दिल्ली में इंटरनेशनल ‘सिम बॉक्स’ साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़, दो आरोपित गिरफ्तार
नई दिल्ली, 10 अप्रैल (हि.स.)। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की आईएफएसओ यूनिट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय ‘सिम बॉक्स’ साइबर फ्रॉड गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस गिरोह के दो अहम सदस्यों को पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार फेज-3 स्थित जीडी कॉलोनी से गिरफ्तार किया गया है। आरोपितों की पहचान वैभव राज उर्फ ईशु (29) और अनिल कुमार (28) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, यह नेटवर्क कंबोडिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य देशों से संचालित हो रहा था।
आईएफएसओ के पुलिस उपायुक्त विनित कुमार ने शुक्रवार को बताया कि जांच में सामने आया कि आरोपी ‘सिम बॉक्स’ (एक ऐसा उपकरण है जिसमें एक साथ कई (सैकड़ों) सिम कार्ड लगाकर इंटरनेट के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय कॉल को स्थानीय कॉल में बदला जाता है।) तकनीक का इस्तेमाल कर विदेशी (वीओआईपी कॉल्स-एक ऐसी तकनीक है जो पारंपरिक टेलीफोन लाइनों के बजाय इंटरनेट के माध्यम से वॉयस कॉल करने की सुविधा देती है। यह आपकी आवाज को डिजिटल डेटा में बदलकर इंटरनेट के जरिए भेजती है। व्हाट्सएप, जूम, या स्काइप कॉल इसके आम उदाहरण हैं, जो स्मार्टफोन, कंप्यूटर या विशेष आईपी फोन से किए जा सकते हैं।) को भारतीय मोबाइल नेटवर्क में स्थानीय नंबर के रूप में दिखाते थे। इससे पीड़ितों को लगता था कि कॉल भारत से आ रही है और वे आसानी से झांसे में आ जाते थे। इस तकनीक के जरिए गिरोह “डिजिटल अरेस्ट” और फर्जी निवेश योजनाओं के नाम पर लोगों से ठगी करता था।
ऑपरेशन साइहाॅक 4.0 में मिली सफलता
पुलिस उपायुक्त के अनुसार 6 और 7 अप्रैल को चलाए गए ऑपरेशन साइहाॅक 4.0 के दौरान नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज मामलों के विश्लेषण में इस गिरोह का सुराग मिला। जांच में मयूर विहार फेज-3 की जीडी कॉलोनी में एक फ्लैट से अवैध सिम बॉक्स सेटअप संचालित होने की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस टीम ने छापा मारकर दोनों आरोपिताें को गिरफ्तार कर लिया।
ऐसे देते थे वारदात को अंजाम
गिरोह के सदस्य खुद को पुलिस, सीबीआई़, कस्टम या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को फोन करते थे। उन्हें बताया जाता था कि उनके खिलाफ कई एफआईआर दर्ज हैं और गिरफ्तारी हो सकती है। इसके बाद “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर उन्हें ऑनलाइन निगरानी में रहने को कहा जाता था और पैसे तथाकथित “आरबीआई अकाउंट” में ट्रांसफर करवाए जाते थे। बाद में रकम वापस करने का झांसा देकर ठगी की जाती थी।
आरोपिताें की भूमिका
पुलिस के अनुसार, वैभव राज सिम बॉक्स और लैपटॉप ऑपरेट करता था, इंटरनेट कनेक्शन अपने नाम से लेकर एनीडेस्क जैसे ऐप के जरिए विदेशी ठगों को रिमोट एक्सेस देता था। वह लगातार सिम कार्ड बदलता रहता था। वहीं अनिल कुमार ने फ्लैट किराए पर लिया था और पूरे ऑपरेशन की निगरानी करता था। वह बैंक खातों के जरिए पैसों का लेन-देन और लॉजिस्टिक सपोर्ट भी संभालता था। पुलिस ने छापेमारी के दौरान एक एक्टिव 32 स्लॉट वाला सिम बॉक्स, 350 से अधिक सिम कार्ड, लैपटॉप, कई मोबाइल फोन, इंटरनेट उपकरण, चेकबुक और कुरियर पैकेट बरामद किए हैं। साथ ही BSNL के 30 नए सिम कार्ड भी बरामद हुए हैं, जिन्हें आगे इस्तेमाल किया जाना था। वहीं जांच में पता चला है कि आरोपित “म्यूल अकाउंट” के जरिए ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर छिपाते थे। एक सत्याम तिवारी नाम के व्यक्ति के बैंक खाते से जुड़े तीन मामलों की भी जानकारी सामने आई है। पुलिस का कहना है कि यह मामला बेहद गंभीर और संगठित है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क शामिल है। अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों और पूरे मनी ट्रेल की जांच की जा रही है। दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की है कि “डिजिटल अरेस्ट” जैसे कॉल से सावधान रहें और किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज की तुरंत सूचना पुलिस को दें।
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हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी

