साइबर अपराधियों पर पुलिस का प्रहार: अप्रैल में 89 साइबर अपराधी कानून के शिकंजे में
नई दिल्ली, 20 मई (हि.स.)। देशभर में फैलते साइबर अपराध के खिलाफ पश्चिमी जिले की साइबर थाना पुलिस ने अप्रैल महीने में बड़ा अभियान चलाकर अंतरराज्यीय साइबर गिरोहों की कमर तोड़ने का दावा किया है। पूरे महीने चलाए गए विशेष अभियान के दौरान पुलिस ने 89 साइबर अपराधियों को कानून के दायरे में लाया। इनमें 35 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। जबकि 54 लोगों को बाउंड डाउन किया गया। कार्रवाई के दौरान 40 करोड़ से जुड़े एक बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क का भी पर्दाफाश किया गया।
पश्चिम जिले के पुलिस उपायुक्त दराडे शरद भास्कर के अनुसार अप्रैल में साइबर थाना पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड, निवेश ठगी, एपीके फाइल स्कैम, फर्जी डेटिंग क्लब सदस्यता धोखाधड़ी और म्यूल अकाउंट के जरिये साइबर ठगी करने वाले कई बड़े संगठित गिरोहों पर कार्रवाई की।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इंस्पेक्टर विकास कुमार की देखरेख में विशेष टीमें गठित कर दिल्ली के अलावा झारखंड, पंजाब, हरियाणा, उप्र, राजस्थान और गुजरात में लगातार छापेमारी की गई। तकनीकी निगरानी, वित्तीय ट्रांजेक्शन की पड़ताल और डिजिटल इंटेलिजेंस के जरिये साइबर अपराधियों तक पहुंच बनाई गई।
34 बड़े मामले सुलझे, ₹51.95 लाख पीड़ितों को लौटाए
पुलिस उपायुक्त के अनुसार साइबर थाना पुलिस ने अप्रैल महीने में 34 बड़े साइबर धोखाधड़ी मामलों का सफलतापूर्वक पर्दाफाश किया, जबकि 16 मामलों की जांच पूरी कर उनका निस्तारण किया गया। पुलिस के मुताबिक अप्रैल के दौरान कुल 3.36 करोड़ की साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें सामने आई थीं। समय रहते बैंकिंग समन्वय और तत्काल वित्तीय हस्तक्षेप के जरिए 1.11 करोड़ की रकम को सुरक्षित कर लिया गया। इसके अलावा अदालत के आदेश पर 51.95 लाख पीड़ितों के खातों में वापस कराए गए। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इससे साइबर अपराधियों तक बड़ी रकम पहुंचने से रोकी जा सकी। पुलिस ने इस बीच 14.18 लाख नकद, 359 सिम कार्ड, 218 एटीएम कार्ड, 88 मोबाइल फोन, 78 चेक बुक, पांच पासबुक, तीन क्रेडिट कार्ड, दो लैपटॉप और चार्जर, दो स्लिप पैड, एक पेन ड्राइव और एक कार बरामद की। पुलिस के अनुसार बरामद सामान से कई राज्यों में सक्रिय साइबर नेटवर्क से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं।
करमपुरा में छापा, चौथी मंजिल से कूदकर भागने लगे आरोपित
पुलिस उपायुक्त के अनुसार करमपुरा इलाके में चल रहे एक बड़े साइबर नेटवर्क का भी पर्दाफाश किया। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि एक किराये के परिसर से म्यूल अकाउंट और ओटीपी रूटिंग नेटवर्क संचालित किया जा रहा है। सूचना के बाद एसआई हरिओम, एसआई अमित, एसआई योगेश, एसआई प्रवीण, हेड कांस्टेबल पवन और हेड कांस्टेबल संजीत की टीम ने छापा मारा। पुलिस टीम के मौके पर पहुंचते ही आरोपित चौथी मंजिल से कूदकर भागने लगे। हालांकि पुलिस टीम ने तेजी दिखाते हुए सभी आरोपितों को दबोच लिया। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान बिट्टू चौधरी, लविश चुघ, ऋषि, अरुण सिंह, आशीष और दीपक भट्ट के रूप में हुई। जांच में सामने आया कि आरोपित ‘डीएल ऑफिस’ नाम से बनाए गए व्हाट्सएप ग्रुप के जरिये म्यूल बैंक खातों का संचालन कर रहे थे। बैंक खातों के ओटीपी साझा कर साइबर ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में स्थानांतरित किया जाता था। तकनीकी जांच में इस नेटवर्क से जुड़े 35 एनसीआरपी शिकायतों का पता चला। शुरुआती जांच में करीब 40 करोड़ की साइबर ठगी से इस नेटवर्क के तार जुड़े पाए गए। पुलिस ने यहां से 43 स्मार्टफोन, 313 सिम कार्ड, 184 एटीएम कार्ड, 51 चेक बुक, दो पासबुक और
दो लैपटॉप बरामद किए।
फर्जी डेटिंग क्लब के नाम पर ठगी, टेलीग्राम के जरिये जाल बिछाया
पश्चिम जिला साइबर पुलिस ने फर्जी डेटिंग क्लब और क्रिप्टो ठगी से जुड़े गिरोह का भी पर्दाफाश किया। पुलिस के अनुसार आरोपित सोशल मीडिया और टेलीग्राम प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर लोगों को दोस्ती और प्रीमियम सदस्यता के नाम पर जाल में फंसाते थे। मामले में सचिन रावत, अक्षय कुमार बलियान और कार्तिकेय चौधरी को गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया कि आरोपित ठगी की रकम को पहले म्यूल खातों में भेजते थे और बाद में उसे यूएसडीटी क्रिप्टोकरेंसी में बदल देते थे। पुलिस को आरोपितों के मोबाइल फोन से टेलीग्राम और व्हाट्सएप चैट समेत कई अहम डिजिटल साक्ष्य मिले हैं।
डिजिटल अरेस्ट कर वरिष्ठ नागरिक को डराया
साइबर थाना पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट ठगी के एक मामले का भी पर्दाफाश किया। साइबर अपराधियों ने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर एक वरिष्ठ नागरिक को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसाने की धमकी दी थी। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने पंजाब के लुधियाना और झारखंड के जमशेदपुर में छापेमारी कर अशोक कुमार, सूरज कुमार, दीपू कुमार और विवेक कुमार को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि आरोपित बैंक खातों और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए ठगी की रकम को इधर-उधर स्थानांतरित कर रहे थे। कार्रवाई के दौरान सात चेक बुक, 11 डेबिट कार्ड, तीन क्रेडिट कार्ड, 18 सिम कार्ड और पांच मोबाइल फोन भी बरामद किए गए।
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हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी

