डिजिटल अरेस्ट कर सेवानिवृत्त एडीजी से 2.12 करोड़ की ठगी करने वाले महाराष्ट्र से गिरफ्तार
जयपुर, 20 सितंबर (हि.स.)। सेंट्रल साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन जयपुर ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर सेवानिवृत्त एडीजी से 2.12 करोड़ रुपए की ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए महाराष्ट्र से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। तीनों को ट्रांजिट रिमांड पर जयपुर लाया गया। आरोपियों ने भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) के सेवानिवृत्त एडीजी को पुलिस और अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बनकर मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने और गिरफ्तारी वारंट जारी होने का डर दिखाया। इसके बाद करीब 10 दिन तक उन्हें व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा और अलग-अलग बैंक खातों में 2 करोड़ 12 लाख 10 हजार रुपए ट्रांसफर करवा लिए।
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक साइबर क्राईम विजय कुमार सिंह के अनुसार सेण्ट्रल साइबर क्राईम पुलिस स्टेशन जयपुर ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर सेवानिवृत्त एडीजी से 2.12 करोड़ रुपए की ठगी करने वाले रोहित रेवण कटकधोंड,आमोल जगन्नाथ पवार और आंबादास कालू जाधव को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार रोहित रेवण कटकधोंड—कृषि उत्पाद व्यवसायी है। पुलिस के अनुसार वह मुंबई में अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कमीशन के लालच में ठगों के संपर्क में आया और उसने अपने बैंक खाते तथा सिम कार्ड उपलब्ध कराए। आमोल जगन्नाथ पवार—कंपनी में निवेश और शेयर बाजार के नाम पर खातों का दुरुपयोग कराने तथा पुशबुलेट ऐप के जरिए ओटीपी साझा करने में शामिल बताया गया है और आंबादास कालू जाधव—आमोल पवार का पूर्व साझेदार है। पुलिस के अनुसार उसके नाम से नासिक के यस बैंक में फर्जी फर्म 'ओरिएंट मेटल्स' का खाता खुलवाया गया, जिसमें ठगी की रकम प्राप्त की गई।
उप महानिरीक्षक पुलिस शान्तनु कुमार सिंह ने बताया कि 9 से 18 अगस्त 2026 के बीच आरोपियों ने सेवानिवृत्त अधिकारी से संपर्क किया। उन्हें लगातार वीडियो कॉल पर रहने, किसी अन्य व्यक्ति से संपर्क नहीं करने और लाइव लोकेशन चालू रखने के लिए मजबूर किया गया। आरोपियों ने फर्जी सरकारी दस्तावेज भेजकर खातों की जांच के नाम पर 13 अगस्त को आईसीआईसीआई बैंक खाते में 2.02 करोड़ रुपए तथा 18 अगस्त को यस बैंक खाते में 10.10 लाख रुपए आरटीजीएस के जरिए ट्रांसफर करवा लिए।
इसके बाद साइबर पुलिस स्टेशन के उप अधीक्षक गजेन्द्र शर्मा और पुलिस निरीक्षक सोनम के नेतृत्व में टीम ने बैंक खातों, सीडीआर, केवाईसी, व्हाट्सएप चैट और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया। इसके बाद आरोपियों की पहचान कर नासिक और मुंबई से गिरफ्तार किया गया।
जांच में सामने आया कि ठगी की रकम को कई बैंक खातों में भेजकर उसकी लेयरिंग की गई। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने सेबी और शेयर बाजार अधिकारी बनकर पुशबुलेट ऐप के माध्यम से मोबाइल के ओटीपी हासिल किए और नेट बैंकिंग के जरिए करोड़ों रुपए का लेन-देन किया। पुलिस अब ठगी की रकम की बरामदगी के साथ गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

