राजगढ़ः नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में देवर-भाभी काे उम्रकैद की सजा
राजगढ़, 22 जुलाई (हि.स.)। मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा में पदस्थ प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश रजनी प्रकाश बाथम ने नाबालिग से दुष्कर्म के चर्चित मामले में आरोपित रिंकेश उर्फ राकेश राठौर और उसकी भाभी सोनी उर्फ वर्षा साहू, दोनों निवासी बैरियाखेड़ी थाना सुठालिया को पॉक्सो एक्ट के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
प्रकरण में उपनिदेशक अभियोजन आलोक श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में शासन की ओर से पैरवी कर रही विशेष लोक अभियोजक डॉली गुप्ता ने बुधवार को जानकारी देते हुए बताया कि 31 मार्च को 14 वर्षीय पीड़ित ने सुठालिया थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि पड़ोसी रिंकेश पिछले दो वर्षों से उसका पीछा कर परेशान करता था। बाद में न्यायालय में दर्ज कराए गए विस्तृत बयान में पीड़ित ने बताया कि 26 मार्च 2025 की रात आरोपित घर में घुसा और उसके साथ दुष्कर्म किया। उसने यह भी आरोप लगाया कि करीब दो वर्ष पहले आरोपित की भाभी वर्षा ने उसे कमरे में बंद कर रिंकेश से दुष्कर्म कराया था। जांच के दौरान पुलिस ने मेडिकल परीक्षण, डीएनए जांच, एफएसएल रिपोर्ट और अन्य वैज्ञानिक व दस्तावेजी साक्ष्य एकत्र कर न्यायालय में चालान पेश किया। सुनवाई के दौरान पीड़ित और उसके परिजन अपने पूर्व बयानों से मुकर गए, लेकिन अदालत ने उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्यों और परिस्थितिजन्य प्रमाणों को विश्वसनीय मानते हुए दोनों आरोपितों को दोषी ठहराया।
न्यायालय ने रिंकेश को पॉक्सो एक्ट की धारा 5(एल)/6 सहित अन्य धाराओं में आजीवन कारावास एवं विभिन्न धाराओं में कठोर कारावास और दस हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया। सह-आरोपी सोनी उर्फ वर्षा को भी पॉक्सो एक्ट की धारा 5(एल)/6 सहपठित धारा 17 तथा बीएनएस की धारा 49 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। फैसले में न्यायालय ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि कोई गवाह न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए पक्षद्रोही हो जाए, तो न्यायालय केवल मूक दर्शक नहीं बन सकता। सत्य सामने लाने के लिए वैज्ञानिक और विश्वसनीय साक्ष्यों का समुचित मूल्यांकन करना न्यायालय का दायित्व है। इसी आधार पर दोनों आरोपितों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
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हिन्दुस्थान समाचार / मनोज पाठक

