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शालीमार बाग में घरेलू सहायिका बनकर रह रही थीं दो बांग्लादेशी महिलाएं, गिरफ्तार

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शालीमार बाग में घरेलू सहायिका बनकर रह रही थीं दो बांग्लादेशी महिलाएं, गिरफ्तार


नई दिल्ली, 04 अप्रैल (हि.स.)। उत्तर-पश्चिम जिले में अवैध रूप से रह रही दो बांग्लादेशी महिलाओं को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। ये महिलाएं घरेलू सहायिका के रूप में काम कर दिल्ली में बसने की कोशिश कर रही थीं। पुलिस ने इनके कब्जे से दो मोबाइल फोन और बांग्लादेशी पहचान से जुड़े दस्तावेज बरामद किए हैं।

उत्तर-पश्चिम जिले की पुलिस उपायुक्त आकांक्षा यादव ने शनिवार को बताया कि जिले की विदेशी सेल को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ बांग्लादेशी महिलाएं शालीमार बाग इलाके में घरेलू काम के बहाने अवैध रूप से रह रही हैं। सूचना के आधार पर इंस्पेक्टर विपिन कुमार के नेतृत्व में टीम गठित की गई और इलाके में निगरानी बढ़ाई गई। पुलिस उपायुक्त ने बताया कि एक अप्रैल की सुबह टीम ने हैदरपुर की ओर जा रही दो संदिग्ध महिलाओं को रोककर पूछताछ की। शुरुआत में दोनों ने खुद को भारतीय नागरिक बताया और घरों में काम करने की बात कही, लेकिन उनके जवाबों में विरोधाभास मिलने पर पुलिस का शक गहरा गया। जांच के दौरान दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल की गई, जिससे स्पष्ट हुआ कि दोनों महिलाएं बांग्लादेश की नागरिक हैं और बिना वैध दस्तावेज के भारत में रह रही थीं। पूछताछ में सामने आया कि इनमें से एक महिला स्नातक है, जो अधिक पैसे कमाने के उद्देश्य से दिल्ली आई थी, जबकि दूसरी अशिक्षित है। पुलिस ने इनके पास से दो स्मार्टफोन बरामद किए, जिनमें प्रतिबंधित आईएमओ ऐप इंस्टॉल मिला। साथ ही मोबाइल में बांग्लादेशी राष्ट्रीय पहचान पत्र की तस्वीरें भी मिलीं। गिरफ्तार महिलाओं की पहचान 47 वर्षीय अफरोजा खातून और 36 वर्षीय लुकी बेगम के रूप में हुई है, जो बांग्लादेश के खुलना और कोमिल्ला जिलों की रहने वाली हैं।

पुलिस ने दोनों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई करते हुए उन्हें विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) के समक्ष पेश किया है। अधिकारियों के अनुसार, दोनों को जल्द ही निर्वासन की प्रक्रिया के तहत बांग्लादेश भेजा जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी