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साइबर ठगों की ‘म्यूल अकाउंट’ फैक्ट्री का भंडाफोड़, दिल्ली से संचालित था करोड़ों का नेटवर्क, चार गिरफ्तार

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साइबर ठगों की ‘म्यूल अकाउंट’ फैक्ट्री का भंडाफोड़, दिल्ली से संचालित था करोड़ों का नेटवर्क, चार गिरफ्तार


नई दिल्ली, 22 जून (हि.स.)। दिल्ली पुलिस की मध्य जिला की साइबर थाना पुलिस ने देशभर में ऑनलाइन ठगी के लिए बैंक खाते और पीओएस मशीनें उपलब्ध कराने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने पहाड़गंज स्थित एक होटल में छापेमारी कर चार आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से सक्रिय पीओएस टर्मिनल, डेबिट कार्ड, चेक बुक, फर्जी कंपनियों के दस्तावेज और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान आनंद पर्वत निवासी संजय, पटेल नगर निवासी कुलदीप गोली, हरियाणा के सोनीपत जिले के गोहाना निवासी निर्दोष बिड़लान और राजस्थान के हनुमानगढ़ निवासी दीपक बिश्नोई के रूप में हुई है।

मध्य जिले के पुलिस उपायुक्त रोहित राजबीर सिंह ने सोमवार को बताया कि यह गिरोह साइबर अपराधियों को ‘म्यूल अकाउंट’ उपलब्ध कराता था। इन खातों के जरिए निवेश ठगी, फर्जी नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी और ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे साइबर अपराधों से हासिल रकम को अलग-अलग खातों में भेजकर वैध लेनदेन का रूप दिया जाता था।

पुलिस उपायुक्त के अनुसार मध्य जिला की साइबर थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि एक संगठित गिरोह दिल्ली में साइबर ठगी के लिए बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहा है। इसके बाद एसआई गौरव सिंह के नेतृत्व में एचसी भारत, कांस्टेबल धर्मेंद्र और कांस्टेबल जानकी की टीम का गठन किया गया। पुलिस टीम ने पहाड़गंज स्थितकृष्णा होटल में छापेमारी कर चार आरोपितों को गिरफ्तार किया। इस मामले में साइबर थाना ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 112 और 318(4) के तहत एफआईआर संख्या 28/26 दर्ज की गई है।

ऐसे काम करता था गिरोह

जांच में सामने आया कि गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था। इसके सदस्य कमीशन के बदले लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाते और शेल कंपनियां बनाते थे। आरोपित फर्जी किरायानामों और साझेदारी दस्तावेजों के आधार पर करंट अकाउंट खुलवाते थे। जांच में यह भी पता चला कि एसजी एंटरप्राइजेज, जीएम एंटरप्राइजेज और एचएम ट्रेडर्स जैसी फर्जी फर्मों के नाम पर बैंक खाते संचालित किए जा रहे थे। इन खातों में साइबर ठगी की रकम जमा कर पीओएस मशीनों और मर्चेंट यूपीआई क्यूआर कोड के जरिए उसे वैध कारोबारी लेनदेन का रूप दिया जाता था। पुलिस के अनुसार, खाते उपलब्ध कराने वाले व्यक्तियों को लगभग आठ प्रतिशत कमीशन मिलता था, जबकि एजेंटों को दो से चार प्रतिशत तक हिस्सा दिया जाता था।

कई राज्यों की शिकायतों से जुड़े मिले खाते

तकनीकी जांच में बरामद बैंक खातों का संबंध राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज कई शिकायतों से मिला है। पुलिस के अनुसार, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक, इंडसइंड बैंक, एक्सिस बैंक और एचडीएफसी बैंक के कुछ खाते कर्नाटक, महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों में दर्ज साइबर धोखाधड़ी के मामलों से जुड़े पाए गए हैं। एक्सिस बैंक के ‘लक्ष्मण एंटरप्राइजेज’ नामक खाते और एचडीएफसी बैंक के एक खाते के खिलाफ पांच-पांच शिकायतें दर्ज होने की जानकारी मिली है। पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से एक सक्रिय इंडसइंड बैंक पीओएस टर्मिनल, एक मर्चेंट यूपीआई क्यूआर स्कैनर, पांच करंट अकाउंट की चेक बुक और पासबुक, छह डेबिट कार्ड, तीन साझेदारी समझौते, पैन कार्ड, रबर स्टांप, किरायानामा और बैंकिंग रिकॉर्ड से जुड़े चार मोबाइल फोन बरामद किए हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी