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फर्जी फॉरेक्स ट्रेडिंग ऐप से देशभर में ठगी, छह साइबर जालसाज गिरफ्तार

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फर्जी फॉरेक्स ट्रेडिंग ऐप से देशभर में ठगी, छह साइबर जालसाज गिरफ्तार


नई दिल्ली, 22 मई (हि.स.)। ऑनलाइन निवेश और फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर लोगों को करोड़ों रुपये का चूना लगाने वाले एक बड़े साइबर ठगी गिरोह का पश्चिमी जिले की साइबर थाना पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मध्य प्रदेश के इंदौर में चल रहे एक अवैध कॉल सेंटर पर छापा मारकर छह आरोपितों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि आरोपित फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म “मेटा कोट्स” के जरिए देशभर के लोगों को निवेश का झांसा देकर ठगी कर रहे थे। मामले में अब तक करीब एक करोड़ रुपये की ठगी का खुलासा हुआ है। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान कार्तिक अग्रवाल, राजा अग्रवाल, हर्ष केशरे, निखिल भालसे, दीपक उमाथ और विपिन यादव के रूप में हुई है। पुलिस पूरे नेटवर्क की वित्तीय संरचना और अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। मामले में आगे की जांच जारी है।

पश्चिमी जिले के पुलिस उपायुक्त शरद भास्कर दराडे ने शुक्रवार काे बताया कि, इस मामले की जांच साइबर थाना पुलिस ने दर्ज ई-एफआईआर संख्या 131/2026 के तहत की। शिकायतकर्ता मनोज चौहान ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दी थी कि उसे “आस्था मैडम” नाम बताने वाली एक महिला ने फॉरेक्स ट्रेडिंग में निवेश करने का लालच दिया। शिकायतकर्ता को “मेटा कोट्स कंपनी” नामक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया। शुरुआत में फर्जी डैशबोर्ड के जरिए मुनाफा दिखाकर भरोसा जीता गया। बाद में जीएसटी, टीडीएस, पेनाल्टी और अकाउंट अनलॉक शुल्क के नाम पर लगातार रकम जमा करवाई गई। जांच में सामने आया कि शिकायतकर्ता से 10.51 लाख रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर कराए गए।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीपी ऑपरेशन विजय सिंह की की देखरेखा में इंस्पेक्टर विकास कुमार बुल्डाक की टीम ने जांच शुरू की।

पुलिस टीम ने मोबाइल ट्रैकिंग, आईएमईआई विश्लेषण, बैंक खातों की जांच और तकनीकी निगरानी शुरू की। सैकड़ों मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और डिजिटल ट्रेल की जांच के बाद पुलिस को मध्य प्रदेश के इंदौर में अहम सुराग मिला। पुलिस टीम ने इंदौर के आरएनटी मार्ग स्थित कॉरपोरेट हाउस बिल्डिंग में संचालित बीजेटी ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड नामक कार्यालय पर छापा मारा। मौके पर पूरी तरह सक्रिय अवैध कॉल सेंटर संचालित होता मिला। वहां 41 लोग मौजूद थे, जिनमें 35 टेली कॉलर शामिल थे।

जांच में आगे सामने आया कि कॉल सेंटर संचालक लोगों को गोल्ड, सिल्वर, निफ्टी, बैंक निफ्टी और यूएसडीटी जैसे निवेश उत्पादों के नाम पर निवेश करने के लिए फंसाते थे। फर्जी ट्रेडिंग डैशबोर्ड पर नकली मुनाफा दिखाकर पीड़ितों को अधिक रकम लगाने के लिए प्रेरित किया जाता था।

पुलिस के मुताबिक गिरोह का सरगना कार्तिक अग्रवाल पहले ब्रोकरेज और ट्रेडिंग कंपनियों से जुड़ा रहा था। बाद में उसने अवैध फॉरेक्स ट्रेडिंग नेटवर्क खड़ा कर लिया। आरोपित टेलीग्राम नेटवर्क के जरिए फर्जी ट्रेडिंग एप और लिंक खरीदते थे। इसके बाद फर्जी सिम कार्ड, म्यूल बैंक खातों और क्यूआर कोड को ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म से जोड़कर साइबर ठगी को अंजाम देते थे।

जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह टेलीग्राम चैनल और ऑनलाइन पोर्टल से ग्राहकों का डाटा खरीदता था। ठगी की रकम को 40 से ज्यादा म्यूल बैंक खातों के जरिए घुमाया जाता था। बाद में गोल्ड लोन भुगतान और टॉप-अप जैसी तकनीकों से पैसों का ट्रेल छिपाया जाता था। पुलिस ने छापेमारी के दौरान 47 मोबाइल फोन, 46 सिम कार्ड, 29 कंप्यूटर सिस्टम, 10 चेक बुक, दो स्वाइप मशीन, एक नोट गिनने की मशीन, चार डेबिट कार्ड, दो पासपोर्ट, नकदी, विदेशी मुद्रा, एक मैकबुक और अन्य डिजिटल उपकरण बरामद किए हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी