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छह राज्यों में छापेमारी कर 10 करोड़ की साइबर ठगी करने वाले छह गिरफ्तार

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छह राज्यों में छापेमारी कर 10 करोड़ की साइबर ठगी करने वाले छह गिरफ्तार


नई दिल्ली, 25 मार्च (हि.स.)। बाहरी उत्तरी जिले के साइबर थाना पुलिस ने छह राज्यों में छापेमारी कर 10 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी करने वाले इंटर-स्टेट साइबर ठग गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में छह आरोपितों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों की पहचान झारखंड के रांची निवासी शशिकांत कुमार (36), उत्तराखंड निवासी खालिद त्यागी (35), दिल्ली के शाहदरा निवासी सचिन मित्तल (45), गाजियाबाद निवासी आसिफ (42), शाहदरा निवासी नितिन सैनी और चंडीगढ़ निवासी वीरेंद्र (20) के रूप में हुई है। बाहरी उत्तरी जिले के पुलिस अधिकारी हरेश्वर वी. स्वामी ने बताया कि एसएचओ साइबर इंस्पेक्टर गोविंद सिंह की टीम ने इस पूरे गिरोह का पर्दाफाश किया। पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर लगभग 19 लाख रुपये शिकायतकर्ताओं को वापस भी कराए हैं। आरोपितों के कब्जे से मोबाइल फोन, चेक बुक, पेन ड्राइव और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं।

सीबीआई अधिकारी बताकर बुजुर्ग से 20 लाख ठगे

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, गिरोह डिजिटल अरेस्ट, नकली आईपीओ, ट्रेडिंग और इन्वेस्टमेंट स्कैम के जरिए लोगों को ठगता था। जांच में कुल 89 शिकायतों में लगभग 10.6 करोड़ रुपये की ठगी का खुलासा हुआ है। गिरोह खास तौर पर बुजुर्ग लोगों को निशाना बनाता था। पुलिस जांच में सामने आया कि एक मामले में ठगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर एक बुजुर्ग दंपति को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया। नकली वारंट और गिरफ्तारी की धमकी देकर उन्हें लगभग एक सप्ताह तक मानसिक दबाव में रखा गया और उनसे करीब 20 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए। जांच के दौरान 18.5 लाख रुपये बंधन बैंक के एक खाते में मिले, जो “एसकेएस एंटरप्राइजेज” के नाम से जुड़ा था और इसे आरोपी शशिकांत कुमार संचालित कर रहा था। पुलिस ने उसे रांची से गिरफ्तार किया।

इन्वेस्टमेंट स्कीम के नाम पर लोगों को व्हाट्सएप ग्रुप से ठगी

जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह नकली आईपीओ और इन्वेस्टमेंट स्कीम के नाम पर लोगों को व्हाट्सएप ग्रुप और फर्जी ऐप के जरिए निवेश करने के लिए फंसाता था। शुरुआत में नकली मुनाफा दिखाया जाता था, जिससे लोग और पैसे निवेश करते थे, बाद में पैसे निकालने पर रोक लगा दी जाती थी। इसके अलावा ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के नाम पर भी लोगों से ठगी की जाती थी।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक गिरोह म्यूल बैंक अकाउंट का इस्तेमाल कर ठगी की रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करता था ताकि पुलिस को ट्रांजैक्शन ट्रेस करने में मुश्किल हो। इस पूरे नेटवर्क में अलग-अलग राज्यों के लोग शामिल थे, जो बैंक खाते उपलब्ध कराने, पैसे निकालने और तकनीकी सहायता देने का काम करते थे। पुलिस मामला दर्ज कर आगे की जांच-पड़ताल कर रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी