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उमरिया में संदिग्ध युवकों का मामला: बिना पूरी जांच पुलिस ने भेजा वापस, उठे कई सवाल

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उमरिया में संदिग्ध युवकों का मामला: बिना पूरी जांच पुलिस ने भेजा वापस, उठे कई सवाल


उमरिया , 17 मार्च (हि.स.)। मप्र के उमरिया जिला मुख्यालय के वार्ड क्रमांक चार स्थित जेल बिल्डिंग के पीछे किराए के मकान में रह रहे दो युवकों को लेकर एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। करीब एक महीने से रह रहे इन युवकों पर जब मकान मालिक को शक हुआ, तो उसने पुलिस को सूचना दी। हालांकि, आरोप है कि पुलिस ने मामले की पूरी और गंभीर जांच किए बिना ही दोनों युवकों को उनके गृह राज्य उत्तर प्रदेश रवाना कर दिया, जिससे कई सवाल खड़े हो गए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह मामला शैलेन्द्र पाण्डे के मकान से जुड़ा है, जहां किसी स्थानीय व्यक्ति की सिफारिश पर उत्तर प्रदेश के देवरिया और गोरखपुर जिले के रहने वाले दो युवकों को किराए पर कमरा दिया गया था। सिफारिश करने वाले व्यक्ति ने मकान मालिक को बताया था कि दोनों युवक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में वन विभाग में कार्यरत हैं। स्थानीय पहचान के आधार पर भरोसा करते हुए शैलेन्द्र पाण्डे ने उन्हें कमरा दे दिया।

मामले ने उस समय मोड़ लिया जब एक महीने बीत जाने के बाद भी दोनों युवक न तो वर्दी में नजर आए और न ही किसी प्रकार की ड्यूटी पर जाते दिखे। इससे मकान मालिक को संदेह हुआ। उन्होंने इस संबंध में कोतवाली पुलिस को दो बार मौखिक सूचना दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने थाना प्रभारी मदन लाल मरावी को लिखित शिकायत सौंपी, जिसके बाद पुलिस हरकत में आई।

पुलिस ने दोनों युवकों को कोतवाली बुलाकर पूछताछ की। जांच के दौरान यह सामने आया कि उनके पास मौजूद नियुक्ति पत्र फर्जी थे। हालांकि, मकान मालिक का आरोप है कि पुलिस की कार्रवाई पूरी तरह पारदर्शी नहीं रही। उनका कहना है कि पुलिस जांच के बाद रात में ही दोनों युवक अपना सामान लेकर चले गए और उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं दी गई।

इस पूरे मामले पर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के उप संचालक योहन कटारा ने स्पष्ट किया कि वन विभाग द्वारा ऐसी कोई नियुक्ति नहीं की गई है और यह पूरी तरह फर्जी मामला है। उन्होंने यह भी बताया कि पहले भी इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं और विभाग ने अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।

वहीं, एसडीओपी पुन्नू सिंह के अनुसार, पूछताछ में युवकों ने बताया कि उनके ही गांव के एक व्यक्ति ने उन्हें बांधवगढ़ में फॉरेस्ट गार्ड की नौकरी दिलाने का झांसा दिया था और फर्जी नियुक्ति पत्र भी उपलब्ध कराए थे। बाद में उन्हें खुद ही इस धोखाधड़ी का अहसास हुआ। पुलिस के अनुसार, इस मामले का क्षेत्राधिकार उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और देवरिया में आता है, इसलिए युवकों को वहीं जाकर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है।

गौरतलब है कि भारतीय कानून के तहत कोई भी पीड़ित देश के किसी भी हिस्से में एफआईआर दर्ज करा सकता है, लेकिन इस मामले में स्थानीय पुलिस ने प्रकरण दर्ज नहीं किया। यही वजह है कि पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आशंका जताई जा रही है कि यह कोई संगठित ठगी का रैकेट हो सकता है या फिर किसी बड़े अपराध की योजना का हिस्सा भी हो सकता है। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की कार्यप्रणाली और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब मिलना अभी बाकी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुरेन्‍द्र त्रिपाठी