अमेरिकी नागरिकों से ठगी करने वाले अन्तरराष्ट्रीय गिरोह के सात अभियुक्त गिरफ्तार
लखनऊ, 17 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में क्राइम ब्रांच ने अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर ठगी करने वाले गिरोह के सात अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। ये लोग तकनीकी संसाधनों एवं इंटरनेट आधारित कॉलिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग कर विदेशी नागरिकों खासकर संयुक्त राज्य अमेरिका के नागरिकों को निशाना बनाकर साइबर धोखाधड़ी कर रहे थे।
अपर पुलिस उपायुक्त (अपराध) किरन यादव ने शुक्रवार काे बताया कि साइबर सेल, क्राइम ब्रांच की टीम ने सयुंक्त कार्रवाई करते हुए थाना सुशांत गोल्फ सिटी क्षेत्र स्थित ओमेक्स आर टू रेजिडेंशियल अपार्टमेंट में संचालित एक संगठित अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड कॉल सेंटर के खिलाफ कार्रवाई की है। इस कार्रवाई में ऐसे संगठित साइबर गिरोह का खुलासा हुआ है, जो तकनीकी संसाधनों एवं इंटरनेट आधारित कॉलिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग कर विदेशी नागरिकों, विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका के नागरिकों को निशाना बनाकर साइबर धोखाधड़ी कर रहा था। कार्रवाई के दौरान सात अभियुक्तों को गिरफ्तार करते हुए साइबर अपराध में प्रयुक्त बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण एवं महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए।
पकड़े गए अभियुक्तों में अहमदाबाद के गुजरात निवासी पुनीत कुमार वर्मा, कोकाता निवासी मोहम्मद सोहेल, मोहम्मद शाहनवाज आलम, मो. इमरान मो.रियाज, अहमदाबाद निवासी दीपेन चंद्र कान्त पटेल और कोकाता निवासी सज्जाद हुसैन उर्फ सरफराज शामिल है।
जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि कॉल सेंटर का संचालन सुव्यवस्थित तरीके से संचालित हो रहा था। प्रत्येक कर्मचारी को उसकी भूमिका के अनुरूप अलग-अलग टीम में नियुक्त किया गया था। सम्पूर्ण प्रक्रिया चरणबद्ध रूप से संचालित होती थी। डायलर टीम का कार्य संभावित पीड़ितों से प्रथम संपर्क स्थापित करना और उन्हें माइक्रोसॉफ्ट की तकनीकी सहायता अथवा वित्तीय समस्या का विश्वास दिलाना था।
यह टीम प्रारंभिक बातचीत कर पीड़ित का विश्वास अर्जित करती थी। फिर पीड़ितों के लैपटॉप या पीसी का एक्सेस टीम व्यूअर व अल्ट्रा व्यूअर से ले लेते थे फिर उनकी वित्तीय जानकारी प्राप्त कर वालमार्ट व अमेज़न का गिफ्ट कार्ड खरीदते थे। जिस पीड़ित से बड़ी धनराशी प्राप्त करनी होती थी, उनसे कैशमैन के माध्यम से अमेरिका में दिए गए पते पर पार्सल भिजवाकर अथवा प्रत्यक्ष रूप से नकदी,सोने का पिकअप कराते थे।
गिरोह में शामिल लोग विभिन्न राज्यों से कर्मचारियों की भर्ती की करते थे, जिनमें अधिकांश को बीपीओ क्षेत्र का पूर्व अनुभव था, ताकि अमेरिकी नागरिकों से धाराप्रवाह अंग्रेज़ी में संवाद स्थापित किया जा सके। भर्ती किए गए स्टॉफ के रहने की व्यवस्था (आवास) फर्जी कंपनी की ओर से किया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि यह फर्जी कंपनी, स्टाॅफ के साथ किसी प्रकार का औपचारिक नियुक्ति पत्र, अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) अथवा अन्य कोई दस्तावेज़ नहीं रखती थी।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / दीपक

