुआ यह मार्च शहर के उमरा क्षेत्र से होते हुए जिला कलेक्टर कार्यालय तक पहुंचा। इसमें जैन एवं हिंदू समाज के साधु-संतों के साथ बड़ी संख्या में जीवदया प्रेमी शामिल हुए। मार्च के बाद जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर गौहत्या रोकने और संबंधित मामलों में प्रभावी कार्रवाई की मांग की गई।
मार्च के दौरान प्रतिभागियों ने ‘दया नहीं तो धर्म क्या, अहिंसा नहीं तो मानवता क्या’ और ‘जियो और जीने दो’ जैसे संदेशों के माध्यम से जीवदया और अहिंसा का संदेश दिया। आयोजकों की ओर से राज्य में गौहत्या पर प्रभावी रोक लगाने तथा संबंधित मामलों में प्रशासन से कार्रवाई की मांग की गई।
गौहत्या रोकने के लिए ठोस कार्रवाई जरूरी: साजन भरवाड़
गुजरात गौरक्षा आयोग के चेयरमैन साजन भरवाड़ ने मार्च को संबोधित करते हुए कहा कि महात्मा गांधी का सपना था कि देश में गौहत्या पर रोक लगे। उन्होंने कहा कि लंबे समय से इस मुद्दे पर चर्चा होती रही है, लेकिन गौहत्या पूरी तरह बंद नहीं हुई है।
भरवाड़ ने कहा कि सरकार को गौहत्या से जुड़े मामलों में प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए और जीवदया से जुड़े लोगों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को अपनी बात लोकतांत्रिक तरीके से सरकार और प्रशासन तक पहुंचानी चाहिए।
मार्च के आयोजकों की ओर से यह भी कहा गया कि यदि प्रशासन गौहत्या से जुड़े मामलों में तत्काल कार्रवाई नहीं करता और न्यायालय के निर्देशों का पालन सुनिश्चित नहीं किया जाता, तो जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट (अदालत की अवमानना) की कार्रवाई की मांग की जाएगी।
साजन भरवाड़ ने अपने बयान में कहा कि गौहत्या रोकने के लिए केवल सरकारी स्तर पर प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज में भी जागरूकता जरूरी है। उन्होंने लोगों से जीवदया और अहिंसा के पक्ष में अपनी आवाज उठाने की अपील की। मार्च में शामिल साधु-संतों और जीवदया प्रेमियों ने प्रशासन से गौ संरक्षण के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने तथा गौहत्या से जुड़े मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग दोहराई।
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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे

