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झारखंड हजारी बाग बैंक में दिनदहाड़े डकैती डालने वाले तीन डकैत गिरफ्तार

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झारखंड हजारी बाग बैंक में दिनदहाड़े डकैती डालने वाले तीन डकैत गिरफ्तार


—एसटीएफ की वाराणसी इकाई और झारखंड पुलिस को मिली कामयाबी,1 किलो सोना, 20 लाख नगदी भी बरामद

वाराणसी, 02 मई (हि.स.)। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की वाराणसी इकाई और झारखंड पुलिस को बड़ी कामयाबी शनिवार को हाथ लगी है। टीम ने 24 अप्रैल को झारखंड हजारी बाग में बैंक ऑफ महाराष्ट्र बरही शाखा में दिनदहाड़े डकैती डालकर चार किलो सोना,4,22,492 रूपये नगद लूटने वाले सरगना सहित तीन डकैतों को वाराणसी सारनाथ से गिरफ्तार कर लिया। टीम ने डकैतों के पास से 912.22 ग्राम सोना, 20 लाख रूपये नगद,06 मोबाइल फोन व एक स्कार्पियो वाहन भी बरामद कर लिया। यह जानकारी एसटीएफ ने शनिवार काे प्रेसनाेट के जरिए साझा की है।

पकड़े गए अभियुक्ताें में सरगना नवादा बिहार निवासी मोहम्मद अफजल, गिरोह का सदस्य उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले बनगाई गांव निवासी पंकज सिंह,मउ के सियरही बरजरा निवासी सौरभ यादव उर्फ सोनू है। पूछताछ में पता चला था कि बैंक ऑफ महाराष्ट्र के शाखा किलंजर ओडिसा में आठ किलो सोना की लूट हुई है। पूरी घटना का समाचार पढ़ने के बाद सरगना अफजल ने योजना बनाई कि इसी बैंक के किसी शाखा में डकैती डालनी है। बैंक लूटने के लिए गिरोह ने झारखंड और बिहार के विभिन्न जगहों पर स्कार्पियों वाहन से घूम-घूम कर बैंक शाखाओं की रेकी की। रमजान के समय पंकज,शोएब ,चुन्नु (सभी निवासी गाजीपुर जनपद ) मुगलसराय चंदौली से कोडरमा झारखंड पहुंचे। और वहां पर बैंक आफ महाराष्ट्र के बरही शाखा की रेकी की। रेकी के दौरान पता चला कि यह बैंक शाखा बाजार से दूर कम भीड़भाड़ वाले इलाके में है। इसे बाद सभी अपनी गाड़ी से यहां आ गए। गिरोह ने अनुमान लगाया कि बैंक के इस शाखा में भी आठ किलो सोना मिल सकता है। इसके बाद सभी मिलकर बैंक लूटने की योजना बनाने लगे। सरगना अफजल बैंक पहुंचा और वहां की स्थिति का आकलन किया। इसके बाद बाहर निकलकर बाइक और असलहे की व्यवस्था गिरोह ने की। पूछताछ में तीनों ने बताया कि पहले 17 अप्रैल के दिन वारदात करने की योजना बनी। लेकिन आने—जाने के लिए धन की व्यवस्था न होने पर 24 अप्रैल को वारदात करने की योजना तय हो गई। वारदात के दिन गया रेलवे स्टेशन से दो मोटरसाइकिल के साथ सौरभ, शोएब और संतोष बरही होते हुए आए। जबकि चुन्नु गया में ही रूक गया। पंकज और अफजल स्कार्पियों से असलहा लेकर तिलैया होते हुए आए। दोनों टोल पार कर ओवरब्रिज के पास रूक गए। यहीं,पंकज असलहा वहां बैग लेकर कार से उतर गया और एक बाइक पर टाइगर और सौरभ के साथ बैठ कर बरही चौक के लिए निकल गए। वहीं,दूसरी बाईक से संतोष भी आया। बैंक शाखा पहुंच कर साथी सोनू बैंक के पास पहुंचा और वहां की स्थिति का आकलन कर बताया कि बैंक में भीड़ नही है। अपरान्ह तीन बजे सौरभ और टाइगर बैंक में घुसे और खाता खुलवाने की बात बैंक कर्मियों से करने लगे। इसी दौरान अन्य साथी भी बैंक में घुस गए । साथियों ने असलहा निकाल कर बैंक कर्मियों को डराना शुरू किया। इसी दौरान पंकज ने एक बैंक कर्मी के सिर पर असलहे के मुठिया से वार कर घायल दिया। यह देख डरे कर्मचारियों को कैश काउंटर के पास खड़ा कर गिरोह ने काउंटर में रखे सभी रूपये और स्ट्रांग रूम में रखा आभूषण और रूपया समेट लिया। इसके बाद बैंक कर्मियों को धमकाते हुए हमलोग फरार हो गए। वारदात के बाद हम सभी गया बिहार आ गए। यहीं लूट के रूपये और आभूषण का बंटवारा कर अब लोग अलग—अलग हो गए। हम तीनों गया से वाराणसी स्कार्पियों से आ गए। वाराणसी से हमलोग दिल्ली जाने की तैयारी में थे, तभी पुलिस टीम ने हमें वाराणसी सारनाथ के सिंहपुर से दबोच लिया। डकैतों की गिरफ्तारी में शामिल एसटीएफ के वाराणसी इकाई के निरीक्षक अमित श्रीवास्तव,निरीक्षक अनिल सिंह और उनकी टीम ने झारखंड पुलिस टीम के अफसरों के साथ मिलकर उपलब्ध कराए गए सीसीटीवी फुटेज के सहारे इस घटना में शामिल डकैतों की पहचान कराई। अफसरों के अनुसार, विवेचना में सामने आया कि इस गिरोह का सरगना मोहम्मद अफजल वर्ष 2008 में धनबाद झारखंड में कोयला का काम करता था। कोयला व्यवसाय के रंजिश में अफजल ने कोलकाता के एक व्यापारी की गोली मार कर हत्या कर दी थी। इस मामले में अफजल गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। जेल में अफजल की मुलाकात पंकज सिंह उर्फ रौनक, उत्तम महतो, दशरथ महतो, बाबू राजा उर्फ सिद्धार्थ, सोहेल उर्फ फैजल, सुनील पंडित सहित अन्य शातिर बदमाशों से हुई। जेल से बाहर आने के बाद अफजल ने सभी को मिलाकर अपना गिरोह खड़ा कर लिया और मिलकर बैंक डकैती की घटना को अंजाम देने लगे। पूछताछ में गिरोह के सदस्यों ने कई बैंक डकैतियों में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। गिरोह ने वर्ष 2013 में पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर स्थित मुथुट फाइनेंस बैंक में डकैती की घटना को अंजाम देकर 36 किग्रा सोना लूटा था। इसके गिरोह के कुछ सदस्य पकड़े भी गए थे। इसके बाद गिरोह ने वर्ष 2019 में उत्तराखंड रूढ़की स्थित आईआईएफएल फाइनेंस कंपनी में लूट की थी। इसके बाद वर्ष 2021 में पश्चिम बंगाल कोलकाता में मण्णापुरम गोल्ड फाइनेंस कंपनी में 26 किग्रा सोना लूटा था। वारदात के बाद पुलिस की नाकाबंदी देख गिरोह वाहन और लूटा गया सोना छोड़ कर फरार हो गया। इसके बाद गिरोह ने गया बिहार में वर्ष 2021 में ही आर्शीवाद गोल्ड लोन कंपनी में डाका डाल कर दो किलो सोना लूटा था। एसटीएफ के अफसरों के अनुसार तीनों डकैतों को सारनाथ थाना में दाखिल कर झारखंड पुलिस अग्रिम विधिक कार्यवाही में जुट गई।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी