आधार से मोबाइल नंबर बदलकर लोगों के नाम पर ले रहे थे लोन, 50 पीड़ितों से 1.60 करोड़ की ठगी, आरोपी गिरफ्तार
नई दिल्ली, 11 जुलाई (हि.स.)। राजधानी में साइबर अपराधियों ने ठगी का ऐसा तरीका अपनाया, जिसने लोगों की पहचान और वित्तीय सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रोहिणी जिले की साइबर थाना पुलिस ने ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो लोगों के आधार कार्ड से जुड़े मोबाइल नंबर बदलवाकर उनके नाम पर निजी वित्तीय कंपनियों से लाखों रुपये का फर्जी लोन ले रहा था। पुलिस ने इस मामले में पंजाब के मोहाली निवासी 24 वर्षीय अजय कुमार को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में करीब 50 लोगों के नाम पर 1.60 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी लोन लेने का खुलासा हुआ है। पुलिस को आशंका है कि पीड़ितों की संख्या और बढ़ सकती है।
राेहिणी जिले के पुलिस उपायुक्त शशांक जायसवाल के अनुसार, मामले का खुलासा 25 जून को दर्ज एक शिकायत से हुआ। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि उसे एक रिकवरी एजेंट लगातार फोन कर लोन की ईएमआई जमा करने का दबाव बना रहा था, जबकि उसने कभी कोई लोन नहीं लिया था। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए साइबर थाना पुलिस ने जांच शुरू की।
जांच में पता चला कि शिकायतकर्ता के नाम पर एक निजी एनबीएफसी से 4.50 लाख रुपये का पर्सनल लोन स्वीकृत किया गया था। सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि उसके आधार कार्ड से लिंक मोबाइल नंबर उसकी जानकारी के बिना बदल दिया गया था। इसी बदले हुए मोबाइल नंबर के जरिए ओटीपी और अन्य सत्यापन प्रक्रियाएं पूरी कर ठगों ने आधार और पैन कार्ड का दुरुपयोग करते हुए लोन हासिल कर लिया।
मामले की जांच के लिए पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण, बैंक खातों के लेनदेन और मोबाइल डेटा की पड़ताल की। जांच के दौरान पता चला कि लोन की राशि अजय कुमार के बैंक खाते में पहुंची थी। इसके बाद पुलिस ने मोहाली में छापेमारी कर उसे गिरफ्तार कर लिया। उसके कब्जे से वारदात में इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन भी बरामद किया गया।
पूछताछ में अजय ने खुलासा किया कि वह पंजाब के अन्य साथियों के संपर्क में था। गिरोह पहले लोगों के आधार कार्ड से जुड़े मोबाइल नंबर बदलवाता था। इसके बाद आधार और पैन कार्ड का इस्तेमाल कर विभिन्न निजी फाइनेंस कंपनियों से ऑनलाइन लोन लिया जाता था। लोन की रकम अलग-अलग बैंक खातों में भेजी जाती और फिर कमीशन के आधार पर नकद निकाल ली जाती थी।
जांच में अब तक सामने आया है कि गिरोह करीब 50 लोगों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर लगभग 1.60 करोड़ रुपये के फर्जी लोन ले चुका है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आधार से जुड़े मोबाइल नंबर बदलने में किसकी भूमिका थी, किन-किन बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया और इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। फरार आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए दिल्ली और पंजाब सहित कई स्थानों पर छापेमारी की जा रही है।
साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी अनजान लोन या ईएमआई से संबंधित कॉल आए तो उसे हल्के में न लें। तुरंत अपने आधार से जुड़े मोबाइल नंबर, पैन और क्रेडिट रिकॉर्ड की जांच करें और किसी भी तरह की गड़बड़ी मिलने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराएं।
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हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी

