क्रेडिट कार्ड रिप्लेसमेंट के बहाने ग्राहकों को ठगने वाले दो बैंककर्मी गिरफ्तार
नई दिल्ली, 31 जुलाई (हि.स.)। दक्षिणी जिला साइबर पुलिस ने एक बड़े और संगठित ''क्रेडिट कार्ड रिप्लेसमेंट फ्रॉड'' रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस ने निजी बैंक के एक मौजूदा और एक पूर्व कर्मचारी को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह बैंक के आंतरिक सिस्टम और ग्राहकों के गोपनीय डेटा का दुरुपयोग करके लाखों रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दे रहा था। दक्षिण जिले के पुलिस उपायुक्त अनंत मित्तल के मुताबिक, आरोपितों के पास से पुलिस ने 7.15 लाख नकद, फर्जी तरीके से हासिल किए गए आठ क्रेडिट कार्ड, सात मोबाइल फोन और ठगी की रकम से खरीदे गए 16 इलेक्ट्रॉनिक घरेलू उपकरण बरामद हुए हैं। घरेलू उपकरणों में एलईडी टीवी, रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर, माइक्रोवेव ओवन, इंडक्शन कुकटॉप व मिक्सर ग्राइंडर शामिल हैं। पुलिस आरोपितों से पूछताछ कर रही है।
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि आरोपित योजनाबद्ध तरीके से ग्राहकों के क्रेडिट कार्ड से जुड़े पंजीकृत मोबाइल नंबर को बिना उनकी जानकारी के बदल देते थे। मोबाइल नंबर बदलने के बाद, वे बैंक से ''रिप्लेसमेंट'' (डुप्लीकेट) क्रेडिट कार्ड जारी करवा लेते थे। इसके बाद नया पिन जनरेट कर उस कार्ड से एटीएम से नकद निकासी और महंगी खरीदारी की जाती थी, जबकि असली क्रेडिट कार्ड ग्राहक की जेब में ही पड़ा रहता था।
कैसे हुआ मामले का खुलासा
इस रैकेट का पर्दाफाश तब हुआ जब एक महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। महिला का आरोप था कि उसका असली क्रेडिट कार्ड उसके पास सुरक्षित होने के बावजूद उसके कार्ड से 1,71,935 रुपये की अनधिकृत निकासी हो गई है। जांच में पता चला कि आरोपितों ने 53,000 रुपये एटीएम से निकाले थे और 1,18,935 रुपये के महंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खरीदे थे। इस आधार पर 23 जुलाई को साइबर पुलिस ने ई-एफआईआर दर्ज की।
जांच के दौरान बैंक रिकॉर्ड्स और डिजिटल साक्ष्यों की तकनीकी जांच के बाद पुलिस ने दो मुख्य आरोपितों को धर दबोचा। पहला आरोपित गाजियाबाद निवासी 33 वर्षीय मुकेश कुमार है जोकि बैंक के क्रेडिट कार्ड विभाग में सेल्स एग्जीक्यूटिव है। दूसरा आरोपित उत्तम नगर निवासी 34 वर्षीय अनिल कुमार है जोकि बैंक का पूर्व सेल्स एग्जीक्यूटिव है। अनिल ने फरवरी 2026 में इस्तीफा दे दिया था। इन दोनों की गिरफ्तारी के साथ ही साइबर पुलिस ने धोखाधड़ी के छह अन्य मामलों को भी सुलझाने में सफलता हासिल की है। इन सभी मामलों में कुल मिलाकर लगभग 10,57,868 रुपये की ठगी की गई थी। मामले में आगे की जांच जारी है ताकि गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके और पीड़ितों के बाकी पैसे बरामद किए जा सकें।
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हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी

