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लखनऊ में पकड़े गए नौ अपराधी, यूएसडीटी के जरिए चीनी साइबर ठगों को पहुंचाते ठगी की रकम

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लखनऊ में पकड़े गए नौ अपराधी, यूएसडीटी के जरिए चीनी साइबर ठगों को पहुंचाते ठगी की रकम


लखनऊ, 12 जुलाई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की क्राइम ब्रांच और मड़ियाव थाना पुलिस ने सयुंक्त कार्रवाई करते हुए रविवार को नौ साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से 50 एटीएम कार्ड, बैंकिंग दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, 53 हजार एक सौ रुपये नकद बरामद हुआ है। आरोपित साइबर ठगी की रकम को यूएसडीटी के जरिए चीनी साइबर ठगों को पहुंचाते थे। गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम को 10 हजार रुपये के पुरस्कार की घोषणा की गयी है।

डीसीपी नार्थ गोपाल कृष्ण चौधरी ने बताया कि सीवाई ब्रज के अन्तर्गत एनसीआरपी—जेएमआईएस पोर्टल से कुछ म्यूल अकाउंट के सत्यापान के दौरान कुछ अकाउंट संदिग्ध लगे। पुलिस ने जांच शुरू की और तकनीकी विश्लेषण, बैंकिंग डाटा, डिजिटल सर्विलांस की मदद से केशवनगर मोड़ के पास खड़े मोहम्मद शाहरूख को गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में उसने अपना बैंक खाता साइबर ठगी में उपयोग के लिए उपलब्ध कराना स्वीकार किया और अपने तथा अन्य साथियों के आईआईएम रोड स्थित होने की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस कार्रवाई कर उसके गिरोह में शामिल आठ और आरोपितों को आईआईएम रोड सर्विस लेन के पास से गिरफ्तार कर लिया। इस तरह से कुल 09 लोगों को पकड़ लिया गया।

पूछताछ में आरोपितों ने अपना नाम जानकीपुरम निवासी महफूज खान के अलावा एलएलबी छात्र सैय्यद अबदुल्ला मो.बसर, मो. रुबान, नीट की तैयारी कर रहा शाबिर, सिकंदर, फरहान और तुफैल हैं। इनमें कुछ लड़के अलग—अलग जिलों के रहने वाले हैं, लेकिन अपना ठिकाना इन्होंने लखनऊ में बनाया हुआ था।

इनके पास से उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों से ज्ञात हुआ कि आरोपितों ने विभिन्न जनपदों के भोले-भाले एवं आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्तियों को धन का लालच देकर उनके नाम से विभिन्न बैंकों में खाते खुलवाए जाते थे। इसके बाद उन खातों का विवरण उनके एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक, मोबाइल नंबर, इंटरनेट बैंकिंग आईडी, पासवर्ड एवं अन्य बैंकिंग विवरण अपने कब्जे में लेकर उन खातों को म्युचुअल अकाउंट के रूप में संचालित किया जाता था।

इन बैंक खातों में देशभर में होने वाली साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि जमा कराई जाती थी। इसके पश्चात आरोपित विभिन्न एटीएम के माध्यम से नकद निकासी करते थे अथवा धनराशि को आगे ट्रांसफर कराते थे। साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को म्युचुअल अकाउंट के जरिए उसे विभिन्न माध्यमों से क्रिप्टोकरेंसी (यूएसडीटी) में परिवर्तित किया जाता था। फिर चीनी साइबर अपराधियों के डिजिटल वॉलेट्स में ट्रांसफर करते थे। इन्हें इनका कमीशन मिलता था। टेलीग्राम और अन्य माध्यमों से साइबर ठग विदेशी साइबर अपराधियों के साथ हमेश संपर्क में रहते थे।

डीसीपी ने बताया कि पूछताछ में गिरफ्तार आरोपितों ने बताया कि वे आजम एवं अब्दुल नाम के व्यक्तियों के माध्यम से इस नेटवर्क से जुड़े थे। इनके कहने पर अलग-अलग जिलों में बैंक खाते खुलवाए जाते थे तथा संबंधित खाताधारकों से एटीएम कार्ड, चेकबुक एवं अन्य बैंकिंग दस्तावेज प्राप्त कर लिए जाते थे। साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि खातों में आने के बाद उसे निकालकर अथवा यूएसडीटी में परिवर्तित कर विदेशी साइबर अपराधियों तक पहुंचाया जाता था।

इन गिरफ्तार आरोपितों के मोबाइल फोन, टैबलेट, बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट, वित्तीय लेन-देन, क्रिप्टो ट्रांजैक्शन, टेलीग्राम चैट एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का फॉरेंसिक परीक्षण कराया जा रहा है। गिरोह के अन्य सदस्यों, विदेशी साइबर अपराधियों से इनके संबंध, धनराशि के अंतिम लाभार्थियों तथा अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के संबंध में विस्तृत जांच जारी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / दीपक