सीबीआई अधिकारी बनकर घर पर फर्जी छापा, सात गिरफ्तार
नई दिल्ली, 24 अगस्त (हि.स.)। राेहिणी जिले के प्रशांत विहार में सीबीआई अधिकारी बनकर एक परिवार के घर पर फर्जी छापा मारने पहुंचे गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में सात आरोपितों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों ने कथित तौर पर फर्जी सीबीआई पहचान पत्र दिखाकर घर में प्रवेश करने की कोशिश की और परिवार को धमकाया।
जांच के दौरान पुलिस ने आठ मोबाइल फोन, सीबीआई का मोनोग्राम लगे कपड़े, फर्जी पहचान पत्रों के स्क्रीनशॉट और घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज बरामद किए हैं। मोबाइल फोन से दिल्ली और मुंबई में सीबीआई, ईडी समेत अन्य सरकारी एजेंसियों के अधिकारी बनकर कथित तौर पर फर्जी छापे मारने के वीडियो भी मिले हैं।गिरफ्तार आरोपितों की पहचान आसिफा, कुलदीप शर्मा, पूजा अग्रवाल, चंदर प्रकाश शर्मा, शुबम उर्फ गोलू, राजवीर सिंह और नितिन शर्मा के रूप में हुई हैं।
पुलिस के अनुसार, 11 अगस्त की रात करीब 10 बजे प्रशांत विहार निवासी प्रथम अग्रवाल अपनी मां के साथ घर पर मौजूद थे। इसी दौरान करीब आठ लोग, जिनमें छह पुरुष और दो महिलाएं शामिल थीं, उनके घर के बाहर पहुंचे। उन्होंने खुद को सीबीआई अधिकारी बताते हुए कथित पहचान पत्र दिखाए और कहा कि वे घर पर छापा मारने आए हैं।
परिवार ने जब उनसे तलाशी वारंट और छापे की अनुमति से संबंधित दस्तावेज मांगे तो आरोपितों ने कथित तौर पर धमकाना शुरू कर दिया। करीब डेढ़ घंटे तक वे घर के बाहर मौजूद रहे। पड़ोसियों के हस्तक्षेप के बाद उन्होंने कहा कि प्रथम के पिता के नाम कोई नोटिस जारी हुआ है और उसे अपनी कार से लाने की बात कहकर वहां से चले गए। इसके बाद प्रथम ने 112 पर पुलिस को सूचना दी।
प्रथम के पिता के मोबाइल पर कथित सीबीआई नोटिस भी भेजा गया था। बाद में मूल संदेश डिलीट कर दिया गया, लेकिन परिवार ने उसका स्क्रीनशॉट सुरक्षित रख लिया। जांच में नोटिस के फर्जी होने का संदेह सामने आया। इसके बाद प्रशांत विहार थाने में 19 अगस्त को एफआईआर संख्या 238/2026 दर्ज की गई।
पुलिस के मुताबिक, आसिफा मूल रूप से जम्मू-कश्मीर की रहने वाली है और पहले राजेंद्र प्लेस में होटल चलाती थी। पूजा अग्रवाल पहले करोल बाग के एक रेस्तरां में काम कर चुकी है और गायिका भी रह चुकी है। कुलदीप शर्मा एसबीआई और आईएनजी वैश्य बैंक में काम कर चुका है और उसकी शिकायतकर्ता से बैंकिंग काम के दौरान पहचान हुई थी।
चंदर प्रकाश पहले इलेक्ट्रॉनिक्स रिपेयर का काम करता था। पुलिस के अनुसार, शुबम, राजवीर और नितिन बेरोजगार हैं। इन तीनों को कथित फर्जी छापे में शामिल होने के लिए चंदर प्रकाश ने बुलाया था। पुलिस अब सभी आरोपितों की भूमिका की डिजिटल और अन्य साक्ष्यों से पुष्टि कर रही है।
पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से आठ मोबाइल फोन बरामद किए हैं। मोबाइल फोन में कथित फर्जी सीबीआई पहचान पत्रों की तस्वीरें, आरोपितों के सरकारी अधिकारियों जैसी वेशभूषा में फोटो और वीडियो मिले हैं। इसके अलावा सीबीआई मोनोग्राम वाले कपड़े, फर्जी पहचान पत्रों के स्क्रीनशॉट और घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज भी जांच में जुटाए गए हैं।
पुलिस जांच के मुताबिक, गिरोह किसी व्यक्ति को निशाना बनाने से पहले उसके बारे में जानकारी जुटाता था। इस मामले में कुलदीप शर्मा पर आरोप है कि उसने शिकायतकर्ता, उसके घर के पते और वहां नकदी या कीमती सामान होने की संभावित जानकारी आसिफा और पूजा तक पहुंचाई।
पुलिस के अनुसार, करीब आठ महीने पहले एक पारिवारिक शादी में आसिफा, पूजा और कुलदीप की मुलाकात हुई थी। इसके बाद आरोपित कथित तौर पर फर्जी सीबीआई अधिकारी बनकर छापे डालने की गतिविधियों में शामिल हुए। पूजा ने कथित तौर पर अपने बहनोई चंदर प्रकाश से फर्जी छापे के लिए लोगों की व्यवस्था करने को कहा। चंदर प्रकाश अपने साथ शुबम, राजवीर, नितिन समेत अन्य लोगों को लेकर प्रशांत विहार पहुंचा था।
जांच में पुलिस को पता चला है कि गिरोह कथित तौर पर पिछले तीन-चार महीने से सक्रिय था। आरोपित पहले किसी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति और घर की जानकारी जुटाते थे। इसके बाद सीबीआई, ईडी या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बनकर वहां पहुंचते थे। फर्जी पहचान पत्र और दस्तावेज दिखाकर घर में प्रवेश या तलाशी की कोशिश की जाती थी। इस दौरान परिवार को डराकर पैसे या कीमती सामान हासिल करने का प्रयास किया जाता था।
पुलिस को आरोपितों के मोबाइल से ऐसे वीडियो भी मिले हैं, जिनसे दिल्ली और मुंबई में इसी तरह की कथित गतिविधियों में शामिल होने का संदेह है। कुछ वीडियो में आरोपित सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय और अन्य सरकारी एजेंसियों के अधिकारी बनकर दिखाई दे रहे हैं।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी सीबीआई पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज कहां से तैयार कराए गए। साथ ही गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों, संभावित पीड़ितों और दिल्ली-मुंबई में हुई संदिग्ध घटनाओं की जानकारी जुटाई जा रही है। आरोपितों के मोबाइल, कॉल डिटेल, डिजिटल सामग्री और वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद गिरोह के पूरे नेटवर्क और अन्य घटनाओं में उसकी भूमिका स्पष्ट होगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी

