जेल बनी ऐशगाह! सलाखों के पीछे मोबाइल, नशा और डांस का खेल, नशे के साथ बंदी उड़ा रहे है मौज-मस्ती, मचा हड़कम्प
चित्तौड़गढ़, 24 जुलाई (हि.स.)। अपराधियों को जेल में उनके आचरण में सुधार और उनके किये गये अपराध के प्रायश्चित के लिए डाला जाता है, लेकिन यदि जेल ही बंदियों के लिए ऐशगाह बन जाये तो फिर क्या उम्मीद की जा सकती है। कई बार जेलों में अपराधियों द्वारा रैकेट चलाये जाने के मामले सामने आते है लेकिन चित्तौड़गढ़ जिला कारागृह में बंदियों के तीन वीडियो वायरल होने के बाद यह जेल भी हाई प्रोफाइल जेल साबित हो रही है। जिला जेल के अंदर से तीन वीडियो वायरल होने के बाद जेल प्रशासन में हड़कम्प मच गया है और अब जेल प्रबन्धन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए है। इस सम्बन्ध में कोतवाली थाने में जेल प्रशासन ने आठ बंदियों के खिलाफ रिपोर्ट दी है।
जेल में बंद बंदियों के वायरल वीडियो के मामले में चौंकाने वाले बात यह है कि बंदी खुल सेल्फी लेते हुए वीडियो बना रहा है और वीडियो में दिख रहे अधिकांश बंदी अजयराज सिंह हत्याकांड से जुड़े बताये जाते है, जिसमें हिस्ट्रीशीटर भी शामिल है। गुरुवार शाम चित्तौड़गढ़ जिला जेल के 3 वीडियो सामने आए है। जेल प्रशासन यूं तो सुरक्षा को लेकर लाख दावे करता है और कहा जाता है कि नशा या निषेध सामग्री जेल में नहीं पहुंचती है, लेकिन इन वीडियो के वायरल होने के बाद जेल प्रशासन की कलई खुलकर सामने आ गई है और जेल सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए है। इस वीडियो के बाद जेल अधीक्षक को फोन लगाने के बावजूद उनका कोई प्रत्युत्तर नहीं मिला। लगता है कि स्वयं जेल अधीक्षक भी इस मामले में कटघरे में खड़े है। इंस्टाग्राम पर वीडियो वायरल होने के बाद जेल प्रशासन और आम लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
जेल से गुरुवार शाम तीन वीडियो वायरल हुए है। यह वीडियो कब के है इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन पहले वीडियो में एक दर्जन से अधिक बंदी एक साथ बैठ कर भोजन करते नजर आ रहे है। वहीं दूसरे वीडियो में कुछ बंदी नशा करते नजर आ रहे है लेकिन यह साफ नहीं हो पाया कि यह नशा कौनसा है। वहीं तीसरे वीडियो में सभी बंदी एक-साथ नाचते नजर आ रहे है।
चित्तौड़गढ़ जेल में एंड्रॉयड मोबाइल होना और उसके द्वारा ही वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर वायरल होना एक गंभीर मामला माना जा रहा है। ऐसा नहीं है कि पहली बार ही जेल में मोबाइल मिलने की पुष्टि हुई हो। कुछ माह पूर्व जिला कलक्टर की जांच में मोबाइल मिला था, जिसकी कोतवाली थाने में एफआईआर हुई थी। सूत्र बताते है कि इस मामले की जांच भी ठंडे बस्ते में चली गई है। बताया जाता है कि कथित तौर पर उच्चाधिकारियों के निर्देश पर जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। वहीं अब उन्हीं अपराधियों द्वारा जिला कारागृह में एंड्रॉयड फोन सहित नशे की वस्तुओं का इस्तेमाल करने का परिणाम सामने आया है। ईश्वर सिंह से पूर्व में मोबाइल पकड़ा गया था और इस प्रकार जेल में मोबाइल मिलना सुरक्षा में बड़ी चूक माना जा रहा है।
वीडियो वायरल होने के बाद जेल प्रबन्धन हरकत में आया और जेल के जेल प्रहरी वेदराम के माध्यम से कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। अपनी एफआईआर में उन्होंने बताया कि कारागृह के अंदर दो वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जेल अधीक्षक की मौजूदगी में तलाशी ली गई और वीडियो में नजर आ रहे विचाराधीन बंदी मोहित पुत्र दलवीर सिंह की निशानदेही पर ए-वार्ड के सेल के सामने एसटीडी कक्ष के स्टोर रूम से एक एंड्रॉयड और महिला वार्ड के सामने पेड़ाें की जड़ों में कीपेड फोन मिला है। इस मामले में वीडियो में नजर आ रहा मोहित निवासी रोहतक, हर्षवर्धन सिंह राजपूत निवासी सिंहाना, भैरू लाल गुर्जर निवासी दोलाजी का खेड़ा गंगरार, ईश्वर सिंह राजपूत निवासी डेट, सत्यनारायण गुर्जर निवासी तरेसथा गंगरार, प्रहलादराय गुर्जर निवासी मायरा, बिजयपुर, शोभालाल निवासी तरेसथा और विनोद गुर्जर निवासी कान्याखेड़ी के विरूद्ध एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला कारागृह में निषिद्ध सामग्री मंगवाने, उपयोग करने, 42 कारागार अधिनियम के तहत दर्ज किया गया है।
जिला कारागृह से वीडियो वायरल होने के बाद जेल प्रबन्धन ने दो मोबाइल बरामद कर एफआईआर दर्ज करा दी है और लगता है कि जेल प्रबन्धन लकीर पीटने का काम कर रहा है। बिना मिली भगत के जेल में मोबाइल आना असंभव है। वहीं वायरल वीडियो में अपराधी किसी महिला अधिकारी को भी भला-बुरा कहते नजर आ रहे है। इधर, यह भी जानकारी में आया कि यह वायरल वीडियो कुछ समय पुराना है और संभवतया जेल से पैराेल पर चल रहे ईश्वर सिंह ने वायरल किया है। गौरतलब है कि ईश्वर सिंह और भैरू गुर्जर दोनों गंगरार थाने में हिस्ट्रीशीटर है और वायरल वीडियो में दिखाये जा रहे ज्यादातर बंदी एक जून 2025 को हुए अजयराज हत्याकांड में शामिल है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अखिल

