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नरसिंहपुर में पांच लोगों की मौत का मामला: सड़क हादसा नहीं, सुनियोजित हत्या निकली; आठ आरोपित गिरफ्तार

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नरसिंहपुर में पांच लोगों की मौत का मामला: सड़क हादसा नहीं, सुनियोजित हत्या निकली; आठ आरोपित गिरफ्तार


नरसिंहपुर, 25 जुलाई (हि.स.)। मध्‍य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के सुआतला थाना क्षेत्र में 19 जुलाई को राष्ट्रीय राजमार्ग पर हाईवा की टक्कर से पांच लोगों की मौत के मामले में पुलिस ने शनिवार को प्रेस कान्‍फ्रेंस में बड़ा खुलासा किया है। प्रारंभिक जांच में सड़क दुर्घटना प्रतीत हो रही यह घटना अब सुनियोजित हत्या का मामला निकली है। पुलिस ने मुख्य आरोपित सहित आठ लोगों को गिरफ्तार कर घटना में प्रयुक्त हाईवा डम्पर, एक महिंद्रा थार, एक टोयोटा फॉर्च्यूनर तथा मोबाइल फोन जब्त किए हैं।

पुलिस के अनुसार, 19 जुलाई को इंद्रानगर के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क किनारे खड़े 6-7 लोगों को तेज रफ्तार हाईवा ने टक्कर मार दी थी। हादसे में राजेन्द्र पटेल की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि चार अन्य ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। एक व्यक्ति का उपचार अभी भी जारी है।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीना और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संदीप भूरिया मौके पर पहुंचे। पुलिस टीम ने कई घंटों तक घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए। जांच के दौरान सड़क पर अंग्रेजी अक्षर A का टूटा हुआ मोनोग्राम मिला, जिससे वाहन के टाटा कंपनी का होने की आशंका बनी और जांच को महत्वपूर्ण दिशा मिली।

इसके बाद पुलिस ने शाहपुरा से घटनास्थल तक राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का विश्लेषण किया। तकनीकी एवं वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई, जिसके दौरान घटना में प्रयुक्त हाईवा डम्पर हीरापुर-बंदरोहा के जंगलों से बरामद किया गया।

विवेचना के दौरान पुलिस को संदेह के आधार पर राजा पटेल को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ में सामने आया कि मृतक राजेन्द्र पटेल और मुख्य आरोपित आनंद पटेल के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। पुलिस के अनुसार, इसी रंजिश के चलते राजेन्द्र पटेल की हत्या की साजिश रची गई थी।

जांच में यह भी सामने आया कि राजा पटेल सहित अन्य सहयोगी मृतक की गतिविधियों और लोकेशन की जानकारी मुख्य आरोपित तक पहुंचाते थे। घटना वाले दिन भी मृतक की लोकेशन मोबाइल फोन के माध्यम से साझा की गई, जिसके बाद पूर्व नियोजित योजना के तहत हाईवा से टक्कर मारकर वारदात को अंजाम दिया गया।

पुलिस के मुताबिक, साजिश के तहत दो हाईवा अलग-अलग दिशा में तैनात किए गए थे, ताकि मृतक जिस मार्ग से निकले, उसी अनुसार वारदात को अंजाम दिया जा सके। घटना के बाद आरोपितों ने मामले को सड़क दुर्घटना का रूप देने का प्रयास भी किया।

मामले में पुलिस ने पहले भरत पटेल और अनिल पटेल को गिरफ्तार किया। इसके बाद तकनीकी साक्ष्यों, मुखबिर की सूचना और जंगलों में चलाए गए सर्च अभियान के आधार पर मुख्य आरोपित आनंद पटेल, अनुज पटेल, अरविन्द पटेल, नरेन्द्र ठाकुर और अमित खरे सहित कुल आठ आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस के अनुसार, जांच में प्रत्येक आरोपित की अलग-अलग भूमिका सामने आई है। किसी ने मृतक की लोकेशन उपलब्ध कराई, किसी ने निगरानी की, जबकि कुछ आरोपितों ने घटना के बाद आरोपितों को शरण देने और साक्ष्य छिपाने में सहयोग किया।

पुलिस ने घटना में प्रयुक्त हाईवा डम्पर, महिंद्रा थार, टोयोटा फॉर्च्यूनर और मोबाइल फोन जब्त कर लिए हैं। आरोपितों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना जारी है।

हिन्दुस्थान समाचार / भागीरथ तिवारी