शाजापुर : बिना सत्यापन वेंडरों की नियुक्ति का आरोप, यात्रियों की सुरक्षा पर उठे सवाल
शाजापुर, 25 सितंबर (हि.स.)। ट्रेनों में यात्रियों को खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराने के लिए नियुक्त किए जाने वाले वेंडरों के दस्तावेजों और पुलिस सत्यापन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। रतलाम रेल मंडल में मक्सी के कौशल इंटरप्राइजेस को दिए गए ठेके के तहत काम कर रहे वेंडरों की नियुक्ति में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। ग्राम बेरछा के उपसरपंच हनुमंत राव ने मामले की जांच कराकर सभी वेंडरों के पुलिस सत्यापन, मेडिकल परीक्षण और पहचान संबंधी दस्तावेजों की पड़ताल कराने की मांग की है।
उपसरपंच का आरोप है कि कंपनी से जुड़े वेंडरों की नियुक्ति के दौरान दस्तावेजों की जांच और पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। उनका कहना है कि इस पूरे मामले की जांच इसलिए जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि ट्रेन में यात्रियों को खाद्य सामग्री या अन्य सामान उपलब्ध कराने वाले प्रत्येक वेंडर की नियुक्ति नियमानुसार हुई है या नहीं और उसके दस्तावेजों का विधिवत सत्यापन कराया गया है या नहीं।
हनुमंत राव के मुताबिक, उनके सामने ऐसा मामला आया है जिसमें एक व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगे थे, इसके बावजूद वह रेलवे से संबंधित वेंडर के रूप में काम कर रहा था। उनका दावा है कि संबंधित युवक का पुलिस सत्यापन भी कराया गया था, जबकि एक मामले में वह आरोपी बताया गया था।
इसी मामले को आधार बनाते हुए उपसरपंच ने रेलवे और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि कंपनी द्वारा नियुक्त सभी वेंडरों के पुलिस सत्यापन और उनके द्वारा जमा कराए गए दस्तावेजों की गहन जांच कराई जाए। साथ ही यह भी देखा जाए कि सभी वेंडरों का मेडिकल परीक्षण और पहचान संबंधी आवश्यक दस्तावेज नियमानुसार पूरे हैं या नहीं।
उपसरपंच ने कहा कि ट्रेनों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री सफर करते हैं। इनमें कई यात्री लंबी दूरी की यात्रा करते हैं और अपने साथ नकदी तथा कीमती सामान भी रखते हैं। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा के लिए ट्रेन में काम करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की पहचान और पृष्ठभूमि का सत्यापन महत्वपूर्ण है।
उन्होंने आशंका जताई कि यदि किसी आपराधिक प्रवृत्ति वाले व्यक्ति को बिना पर्याप्त जांच के ट्रेन में वेंडर के रूप में काम करने का अवसर मिल जाता है तो भविष्य में किसी यात्री के साथ अप्रिय घटना हो सकती है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि किसी दिन किसी यात्री के साथ कोई आपराधिक घटना होती है या खाद्य सामग्री से संबंधित कोई गंभीर घटना सामने आती है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।
हनुमंत राव ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि किसी संभावित अप्रिय घटना से पहले ही ट्रेन में घूमकर काम करने वाले सभी वेंडरों की पहचान और दस्तावेजों की जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि पुलिस सत्यापन, मेडिकल परीक्षण और अन्य जरूरी दस्तावेजों की दोबारा जांच होने से यह स्पष्ट हो सकेगा कि नियुक्त किए गए वेंडर निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हैं या नहीं।
उन्होंने मांग की है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि जांच में अनियमितताएं या दस्तावेजों में गड़बड़ी के आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ा मामला होने के कारण रेलवे प्रशासन को इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक जांच करानी चाहिए।
हिन्दुस्थान समाचार / मंगल नाहर

