यमुनानगर धान घोटाले में बड़ी कार्रवाई, चार अधिकारी सेवा से निष्कासित
यमुनानगर, 19 मार्च (हि.स.)। यमुनानगर में सरकार द्वारा सख़्त कदम उठाते हुए बहुचर्चित धान अनियमितता प्रकरण में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के तीन निरीक्षकों और एक सहायक खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। यह कार्रवाई विभागीय जांच में गंभीर लापरवाही और कर्तव्य पालन में चूक के निष्कर्ष सामने आने के बाद की गई।
विभाग के निदेशक अंशज कुमार द्वारा जारी आदेशों में कहा गया है कि संबंधित अधिकारियों की निगरानी में धान खरीद और भंडारण व्यवस्था में भारी गड़बड़ियां पाई गईं, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये की क्षति हुई। मामला धान खरीद सत्र 2025-26 के दौरान विभिन्न मंडियों और राइस मिलों की देखरेख से जुड़ा है। जांच में सामने आया कि तैनाती अवधि के दौरान आवंटित धान और वास्तविक स्टॉक के बीच बड़े अंतर पाए गए। कई मामलों में हजारों मीट्रिक टन धान का अभाव दर्ज किया गया, जिससे वित्तीय नुकसान का आंकड़ा तेजी से बढ़ा।
विशेष रूप से प्रतापनगर क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान भौतिक सत्यापन में गंभीर विसंगतियां उजागर हुईं हैं। रिपोर्ट के अनुसार, रिकॉर्ड प्रबंधन में भी अनियमितताएं सामने आईं। मंडियों में फर्जी गेट पास के माध्यम से कागजों में खरीद दर्शाई गई, जबकि वास्तविक भंडार उपलब्ध नहीं था। अधिकारियों पर यह भी आरोप है कि उन्होंने समय रहते स्थिति को नियंत्रित करने के बजाय तथ्यों को छिपाने का प्रयास किया। जांच में यह तथ्य भी उभरा कि कुछ राइस मिलों में लगातार कमी के संकेत मिलने के बावजूद आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई। विभागीय निर्देशों और निर्धारित प्रक्रियाओं की अनदेखी को भी गंभीर उल्लंघन माना गया।
मामले में संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब का अवसर दिया गया था। व्यक्तिगत सुनवाई के बाद प्रस्तुत स्पष्टीकरण असंतोषजनक पाए गए। 10 मार्च 2026 की जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि निगरानी तंत्र की विफलता के कारण बड़े स्तर पर अनियमितता संभव हुई। इसके आधार पर हरियाणा सिविल सेवा नियमावली, 2016 के तहत चारों अधिकारियों को सेवा से निष्कासित कर दिया गया। आदेश में कहा गया है कि यह दंड उन्हें भविष्य में किसी भी सरकारी सेवा के लिए अयोग्य बनाता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार

