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सागर में ऑनलाइन सट्टेबाजी गिरोह का भंडाफोड़, 2.69 करोड़ नकद और 30 लाख का सोना बरामद

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सागर में ऑनलाइन सट्टेबाजी गिरोह का भंडाफोड़, 2.69 करोड़ नकद और 30 लाख का सोना बरामद


सागर, 19 अगस्त (हि.स.)। मध्यप्रदेश के सागर जिले में मकरोनिया थाना पुलिस और साइबर सेल ने बुधवार काे संगठित साइबर अपराध तथा ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़े अंतरप्रांतीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 2 करोड़ 69 लाख रुपये से अधिक नकद, करीब 30 लाख रुपये मूल्य का सोना, नोट गिनने की मशीन और कई डिजिटल दस्तावेज बरामद किए हैं। प्रारंभिक जांच में गिरोह से जुड़ी 20 से अधिक फर्जी फर्मों के बैंक खातों में 5.50 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है।

पुलिस के अनुसार, गिरोह बेरोजगार युवाओं और आम लोगों को कमीशन एवं पैसों का लालच देकर उनके दस्तावेज हासिल करता था। इन दस्तावेजों के आधार पर फर्जी फर्म तैयार कर बैंक में चालू खाते खुलवाए जाते थे। बाद में इन खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन सट्टेबाजी और संदिग्ध रकम के लेन-देन के लिए किया जाता था।

पीड़ित की शिकायत से खुला नेटवर्क

मामले का खुलासा 13 अगस्त 2026 को हुआ, जब मकरोनिया निवासी रोहित पटेल ने थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि उसके दस्तावेजों का कथित रूप से दुरुपयोग करते हुए ‘ग्लैमर इंटरप्राइजेस’ नाम से फर्म बनाई गई और फेडरल बैंक में उसके नाम से चालू खाता खोला गया। जांच में सामने आया कि इस खाते के जरिए करीब छह महीने के दौरान लगभग 90 लाख रुपये का लेन-देन हुआ था।

शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में विशेष टीम गठित की गई। जांच के दौरान पुलिस ने धर्मेंद्र नाहर और सोनू डांगी को गिरफ्तार किया। पूछताछ में दोनों से मिले सुरागों के आधार पर पुलिस भोपाल और अन्य शहरों तक पहुंची।

भोपाल से जुड़े आरोपियों तक पहुंची पुलिस

पुलिस जांच में सामने आया कि धर्मेंद्र नाहर और सोनू डांगी ने भोपाल निवासी अमित विश्वकर्मा से इस तरह के नेटवर्क को संचालित करने की जानकारी हासिल की थी। इसके बाद पुलिस ने मामले से जुड़े तारों की पड़ताल करते हुए भोपाल, खजुराहो और इंदौर से जुड़े आरोपियों तक पहुंच बनाई।

पुलिस ने मुख्य आरोपी ऋषभ पटेल के अलावा अमित विश्वकर्मा, विपिन गिरी और स्वर्णेन्द्र पांडे को भी गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान ऑनलाइन सट्टेबाजी के संचालन और फर्जी बैंक खातों के इस्तेमाल से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की बात पुलिस ने कही है।

टेलीग्राम के जरिए बनाता था ग्राहकों की चेन

पुलिस के अनुसार, ऋषभ पटेल ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था। वह टेलीग्राम समूहों के जरिए ग्राहकों का नेटवर्क तैयार करता था। ऑनलाइन सट्टेबाजी वेबसाइट के संचालक के रूप में लोगों को लिंक और क्रेडिट कॉइन उपलब्ध कराए जाते थे। इसके बाद सट्टेबाजी से प्राप्त रकम को फर्जी फर्मों के बैंक खातों में स्थानांतरित कर नकदी के रूप में निकाला जाता था।

जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी के कब्जे से बड़ी मात्रा में नकदी और सोना बरामद किया। इसके अलावा नोट गिनने की मशीन तथा डिजिटल दस्तावेज भी पुलिस के हाथ लगे हैं।

20 से अधिक फर्जी फर्मों का पता

तकनीकी जांच में पुलिस को अब तक 20 से अधिक ऐसी फर्मों की जानकारी मिली है, जिनका इस्तेमाल संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के लिए किए जाने की आशंका है। इनमें ग्लैमर इंटरप्राइजेस, भूपेंद्र इंटरप्राइजेस, सूर्या इंटरप्राइजेस, समृद्धि टूर एंड ट्रेवल्स, लवली स्वीट एंड मसाला चाट सेंटर, कार्तिक इलेक्ट्रॉनिक्स, स्टार इंटरप्राइजेस, राजपूत इंटरप्राइजेस, अनुभव ट्रेडर्स, सागर ट्रेडर्स, शर्मा जी इंटरप्राइजेस और महाकाल ट्रेडर्स सहित अन्य फर्म शामिल हैं।

पुलिस के अनुसार, इन खातों के शुरुआती विश्लेषण में 5.50 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेन-देन सामने आए हैं। जांच अभी जारी है और रकम के वास्तविक स्रोत तथा नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है।

बैंक खाते और फर्म पंजीयन की भी जांच

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बिना पर्याप्त भौतिक सत्यापन के फर्जी फर्मों का पंजीयन कैसे हुआ और उनके नाम पर बैंकों में चालू खाते किस प्रक्रिया के तहत खोले गए। जांच में यदि किसी बैंक कर्मचारी, संबंधित संस्था या पंजीयन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी की लापरवाही अथवा संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस ने लोगों को किया सतर्क

सागर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी के बहकावे या कमीशन के लालच में आकर अपना आधार, पैन कार्ड, बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासवर्ड अथवा एकमुश्त पासवर्ड जैसी संवेदनशील जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को उपलब्ध न कराएं।

पुलिस ने चेतावनी दी है कि अपने नाम पर किसी दूसरे व्यक्ति को फर्म या बैंक खाता संचालित करने देना गंभीर कानूनी जोखिम पैदा कर सकता है। ऐसे खातों का इस्तेमाल साइबर अपराध में होने पर खाताधारक भी जांच के दायरे में आ सकता है। पुलिस ने लोगों से संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों की जानकारी तत्काल पुलिस को देने की अपील की है।

हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुमार चौबे