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सतना : बाढ़ से 70 किलोमीटर पुरवा नहर क्षतिग्रस्त, मरम्मत के लिए भेजा 3 करोड़ का डीपीआर

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सतना : बाढ़ से 70 किलोमीटर पुरवा नहर क्षतिग्रस्त, मरम्मत के लिए भेजा 3 करोड़ का डीपीआर


सतना, 23 सितंबर (हि.स.)। मध्‍य प्रदेश के सतना जिले में अतिवृष्टि और बाढ़ ने जनजीवन के साथ सिंचाई व्यवस्था को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। बाणसागर सिंचाई परियोजना की लोवर पुरवा नहर क्रमांक-2 सतना को सबसे अधिक क्षति हुई है। 132 किलोमीटर लंबी इस नहर के करीब 70 किलोमीटर हिस्से में अलग-अलग स्थानों पर नहर का अंश ध्वस्त हो गया है। क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत के लिए सिंचाई विभाग ने करीब तीन करोड़ रुपये का विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार कर वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा है।

लोवर पुरवा कैनाल सतना क्रमांक-2 के कार्यपालन यंत्री की ओर से भेजे गए डीपीआर में नहर की मरम्मत के लिए आवश्यक बजट जल्द जारी करने का अनुरोध किया गया है। विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती रबी सीजन शुरू होने से पहले मरम्मत कार्य पूरा करने की है, ताकि किसानों को सिंचाई के लिए बाणसागर का पानी उपलब्ध कराया जा सके।

जानकारी के अनुसार, नहर के अलग-अलग हिस्सों में करीब 20 से 50 मीटर तक लंबे पैच बाढ़ की चपेट में आने से क्षतिग्रस्त हुए हैं। कई स्थानों पर नहर की मिट्टी और रिटेनिंग वॉल तक बह गई है। इन हिस्सों के पुनर्निर्माण और मरम्मत में कम से कम एक माह का समय लगने की संभावना है।

रबी सीजन में पलेवा और फसल सिंचाई के लिए किसानों की ओर से पानी की मांग शुरू होने से पहले 15 नवंबर तक मरम्मत कार्य पूरा करना जरूरी माना जा रहा है। यदि निर्धारित समय में काम पूरा नहीं हुआ तो नहर से जुड़े बड़े क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।

लोवर पुरवा कैनाल क्रमांक-2 का कमांड क्षेत्र करीब 46 हजार हेक्टेयर है। इस क्षेत्र में लगभग 72 हजार किसान सिंचाई के लिए नहर के जरिए मिलने वाले बाणसागर के पानी पर निर्भर हैं। इनमें पलेवा के बाद रबी फसलों की सिंचाई प्रमुख रूप से इसी व्यवस्था से की जाती है।

विभाग के अनुसार, नहर के ध्वस्त हिस्सों के कारण करीब 15 हजार हेक्टेयर कमांड क्षेत्र में बिना मरम्मत और लाइनिंग के पानी की आपूर्ति संभव नहीं होगी। इसके अलावा दूसरे हिस्सों में भी क्षतिग्रस्त नहरों के कारण पानी की आपूर्ति सुचारू रखने की चुनौती बनी हुई है। कोटर और रामपुर बाघेलान सर्किल के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में नहर के क्षतिग्रस्त होने का असर अधिक बताया जा रहा है। इन क्षेत्रों में नहर व्यवस्था को जल्द दुरुस्त करना विभाग के लिए प्राथमिकता बन गया है।

किसानों का कहना है कि पुरवा नहर का निर्माण करीब डेढ़ दशक पहले हुआ था, लेकिन इसके बाद कई हिस्सों में नियमित मरम्मत नहीं कराई गई। इसके चलते नहर पहले से ही कई स्थानों पर जर्जर स्थिति में थी। नहर से होने वाले सीपेज के कारण आसपास के खेतों में अनचाहा पानी भरने की समस्या भी सामने आती रही है। किसानों के मुताबिक, इसके चलते कई बार खेतों में खड़ी फसल खराब होने की स्थिति बनी है।

किसानों का कहना है कि अब यदि ध्वस्त मुख्य नहर और माइनर नहरों में केवल मिट्टी भरकर मरम्मत कर उन्हें चालू कर दिया गया और लाइनिंग नहीं कराई गई तो आने वाले समय में सीपेज की समस्या और बढ़ सकती है। इससे नहर के पानी का एक हिस्सा खेतों तक पहुंचने के बजाय आसपास के क्षेत्रों में फैलने की आशंका रहेगी।

लोवर पुरवा कैनाल के कार्यपालन यंत्री पीके पांडे ने बताया कि बाढ़ से क्षतिग्रस्त नहरों की मरम्मत के लिए शीर्ष मुख्यालय को आवश्यक बजट की मांग के साथ विस्तृत रिपोर्ट भेजी गई है। प्रभावित कमांड क्षेत्र करीब 15 हजार हेक्टेयर है। विभाग की ओर से नहर को रबी सीजन से पहले उपयोग के योग्य बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्‍द्र द्विवेदी