रामसिंह हत्याकांड: चार हत्याओं की साजिश में मां और बेटी पहुंच गई सलाखों के पीछे
अजमर, 2 जून(हि.स.)। बोराड़ा थाना क्षेत्र के श्रीरामपुरा गांव में पूर्व सरपंच एवं कांग्रेस नेता रामसिंह चौधरी सहित चौधरी की मां पूसी देवी, दूसरी पत्नी सुरज्ञान देवी और मुंह बोली बेटी महिमा चौधरी की हत्या के बहुचर्चित मामले में आरोपित मां—बेटी सुनीता चौधरी और सरिता उर्फ एकता चौधरी को अदालत ने जेल भेज दिया है।
मंगलवार को दो दिन का अतिरिक्त पुलिस रिमांड पूरा होने पर मृतक रामसिंह चौधरी की पहली पत्नी आरोपित सुनीता चौधरी को केकडी-सरवाड न्यायालय में पेश किया गया था। अदालत ने उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया। इसके साथ ही इस हत्याकांड में आरोपित मां व बेटी दोनों सलाखों के पीछे पहुंच गए जबकि मुख्य आरोपित नाबालिग पुत्र को पहले ही बाल संप्रेक्षण गृह भेजा जा चुका है। पुलिस के अनुसार सोमवार को सुनीता चौधरी और पुत्री सरिता चौधरी उर्फ एकता चौधरी को रिमांड अवधि पूरी होने पर न्यायालय में पेश किया गया था। उस दौरान पुलिस ने सुनीता को आगे पूछताछ के लिए अतिरिक्त दो दिन की रिमांड मांगी थी, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया था। वहीं सरिता चौधरी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया था। मंगलवार को अतिरिक्त रिमांड पूरी होने के बाद सुनीता को भी जेल भेज दिया गया।
पुलिस जांच में साक्ष मिले कि आरोपितों ने चारों की हत्या का सुनियोजित प्लान तैयार किया था। साक्ष्यों को मिटाने के लिए भी सभी योजना थी फिर भी साक्ष्य बच गए और आरोपित पकड़े गए।
पुलिस के अनुसार घटना स्थल पर खून से सने कपड़े, जमीन पर खून के निशान, चूल्हे में आधे जले दस्ताने, मृतकों के शरीर से डीजल की गंध, टूटा हुआ चाकू, पेड़ पर लगे खून के हाथों के निशान सहित कई महत्वपूर्ण सबूत बरामद कर लिए गए। आरोपितों ने घर की सफाई कर सभी सबूत मिटाने का प्रयास किया था। चाकू को तो नजदीक ही कुएं में फेंक दिया था।
उल्लेखनीय है कि गत 28 मई 2026 को तड़के श्रीरामपुरा गांव के पास सड़क किनारे जलती हुई स्कार्पियो की सूचना पर राहगीरों ने मौके पर जाकर देखा तो वाहन में कांग्रेस नेता रामसिंह चौधरी, उनकी मां एवं पर्वू सरपंच पूसी देवी, जिला परिषद सदस्य सुरज्ञान देवी और भांजी महिमा चौधरी गंभीर रूप से झुलसी अवस्था में मिले थे। तीन लोगों की तो मौके पर ही मौत हो गई थी जबकि एक ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया था। प्रारंभिक जांच में यह हादसा माना जा रहा था किन्तु घटनास्थल और परिस्थितियों ने पुलिस को शुरू से ही संदेह में डाला हुआ था कि मामला हत्या का हो सकता है। पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला ने मामले की कमान खुद संभाली और शीघ्र ही हत्यारों की गर्दन तक कानून के हाथ पहुंच गए। हत्यारे परिवार के ही लोग निकले वह भी पहली पत्नी, बेटी और नाबालिग बेटा।
पुलिस सूत्रों के अनुसार मृतक रामसिंह चौधरी कांग्रेस में सक्रिय पदाधिकारी होने के साथ हिस्ट्रीशीटर भी रहा था। उसके खिलाफ रीनगर, सरवाड़ ओर बोराड़ा में राजकार्य में बाधा, मारपीट, अवैध हथियार रखने समेत करीब 16 आपराधिक मामले दर्ज थो। वर्ष 2024 में उसको हिस्ट्रीशीटर निगरानी बंद कर दी गई थी।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष

