डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 10 करोड़ की साइबर ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा, दो आरोपित गिरफ्तार
कानपुर, 12 मई (हि.स.)। थाना पनकी पुलिस और पश्चिम जोन साइबर सेल की संयुक्त कार्रवाई में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर करीब दस करोड़ रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा करते हुए दो आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में सामने आया कि गिरोह लोगों को पुलिस और जांच एजेंसियों का डर दिखाकर डिजिटल अरेस्ट करता था और फिर करोड़ों रुपये खातों में ट्रांसफर कराता था। एक खाते में ही तीन करोड़ पच्चीस लाख रुपये का ट्रांजैक्शन मिला है।
पुलिस उपायुक्त पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने मंगलवार को बताया कि गिरफ्तार आरोपितों की पहचान जगदीशचंद्र गुप्ता और रोहित भसीन के रूप में हुई है। साइबर पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों और संदिग्ध बैंक खातों की जांच के आधार पर दोनों को चिन्हित किया गया। जांच में पता चला कि जगदीशचंद्र गुप्ता के नाम पर “बालाजी फाउंडेशन” के नाम से आईसीआईसीआई बैंक में संचालित खाते में करीब दस करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ था। इनमें एक ही ट्रांजैक्शन में लगभग 3.25 करोड़ रुपये जमा किए गए थे।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि रोहित भसीन उसका सहयोगी है और नोएडा स्थित आईसीआईसीआई बैंक के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी एवं म्यूल खाते खुलवाए जाते थे। पुलिस जांच में सामने आया कि संबंधित बैंक कर्मचारी मुकुल वर्मा और धीरज, जो शाखा प्रबंधक और डिप्टी शाखा प्रबंधक थे, को गुजरात पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
पुलिस के अनुसार गिरोह 16 मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल कर अलग-अलग भाषाओं में लोगों को कॉल करता था। खुद को पुलिस, सीबीआई या अन्य एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया जाता था और फिर खातों में रकम ट्रांसफर कराई जाती थी।
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह का नेटवर्क अखिल भारतीय स्तर पर सक्रिय था। आंध्र प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और तमिलनाडु समेत आठ राज्यों से संबंधित शिकायतें मिली हैं। गिरोह बैंक खातों की ट्रांजैक्शन लिमिट बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से बढ़वाता था और फिर बड़ी रकम को तुरंत आरटीजीएस और एनईएफटी के माध्यम से दूसरे खातों में ट्रांसफर कर देता था।
पुलिस ने बताया कि जगदीशचंद्र गुप्ता पहले बिजली चोरी के मामले में जेल जा चुका है, जबकि रोहित भसीन विभिन्न राज्यों में दर्ज साइबर अपराधों में वांछित रहा है। दोनों आरोपितों को न्यायालय में पेश कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजा जा रहा है। साथ ही गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और नेटवर्क की जांच कर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप

