उमरिया में राशन घोटाला: 23.43 लाख का खाद्यान्न गायब, विक्रेता पर एफआईआर
उमरिया, 21 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उमिरशा जिले के पाली पजनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम कुशमहा खुर्द में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में बड़ा घोटाला उजागर हुआ है। गरीबों के हिस्से का राशन गबन करने के आरोप में उचित मूल्य दुकान के तत्कालीन प्रबंधक सह विक्रेता गुलाबचंद सिंह नापित के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
मामले का खुलासा ग्रामीणों की शिकायत के बाद हुआ, जिस पर खाद्य विभाग ने जांच के लिए कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी जागृति प्रजापति को मौके पर भेजा। जांच में सामने आया कि जून 2025 से जनवरी 2026 के बीच 162 क्विंटल से अधिक गेहूं, 440 क्विंटल से अधिक चावल सहित नमक और शक्कर का वितरण नहीं किया गया। इन सभी की कुल कीमत 23 लाख 43 हजार 811 रुपये आंकी गई है।
जांच में यह भी सामने आया कि हितग्राहियों से पीओएस मशीन पर अंगूठा लगवाकर रिकॉर्ड में वितरण दर्शा दिया जाता था, जबकि वास्तविक रूप से राशन नहीं दिया गया। ग्रामीणों के अनुसार दुकान महीने में केवल एक दिन खुलती थी और उस दिन भी कई लोगों को अनाज नहीं मिलता था।
मामले को कलेक्टर के संज्ञान में लाया गया, जिनके निर्देश पर पाली थाने में आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। पाली थाना के थाना प्रभारी राजेश चंद्र मिश्रा ने बताया कि आरोपी के खिलाफ गबन का प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है और जल्द गिरफ्तारी की जाएगी।
जांच के बाद संबंधित उचित मूल्य दुकान को निलंबित कर दिया गया है। हालांकि ग्रामीणों ने सहकारिता विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि निरीक्षण की जिम्मेदारी होने के बावजूद नियमित जांच नहीं की गई, जिससे लंबे समय तक घोटाला चलता रहा।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह देखना बाकी है कि इस प्रकरण में अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका सामने आती है या नहीं।
हिन्दुस्थान समाचार / सुरेन्द्र त्रिपाठी

