पण्डो जनजाति की भूमि फर्जी तरीके से गैर-आदिवासी के नाम कराने का आरोपित गिरफ्तार
रायगढ़ , 01 अक्टूबर (हि.स.)। ऑपरेशन क्लीन हंट के तहत कापू पुलिस ने आज पण्डो जनजाति की भूमि को कथित रूप से फर्जी तरीके से गैर-आदिवासी के नाम विक्रय कराने के मामले में फरार चल रहे आरोपित सुखन राठिया पिता धनाराम राठिया, उम्र 50 वर्ष, निवासी बकालो, थाना कापू को पुलिस ने कोरबा से हिरासत में लेकर रायगढ़ लाया।
पूछताछ एवं विवेचना में आरोपित की उक्त भूमि की फर्जी-बिक्री में संलिप्तता पाए जाने पर उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में आज पेश किया गया,जहां से उसे रिमांड पर भेजा गया है।
कापू पुलिस द्वारा पण्डो जनजाति की भूमि को फर्जी तरीके से गैर-आदिवासी के नाम विक्रय कराने तथा ग्राम पंचायत रायमेर की शासकीय भूमि के फर्जी दस्तावेज एवं पट्टे तैयार कर दलालों के माध्यम से रजिस्ट्री कराने के मामले की जांच की जा रही है। प्रकरण में तत्कालीन पटवारी राकेश कुमार साय तथा रजिस्ट्री के गवाह अगस्तुस खलखो की गिरफ्तारी के बाद पुलिस द्वारा अन्य संलिप्त की तलाश तेज की गई थी। इसी क्रम में सुखन राठिया गिरफ्तारी से बचने के लिए पहले तमिलनाडु फरार हो गया था। बाद में पुलिस की तलाश की जानकारी मिलने पर वह कोरबा में अपना ठिकाना बनाकर रह रहा था, जहां कापू पुलिस ने उसे हिरासत में लिया
ग्राम डुमरनारा की भूमि खसरा नंबर 409 के संबंध में सामने आया कि उक्त भूमि पूर्व से पण्डो जनजाति के सदस्यों के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज रही है। वर्ष 2023-24 के राजस्व अभिलेखों की जांच में बिना सक्षम अधिकारी के आदेश के भूमि को सुखन पिता बजरंग, जाति रावत के नाम दर्ज किया जाना पाया गया। इसके बाद 21 फरवरी 2024 को उक्त भूमि का पंजीकृत विक्रय पत्र के माध्यम से संतोष देवी गुप्ता निवासी रायपुर के नाम विक्रय किया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि विक्रेता के रूप में जिस व्यक्ति को प्रस्तुत किया गया, उसका वास्तविक नाम सुखन राठिया पिता धनाराम, जाति कंवर है। दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान फर्जी आधार कार्ड के उपयोग की बात भी सामने आई। जांच में तत्कालीन हल्का पटवारी राकेश कुमार साय द्वारा उक्त भूमि के विक्रय के लिए चौहद्दी प्रदान किए जाने की भूमिका भी सामने आई है।
7 जुलाई 2026 को प्रार्थी उन्मेश पटेल की रिपोर्ट पर प्रकरण दर्ज कर विवेचना में लिया गया। विवेचना में विक्रेता सुखन राठिया, क्रेता संतोष देवी गुप्ता, साक्षी संतन राठिया एवं जीवन वर्धन तथा तत्कालीन हल्का पटवारी राकेश कुमार साय की भूमिका की जांच की गई।
गिरफ्तार सुखन राठिया ने पूछताछ में अपना वास्तविक नाम सुखन राठिया पिता धनाराम राठिया होना बताया। आरोपी के अनुसार तत्कालीन पटवारी राकेश साय एवं अन्य आरोपियों द्वारा उसका नाम सुखन पिता बजरंग रावत दर्शाकर जमीन की रजिस्ट्री कराई गई थी, जिसके एवज में उसे 10,000 दिए गए थे। बाद में उक्त भूमि को गैर-आदिवासी संतोष देवी गुप्ता के नाम विक्रय किया गया। विवेचना में पण्डो जनजाति की भूमि की विधि-विरुद्ध खरीदी-बिक्री में संलिप्तता पाए जाने पर उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे रिमांड पर भेजा गया है।
हिन्दुस्थान समाचार / रघुवीर प्रधान

