जामताड़ा के साइबर ठगों पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई : 10 गिरफ्तार, थार रॉक्स, 14 मोबाइल और लैपटॉप बरामद
नई दिल्ली, 29 जून (हि.स.)। दक्षिण-पश्चिम जिला साइबर थाना पुलिस ने देश के सबसे कुख्यात साइबर अपराध केंद्र जामताड़ा और देवघर (झारखंड) से संचालित अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए 10 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह बैंक अधिकारी बनकर लोगों को व्हाट्सएप पर फर्जी एपीके (एपीके) फाइल भेजता था। फाइल डाउनलोड करते ही पीड़ित का मोबाइल हैक हो जाता था और आरोपी इंटरनेट बैंकिंग, ओटीपी व अन्य जानकारियां हासिल कर लाखों रुपये की ठगी कर लेते थे। पुलिस ने चार साइबर ठगी के मामलों का खुलासा करते हुए 26 लाख रुपये से अधिक की ठगी का पर्दाफाश किया है। आरोपितों के कब्जे से अपराध की कमाई से खरीदी गई महिंद्रा थार रॉक्स, 14 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और कई डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं।
तकनीकी जांच और कई राज्यों में छापेमारी के बाद मिली सफलता
दक्षिण पश्चिम जिले के पुलिस उपायुक्त अमित गोयल ने बताया कि साइबर थाने के एसएचओ इंस्पेक्टर प्रवेश कौशिक के नेतृत्व में एसआई अमित मलिक, एसआई चंदन राजपूत, हेड कांस्टेबल विक्रम, सुखलाल, मनेंद्र, विजयपाल और कांस्टेबल रवि की टीम ने लंबी तकनीकी जांच की। बैंक खातों, मोबाइल लोकेशन, डिजिटल ट्रेल और ट्रांजेक्शन का विश्लेषण करने के बाद पुलिस टीम जामताड़ा, देवघर और हजारीबाग पहुंची। कई दिनों तक स्थानीय स्तर पर निगरानी और लगातार छापेमारी के बाद गिरोह के सदस्यों को गिरफ्तार किया गया।
सीनियर सिटीजन कार्ड के नाम पर 18.50 लाख की ठगी
सबसे बड़े मामले में साइबर ठगों ने एक वरिष्ठ नागरिक को सीनियर सिटीजन कार्ड बनवाने का झांसा दिया। खुद को बैंक अधिकारी बताकर व्हाट्सएप पर फर्जी कार्ड भेजा और एपीके फाइल डाउनलोड करवाई। जैसे ही पीड़ित ने फाइल इंस्टॉल की, उसका मोबाइल पूरी तरह हैक हो गया। इसके बाद इंटरनेट बैंकिंग और ओटीपी का दुरुपयोग कर 18.50 लाख रुपये अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए निकाल लिए गए। जांच के बाद पुलिस ने जामताड़ा निवासी मंजूर आलम (29) को गिरफ्तार किया। उसके साथ बुलंदशहर निवासी यूसुफ (24) तथा मेरठ के आर्यन (19), रामप्रकाश (19), मनोहर (19) और प्रियदर्शन (20) को भी गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया कि मंजूर आलम ऑनलाइन बैंकिंग ट्रांजेक्शन संचालित करता था, जबकि उसके साथी म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराकर ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कराते थे। पुलिस ने इनके पास से अपराध की रकम से खरीदी गई महिंद्रा थार रॉक्स, छह मोबाइल फोन और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए।
क्रेडिट कार्ड केवाईसी के बहाने मोबाइल हैक
दूसरे मामले में पीड़ित ने ऑनलाइन क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन किया था। इसके बाद आरोपित ने बैंक अधिकारी बनकर फोन किया और केवाईसी पूरी कराने के नाम पर एपीके फाइल डाउनलोड करवा दी। मोबाइल हैक होने के बाद आरोपी ने खाते से 1,01,998 रुपये निकाल लिए।
तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस ने हजारीबाग से देवघर निवासी रविंद्र कुमार मंडल (25) को गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से तीन मोबाइल फोन और एक लैपटॉप बरामद हुआ। जांच में पता चला कि वह फर्जी बैंक अधिकारी बनकर लोगों को एपीके फाइल भेजने वाले रैकेट का सक्रिय सदस्य था।
'एम-परिवहन चालान' ऐप बनाकर उड़ाए 1.09 लाख रुपये
तीसरे मामले में पीड़ित को व्हाट्सएप पर एपीके नाम की फाइल भेजी गई। फाइल डाउनलोड करते ही मोबाइल हैक हो गया और साइबर अपराधियों ने इंटरनेट बैंकिंग और ओटीपी की मदद से 1.09 लाख रुपये निकाल लिए। जांच के बाद देवघर के पथरोल इलाके में छापेमारी कर रामविजय कुमार दास (20) को गिरफ्तार किया गया। उसके पास से तीन मोबाइल फोन बरामद हुए। पूछताछ में उसने लोगों को फर्जी एपीके फाइल भेजने और बैंकिंग डाटा चोरी करने की बात कबूल की।
बीएसईएस अधिकारी बनकर 6.31 लाख की ठगी
चौथे मामले में ठगों ने खुद को बीएसईएस अधिकारी बताकर पीड़ित से संपर्क किया। बातचीत के दौरान बैंकिंग जानकारी हासिल कर उसके खाते से 6.31 लाख रुपये निकाल लिए गए। तकनीकी जांच के बाद पुलिस ने हजारीबाग निवासी अंकित कुमार (22) और गिरिडीह निवासी गोलू कुमार (23) को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि अंकित ने अपना क्रेडिट कार्ड गोलू को दिया था, जिसका इस्तेमाल ठगी की रकम को ट्रांसफर और ठिकाने लगाने में किया गया।
ऐसे करता था गिरोह काम
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य बैंक अधिकारी बनकर फोन करते थे। इसके बाद व्हाट्सएप पर फर्जी एपीके फाइल भेजी जाती थी। जैसे ही पीड़ित फाइल डाउनलोड करता, मोबाइल पर आरोपियों का नियंत्रण हो जाता। इसके बाद इंटरनेट बैंकिंग, ओटीपी और अन्य गोपनीय जानकारी हासिल कर खाते से रकम निकाल ली जाती थी। ठगी की रकम को म्यूल बैंक खातों और यूपीआई आईडी के जरिए कई स्तरों पर ट्रांसफर कर ठिकाने लगाया जाता था। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान अपराध की कमाई से खरीदी गई एक महिंद्रा थार रॉक्स, 14 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं।
चार मामलों का खुलासा, जांच जारी
पुलिस ने इस कार्रवाई में दक्षिण-पश्चिम जिला साइबर थाने में दर्ज चार अलग-अलग साइबर ठगी के मामलों का खुलासा किया है। पुलिस का कहना है कि गिरोह के अन्य सदस्यों और पूरे नेटवर्क की जांच जारी है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपिताें ने देश के अन्य राज्यों में कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी

