'टॉक्सिक' मूवी रिव्यू: यश का स्वैग, शानदार एक्शन और स्टाइलिश दुनिया ने जीता दिल
फिल्म: टॉक्सिक
निर्देशक: गीतू मोहनदास
कलाकार: यश, कियारा आडवाणी, नयनतारा, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया, रुक्मिणी वसंत
अवधि: 3 घंटे 14 मिनट
शैली: एक्शन, गैंगस्टर ड्रामा
रेटिंग: ⭐⭐⭐⭐ (4/5)
यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'टॉक्सिक' बड़े पर्दे पर एक ऐसी गैंगस्टर कहानी लेकर आती है, जो अपने स्टाइल, विजुअल ट्रीटमेंट और एक्शन के कारण शुरुआत से ही अलग नजर आती है। निर्देशक गीतू मोहनदास ने फिल्म को पारंपरिक गैंगस्टर ड्रामा की तरह पेश करने के बजाय अपनी एक अलग दुनिया रची है, जहां अपराध, सत्ता, परिवार, रिश्ते और बदले की भावना एक-दूसरे से जुड़ते हैं। फिल्म की सबसे बड़ी ताकत यश का दमदार स्क्रीन प्रेजेंस है, जो शुरुआत से लेकर अंत तक दर्शकों को बांधे रखता है।
कहानी
'टॉक्सिक' की कहानी अपराध की दुनिया से जुड़े एक ऐसे किरदार के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी जिंदगी सिर्फ गैंगस्टर की दुनिया तक सीमित नहीं है। फिल्म में राया और उसके बेटे टिकट के किरदारों के जरिए कहानी परिवार, रिश्तों, सत्ता और वफादारी की कई परतों को सामने लाती है। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, अपराध की दुनिया में चल रहे ताकत के खेल के साथ पारिवारिक रिश्ते भी अहम होते जाते हैं। फिल्म में एक्शन और गैंगस्टर ड्रामा के बीच भावनात्मक पक्ष को भी जगह दी गई है। यही पहलू इसे सिर्फ मारधाड़ और बदले की कहानी बनने से रोकता है। हालांकि कहानी को समझने और किरदारों की दुनिया में पूरी तरह उतरने में थोड़ा समय लगता है, लेकिन एक बार फिल्म अपनी रफ्तार पकड़ लेती है तो कई दिलचस्प मोड़ सामने आते हैं।
यश का दमदार अंदाज
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत निश्चित रूप से यश हैं। राया और टिकट के किरदारों में वह अलग-अलग रंग दिखाते हैं। उनका स्वैग, संवाद अदायगी, बॉडी लैंग्वेज और एक्शन सीक्वेंस उनके प्रशंसकों को खास तौर पर पसंद आएंगे। यश ने अपने किरदार को सिर्फ एक खतरनाक गैंगस्टर के रूप में नहीं निभाया है, बल्कि उसमें भावनात्मक गहराई भी दिखाई है। परिवार और रिश्तों से जुड़े दृश्यों में उनका दूसरा पक्ष सामने आता है। एक्शन दृश्यों में उनका आत्मविश्वास और स्क्रीन प्रेजेंस फिल्म को लगातार ऊर्जा देता है। कई दृश्यों में वह पूरी तरह छाए रहते हैं और यही फिल्म को एक बड़ा स्टारड्रिवन अनुभव बनाता है।
महिला किरदार भी महत्वपूर्ण
फिल्म में नयनतारा, कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं। अच्छी बात यह है कि ये किरदार सिर्फ नायक के आसपास घूमते हुए नजर नहीं आते, बल्कि कहानी के घटनाक्रम और ताकत के खेल में अपनी भूमिका निभाते हैं। नयनतारा फिल्म के पारिवारिक और भावनात्मक पक्ष को मजबूती देती हैं। वहीं कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत अपने-अपने हिस्से में कहानी को आगे बढ़ाने में योगदान देती हैं।
निर्देशन और तकनीकी पक्ष
गीतू मोहनदास ने फिल्म को एक अलग विजुअल पहचान देने की कोशिश की है और इसमें वह काफी हद तक सफल रहती हैं। गैंगस्टर की दुनिया को रंगों, सेट डिजाइन, कॉस्ट्यूम, लाइटिंग और कैमरा वर्क के जरिए एक खास अंदाज में पेश किया गया है। फिल्म के कई फ्रेम बड़े पर्दे पर शानदार नजर आते हैं। एक्शन फिल्म का मजबूत पक्ष है। बड़े स्तर पर फिल्माए गए एक्शन सीक्वेंस में यश की मौजूदगी इसे और प्रभावशाली बनाती है। बैकग्राउंड स्कोर भी एक्शन और ड्रामा वाले दृश्यों के असर को बढ़ाता है। सिनेमैटोग्राफी फिल्म की दुनिया को भव्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
लंबाई थोड़ी खलती है
फिल्म की सबसे बड़ी कमी इसकी 3 घंटे 14 मिनट की लंबाई है। कुछ हिस्सों में कहानी जरूरत से ज्यादा धीमी महसूस होती है और कई दृश्यों को थोड़ा छोटा किया जा सकता था। खासकर फिल्म के शुरुआती हिस्से में किरदारों और दुनिया को स्थापित करने में कुछ ज्यादा समय लिया गया है। हालांकि, फिल्म की भव्यता, एक्शन और यश की स्क्रीन प्रेजेंस इन कमियों को काफी हद तक संभाल लेती है। अगर एडिटिंग थोड़ी और चुस्त होती तो फिल्म का प्रभाव और बेहतर हो सकता था।
फाइनल वर्डिक्ट
'टॉक्सिक' एक स्टाइलिश, भव्य और मनोरंजक गैंगस्टर एक्शन ड्रामा है, जिसकी सबसे बड़ी ताकत यश का दमदार प्रदर्शन और फिल्म का शानदार विजुअल ट्रीटमेंट है। गीतू मोहनदास ने पारंपरिक गैंगस्टर कहानी से अलग दुनिया बनाने की कोशिश की है, जिसमें एक्शन के साथ परिवार, रिश्ते, भरोसा और वफादारी जैसे भावनात्मक पहलुओं को भी जगह दी गई है।
फिल्म लंबी जरूर है और कुछ हिस्सों में इसकी गति प्रभावित होती है, लेकिन बड़े पर्दे पर देखने लायक एक्शन, शानदार विजुअल्स और यश का जबरदस्त स्वैग इसे एक मजबूत सिनेमाई अनुभव बनाते हैं। यश के प्रशंसकों और बड़े स्तर की एक्शन फिल्मों को पसंद करने वाले दर्शकों के लिए 'टॉक्सिक' एक अच्छा थिएटर एक्सपीरियंस साबित होती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / लोकेश चंद्र दुबे

