धोखाधड़ी कर फर्जी दस्तावेज के आधार पर दूसरे की जमीन बेचने वाले गैंग के तीन सदस्य गिरफ्तार
नोएडा, 24 अप्रैल (हि.स.)। थाना जारचा पुलिस ने जमीन की फर्जी रजिस्ट्री कर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है। थाना जारचा पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपित सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से चार मोबाइल फोन, तीन सिम कार्ड, चार एटीएम कार्ड और एक सफेद रंग की स्कॉर्पियो कार बरामद हुई है।
पुलिस उपायुक्त ग्रेटर नोएडा डॉक्टर प्रवीण रंजन सिंह ने बताया कि गिरोह अब तक कई लोगों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये की ठगी कर चुका है। पुलिस ने शुक्रवार को सर्विलांस और मुखबिर की सूचना के आधार पर समाना नहर के पास से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रदीप राणा (53), निवासी सहारा होम्स लालकुआं गाजियाबाद, खुशबू देवी (45), निवासी भोजपुर बिहार और ज्योत्सना (42), वर्तमान निवासी प्रताप विहार गाजियाबाद के रूप में हुई है। पूछताछ में मुख्य आरोपित प्रदीप राणा ने खुलासा किया कि इस गिरोह का सरगना उसका सगा भाई टीटू राणा उर्फ गौरव है, जो फिलहाल फरार है। गिरोह में करीब 20 से 25 सदस्य शामिल हैं, जिनमें महिलाएं भी सक्रिय भूमिका निभाती है।
उन्होंने बताया कि पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से ठगी की वारदात को अंजाम देता था। सबसे पहले ऐसे भूखंडों की पहचान की जाती थी जिनके असली मालिक शहर से बाहर रहते है, बुजुर्ग है या जिनकी जमीन की निगरानी कम होती थी। इसके बाद असली मालिक की पूरी जानकारी जुटाई जाती थी। फिर गिरोह के सदस्य कूटरचना कर नकली आधार कार्ड, पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज तैयार करते थे। इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर गिरोह का कोई सदस्य खुद को जमीन का असली मालिक बताकर रजिस्ट्री कार्यालय में प्रस्तुत होता था। इसके बाद जमीन की फर्जी रजिस्ट्री अपने या किसी साथी के नाम करा ली जाती थी। रजिस्ट्री होने के बाद उसी जमीन को किसी तीसरे व्यक्ति को बेच दिया जाता था और मोटी रकम वसूल ली जाती थी। ठगी से प्राप्त धनराशि को गिरोह के सदस्य आपस में बांट लेते थे। पुलिस के अनुसार गिरोह के सदस्य अपनी पहचान छिपाने के लिए बार-बार मोबाइल नंबर बदलते थे और अलग-अलग स्थानों पर रहकर पुलिस से बचते थे।
डीसीपी ने बताया कि इस गिरोह द्वारा अब तक दर्जनों फर्जी रजिस्ट्री कर करोड़ों रुपये की ठगी की जा चुकी है। आरोपित प्रदीप राणा और उसका भाई टीटू राणा पहले से ही कई गंभीर मामलों में वांछित रहे हैं। इनके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, गैंगस्टर एक्ट, धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने जैसे कई संगीन धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं। मुख्य आरोपित प्रदीप राणा का आपराधिक इतिहास काफी लंबा है। उसके खिलाफ गाजियाबाद के विभिन्न थानों में हत्या, हत्या के प्रयास, धोखाधड़ी, जालसाजी, धमकी और गैंगस्टर एक्ट सहित कई मामलों में मुकदमे दर्ज हैं। वर्ष 2015 से लेकर 2026 तक उस पर लगातार आपराधिक मामले दर्ज होते रहे हैं। आरोपित संगठित तरीके से अपराध करता था और हर बार नए तरीके अपनाकर लोगों को झांसा देता था। गिरोह की कार्यप्रणाली से साफ है कि यह एक प्रोफेशनल नेटवर्क था, जो लंबे समय से सक्रिय था। थाना जारचा में दर्ज पांच अलग-अलग मुकदमों में भी ये आरोपित वांछित चल रहे थे। इन मामलों में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज है। पुलिस को लंबे समय से इनकी तलाश थी।
उन्होंने बताया कि इस गिरोह में महिलाओं की भी अहम भूमिका थी। पुलिस के अनुसार महिला सदस्य फर्जी पहचान बनाकर रजिस्ट्री कार्यालय में जाती थीं, जिससे शक कम होता था। इस कारण गिरोह को लंबे समय तक पकड़ा नहीं जा सका। पुलिस अब गिरोह के मुख्य सरगना टीटू राणा उर्फ गौरव की तलाश में जुटी है। उसके खिलाफ भी कई गंभीर मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस का कहना है कि जल्द ही उसे भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुरेश चौधरी

