अंतरराष्ट्रीय साइबर स्लेवरी गिरोह के पांच आरोपी गिरफ्तार
जयपुर, 03 अगस्त (हि.स.)। राजस्थान पुलिस की स्टेट साइबर क्राइम थाना पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी और मानव तस्करी से जुड़े एक बड़े साइबर स्लेवरी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह युवाओं को विदेश में 800 से 1000 अमेरिकी डॉलर प्रतिमाह वेतन का लालच देकर कंबोडिया, वियतनाम, म्यांमार और लाओस भेजता था। वहां पहुंचने के बाद उनके पासपोर्ट और पहचान पत्र जब्त कर उन्हें डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश, क्रिप्टोकरेंसी फ्रॉड और अन्य साइबर अपराध करने के लिए मजबूर किया जाता था।
महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर चलाए जा रहे साइबर अपराध विरोधी अभियान के तहत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) से प्राप्त सूचना एवं तकनीकी विश्लेषण के आधार पर यह कार्रवाई की गई।
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (साइबर क्राइम) विजय कुमार सिंह ने बताया कि आई4सी के डाटा विश्लेषण में राजस्थान के 500 से अधिक लोगों की पहचान हुई है, जिन्हें इन देशों के साइबर स्कैम सेंटरों में भेजा गया था। इनमें से कई अब तक भारत नहीं लौटे हैं। वापस लौटे पीड़ितों ने खुलासा किया कि वहां उनके साथ मारपीट, मानसिक प्रताड़ना और जबरन साइबर ठगी करवाई जाती थी।
जांच के दौरान पुलिस ने ब्यावर निवासी राजकरण उर्फ रॉनी (ROXX) और सागर सिंह को गिरफ्तार किया। इनके मोबाइल फोन, पासपोर्ट और डिजिटल साक्ष्यों की जांच में विदेशी हैंडलर्स, वीपीएन, बायनेन्स (Binance), फर्जी जीपीएस तथा अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क से जुड़े अहम सुराग मिले। पूछताछ के आधार पर ब्यावर निवासी जीतूराज उर्फ जेम्स, रवि कुमार उर्फ माही और अनिल कुमार उर्फ डेविल को कोलकाता से उस समय गिरफ्तार किया गया, जब वे टूरिस्ट वीजा पर म्यांमार रवाना होने की तैयारी में थे।
पुलिस जांच में सामने आया कि साइबर स्कैम सेंटरों में आरोपियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता था। इसके बाद वे सोशल मीडिया पर फर्जी महिला प्रोफाइल बनाकर भारतीय नागरिकों से दोस्ती करते थे। 5 से 7 दिनों तक बातचीत कर उनकी पारिवारिक, आर्थिक और बैंक संबंधी जानकारी जुटाई जाती थी। इसके बाद उन्हें क्रिप्टोकरेंसी और निवेश में भारी मुनाफे का झांसा देकर लाखों रुपए निवेश करवाए जाते थे। ठगी की राशि म्यूल खातों के माध्यम से निकालकर क्रिप्टोकरेंसी में परिवर्तित कर चीन और कंबोडिया में बैठे हैंडलर्स तक पहुंचाई जाती थी।
विदेश पहुंचने के बाद युवाओं के पासपोर्ट और अन्य पहचान दस्तावेज जब्त कर लिए जाते थे। उनसे प्रतिदिन सुबह 9 बजे से रात 11:30 बजे तक जबरन साइबर ठगी करवाई जाती थी। काम छोड़ने या भागने का प्रयास करने पर हजारों डॉलर का जुर्माना लगाने और मारपीट करने की धमकी दी जाती थी।
कंबोडिया के पोइपेट स्थित स्कैम कंपाउंड में एचआर की भूमिका निभाता था। चार महीने बाद भारत लौटकर ब्यावर के युवाओं को 800 डॉलर प्रतिमाह वेतन का लालच देकर कंबोडिया भेजता था और इसके बदले भारी कमीशन लेता था।
सागर सिंह फ़र्जी महिला फेसबुक प्रोफाइल बनाकर भारतीय नागरिकों को जाल में फंसाता था। पीड़ितों की निजी और वित्तीय जानकारी एकत्र कर टीम लीडर को सौंपता था, जो निवेश के नाम पर ठगी को अंजाम देता था।
जीतूराज उर्फ जेम्स: इसके नाम से बायनेन्स पर क्रिप्टोकरेंसी खाता संचालित था। यह यूएसडीटी के जरिए साइबर गिरोह के सदस्यों तक रकम पहुंचाता था। साथ ही फर्जी म्यूल खाते, भारतीय सिम कार्ड तथा करीब 10 भारतीय युवाओं के पासपोर्ट और दस्तावेज चीनी हैंडलर्स तक पहुंचाने में शामिल था।
रवि कुमार उर्फ माही: वर्ष 2023 से कंबोडिया के स्कैम सेंटरों में सक्रिय था। फर्जी फेसबुक प्रोफाइल के जरिए भारतीयों को ठगी के जाल में फंसाने का प्रशिक्षण देता था। बाद में म्यांमार स्थित नए साइबर स्कैम सेंटर में जाने की तैयारी कर रहा था।
अनिल कुमार उर्फ डेविल: जीतूराज का भाई है। वर्ष 2024 से कंबोडिया के स्कैम सेंटर में सक्रिय था। उसे चीनी कंस्ट्रक्शन कंपनी में 'कंस्ट्रक्शन सुपरवाइजर' के छद्म पद पर म्यांमार के यानचिया टाउनशिप स्थित स्कैम सेंटर भेजा जा रहा था। पुलिस ने उसे उड़ान भरने से पहले कोलकाता से गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से पासपोर्ट, विदेशी वीजा दस्तावेज, मोबाइल फोन, डिजिटल साक्ष्य तथा अन्य महत्वपूर्ण रिकॉर्ड जब्त किए हैं। पूरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की कड़ियां खंगाली जा रही हैं तथा अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
कार्रवाई एसपी साइबर क्राइम सुमित मेहरड़ा के सुपरविजन तथा डीएसपी एवं थानाधिकारी गजेंद्र शर्मा के नेतृत्व में गठित टीम ने की। टीम में इंस्पेक्टर नीरज कुमार, एएसआई राकेश कुमार सामोता, हेड कांस्टेबल अशोक कुमार, दौलतराम तथा कांस्टेबल सुभाष कुमार और चालक सूबे सिंह शामिल रहे।
राजस्थान पुलिस ने आमजन से विदेश में नौकरी के नाम पर मिलने वाले आकर्षक प्रस्तावों की पूरी तरह जांच-पड़ताल करने की अपील की है। किसी भी साइबर धोखाधड़ी या संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930, राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल अथवा निकटतम पुलिस थाने को देने का आग्रह किया गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

