डेटिंग ऐप पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर 67 वर्षीय बुजुर्ग को जाल में फंसाया, खाते से उड़ाए 1.30 लाख, दाे गिरफ्तार
नई दिल्ली, 19 अगस्त (हि.स.)। डेटिंग ऐप पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर 67 वर्षीय बुजुर्ग से दोस्ती करने और फिर मुलाकात के दौरान उनका मोबाइल फोन चोरी कर बैंक खातों से 1.30 लाख रुपये उड़ाने के मामले में दक्षिण पश्चिम पुलिस ने दो युवतियों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों की पहचान दिल्ली निवासी ज्योत्सना (26) और मानसी (21) के रूप में हुई है। पुलिस का कहना है कि ज्योत्सना ने फर्जी पहचान से डेटिंग ऐप प्रोफाइल बनाया था, जबकि उसकी साथी मानसी ने प्रोफाइल होल्डर बनकर बुजुर्ग से मुलाकात की। मोबाइल चोरी करने के बाद दोनों ने कथित तौर पर यूपीआई के जरिये रकम ट्रांसफर की और सबूत मिटाने के लिए चोरी किया गया मोबाइल भी नष्ट कर दिया।
दक्षिण पश्चिम जिले के पुलिस उपायुक्त अमित गोयल ने बुधवार को बताया कि 67 वर्षीय पीड़ित की डेटिंग ऐप के जरिए एक महिला से बातचीत शुरू हुई थी। इसके बाद दोनों के बीच टेलीग्राम पर बातचीत होने लगी। बातचीत आगे बढ़ने पर महिला ने पीड़ित से मिलने की बात कही। जांच में सामने आया कि 20 जुलाई और 24 जुलाई को दोनों आरोपितों ने पीड़ित से मुलाकात की थी।
24 जुलाई को पीड़ित दोनों युवतियों के साथ डिफेंस कॉलोनी स्थित एक रेस्टोरेंट में डिनर करने पहुंचा। खाना खाने के बाद जब वह वहां से निकल रहे थे, तभी उनका मोबाइल फोन चोरी हो गया। पीड़ित को इसका पता चलने के बाद तक आरोपितों ने कथित तौर पर मोबाइल का इस्तेमाल कर लिया था। कुछ ही समय बाद उनके दो बैंक खातों से बिना अनुमति यूपीआई के जरिए कुल 1.30 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए गए। पीड़ित की शिकायत पर 25 जुलाई को साइबर थाना में मुकदमा दर्ज किया गया।
मामले की जांच के लिए एसएचओ प्रवेश कौशिक के नेतृत्व में एसआई नीरज और हेड कांस्टेबल संदीप की टीम बनाई गई। पुलिस टीम ने बैंकिंग ट्रेल, लाभार्थी खातों, सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी निगरानी के जरिए आरोपितों का सुराग तलाशना शुरू किया। पुलिस ने संबंधित बैंक खातों के अकाउंट ओपनिंग फॉर्म, केवाईसी दस्तावेज, बैंक स्टेटमेंट और लेनदेन का ब्योरा हासिल किया। जांच में पता चला कि पीड़ित से ठगी गई 1.30 लाख रुपये की रकम पहले एक आरोपी के बैंक खाते में पहुंची। इसके बाद रकम को उसकी साथी के दूसरे बैंक खाते में ट्रांसफर किया गया। इसमें से 90 हजार रुपये एटीएम के जरिए निकाले गए।
पुलिस ने एटीएम और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। इसमें दो युवतियां ठगी की रकम निकालती हुई दिखाई दीं। यह फुटेज जांच में अहम सुराग साबित हुई। इसके बाद बैंकिंग लेनदेन और तकनीकी निगरानी के आधार पर पुलिस दोनों संदिग्धों तक पहुंची। पूछताछ में पुलिस ने कथित तौर पर दोनों के बीच की पूरी योजना का पता लगाया। जांच के अनुसार, ज्योत्सना ने फर्जी पहचान के साथ डेटिंग ऐप पर प्रोफाइल बनाया था। उसने 67 वर्षीय बुजुर्ग से बातचीत शुरू की और बाद में अपनी साथी मानसी को योजना में शामिल कर लिया। मानसी डेटिंग ऐप पर बातचीत करने वाली असली महिला नहीं थी, लेकिन उसने उसी महिला की पहचान बताकर पीड़ित से मुलाकात की। इस तरह पीड़ित को भरोसा दिलाया गया कि वह उसी महिला से मिल रहा है, जिससे उसकी ऑनलाइन बातचीत हुई थी।
पुलिस की जांच में सामने आया कि दूसरी मुलाकात के दौरान रेस्टोरेंट में डिनर के बाद पीड़ित का मोबाइल फोन चोरी किया गया। आरोप है कि इसके बाद मोबाइल का इस्तेमाल कर उनके बैंक खातों से यूपीआई के जरिये 1.30 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए। रकम को अलग-अलग खातों में घुमाने के बाद 90 हजार रुपये एटीएम से निकाल लिए गए। पुलिस के मुताबिक, वारदात के बाद दोनों ने चोरी किए गए मोबाइल को भी नष्ट कर दिया, ताकि पुलिस को कोई इलेक्ट्रॉनिक सबूत न मिल सके। हालांकि बैंकिंग ट्रेल, सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी निगरानी के जरिए पुलिस ने दोनों आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी

