सात साल से फरार एमडी सप्लाई चेन का इनामी ‘सीईओ’ गिरफ्तार
जोधपुर, 18 मार्च (हि.स.)। राजस्थान एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) ने एमडी ड्रग्स के अवैध कारोबार पर बड़ा प्रहार करते हुए सप्लाई चेन के कथित सीईओ और 40 हजार रुपए के इनामी अंतरराज्यीय तस्कर राजूराम उर्फ राजेश को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पिछले 7 वर्षों से फरार था और गुजरात सहित कई राज्यों में वांछित चल रहा था।
एएनटीएफ के आईजी विकास कुमार ने बताया कि जांच में सामने आया कि आरोपी ने एमडी ड्रग्स के धंधे को पूरी तरह कॉर्पोरेट मॉडल पर संगठित कर रखा था। कोलकाता से पहले गिरफ्तार तस्कर रमेश इस नेटवर्क का प्रोडक्शन हेड था। राजू खुद ‘मार्केटिंग सीईआ’ बनकर सप्लाई चेन और थोक विक्रेताओं से डील करता था। अन्य साथियों को फैक्ट्री मैनेजर और अकाउंटिंग हेड जैसी जिम्मेदारियां दी गई थीं। राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश तक एजेंटों का मजबूत नेटवर्क तैयार किया गया था, जहां फैक्ट्री से निकलते ही माल सीधे थोक विक्रेताओं तक पहुंचा दिया जाता था। उन्होंने बताया कि राजू ने करीब 12 साल पहले अवैध शराब तस्करी से शुरुआत की थी, जहां उसे 15 हजार रुपए प्रति ट्रिप मिलते थे। कोरोना काल में अफीम और डोडा चूरा तस्करी में उतरा, जहां 1.5 लाख प्रति ट्रिप कमाने लगा। बाद में एमडी नेटवर्क से जुडक़र प्रति ट्रिप 15 लाख रुपए तक कमाई करने लगा। धीरे-धीरे वह खुद पार्टनर बनकर पूरे नेटवर्क का बड़ा चेहरा बन गया।
जोधपुर सहित कई जिलों में फैक्ट्रियां संचालित :
पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी ने जोधपुर, बाड़मेर, जालोर और सांचौर क्षेत्रों में करीब एक दर्जन एमडी फैक्ट्रियां लगाईं। दो से तीन क्विंटल एमडी बनाकर सप्लाई की। प्रति किलो करीब 15 लाख रुपए मुनाफा कमाया। एएनटीएफ के अनुसार आरोपी अब तक करीब 100 करोड़ रुपए का नशा बाजार में खपा चुका है। कई थोक सप्लायर्स के नाम भी सामने आए हैं। आईजी ने बताया कि आरोपी बेहद शातिर था और तीन बार पहले भी पुलिस को चकमा देकर फरार हो चुका था। गांव में मुखबिरों का नेटवर्क बना रखा था। पुलिस की सूचना मिलते ही खेतों के रास्ते भाग जाता था। जादू-टोना और तंत्र-मंत्र में विश्वास रखता था। वह हर अमावस्या पर उत्तराखंड के कैंची धाम और हरिद्वार जाता था। दो महीने पहले हरिद्वार के पास एएनटीएफ से मुठभेड़ में उसकी गाड़ी क्षतिग्रस्त हुई, लेकिन वह भाग निकला।
एएनटीएफ ने रणनीति बदलकर पकड़ा
उन्होंने बताया कि इस बार एएनटीएफ ने रणनीति बदलकर निगरानी पर फोकस किया। आरोपी ने स्कॉर्पियो में अपने गुर्गों को गांव भेजा। खुद मोटरसाइकिल से एक झोंपड़ी में छिपा बैठा था। टीम ने एक महिला की संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी। उसी के जरिए लोकेशन ट्रैक कर आरोपी को दबोच लिया गया। उन्होंने बताया- आरोपी का पिता बॉर्डर होमगार्ड में है, जिसकी आड़ लेकर वह बचता रहा। रिश्तेदारों को नेटवर्क में जोड़ा।
बहनोई मांगीलाल को फैक्ट्री ऑपरेशन में शामिल किया।जांच में यह भी सामने आया कि उसने जिन-जिन पार्टनर्स के साथ काम किया, वे या तो जेल पहुंचे या कंगाल हो गए। अवैध शराब तस्कर पप्पू जानी, सांवरिया और दो अलग-अलग रमेश के साथ काम किया। खुद हर बार बच निकलता रहा और नेटवर्क मजबूत करता गया। आईजी विकास कुमार ने बताया कि राजू की दोहरी छवि के चलते ऑपरेशन का नाम रखा गया। आरोपी की महिलाओं के बीच ‘जेंटलमैन’ इमेज, अपराधियों के बीच ‘मेंटल’ और जादू-टोने में विश्वास इसी के आधार पर ऑपरेशन को ‘जेंटल-मेंटल’ नाम दिया गया।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

